AT Act 6अध्याय II · Establishment of Tribunals and Benches Thereof
धारा 6 · अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों के रूप में नियुक्ति के लिए योग्यताएं।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [ 6. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों के रूप में नियुक्ति के लिए योग्यताएँ। --(1) कोई व्यक्ति अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के लिए तब तक योग्य नहीं होगा जब तक कि वह उच्च न्यायालय का न्यायाधीश न हो या रह चुका हो:
बशर्ते कि इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त व्यक्ति अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होगा यदि ऐसा व्यक्ति कम से कम दो वर्षों की अवधि के लिए उपाध्यक्ष के पद पर रहा हो।
(2) कोई व्यक्ति नियुक्ति के लिए योग्य नहीं होगा,--
(क) प्रशासनिक सदस्य के रूप में, जब तक कि उसने कम से कम दो वर्षों तक भारत सरकार के सचिव का पद या केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पद पर, जिसका वेतनमान भारत सरकार के सचिव के वेतनमान से कम न हो, या कम से कम पांच वर्षों तक भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव का पद या केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पद पर, जिसका वेतनमान भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव के वेतनमान से कम न हो, कम से कम पांच वर्षों तक न रहा हो:
बशर्ते कि अखिल भारतीय सेवाओं से संबंधित वे अधिकारी जो किसी निचले पद पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे या हैं, उन्हें सचिव या अतिरिक्त सचिव, जैसा भी मामला हो, के पद पर उस तिथि से आसीन माना जाएगा जिस तिथि से ऐसे अधिकारियों को सचिव या अतिरिक्त सचिव, जैसा भी मामला हो, के स्तर पर औपचारिक पदोन्नति या वास्तविक पदोन्नति प्रदान की गई थी, जो भी पहले हो, और ऐसी तिथि के बाद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर व्यतीत अवधि इस खंड के प्रयोजनों के लिए अर्हक सेवा के रूप में गिनी जाएगी;
(ख) न्यायिक सदस्य के रूप में, जब तक कि वह उच्च न्यायालय का न्यायाधीश न हो या न्यायाधीश बनने के योग्य न हो, या उसने कम से कम दो वर्षों तक भारत सरकार के विधि मामलों के विभाग या विधान विभाग में सचिव का पद धारण न किया हो, जिसमें भारत के विधि आयोग के सदस्य-सचिव का पद भी शामिल है, या कम से कम पांच वर्षों की अवधि के लिए भारत सरकार के विधि मामलों के विभाग और विधान विभाग में अतिरिक्त सचिव का पद धारण न किया हो।
(3) केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष और अन्य सभी सदस्यों की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।
(4) उपधारा (3) के प्रावधान के अधीन रहते हुए, किसी राज्य के प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष और प्रत्येक अन्य सदस्य की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के बाद की जाएगी।
(5) संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष और अन्य प्रत्येक सदस्य को उप-धारा (3) के प्रावधानों के अधीन तथा मुख्य अधिनियम की धारा 4 की उप-धारा (3) के अंतर्गत प्रकाशित सहभागी राज्य सरकारों के बीच समझौते की शर्तों के अधीन, संबंधित राज्यों के राज्यपालों से परामर्श के बाद राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाएगा।
स्पष्टीकरण .--इस धारा के प्रयोजन के लिए, केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी पद पर आसीन रहने की अवधि की गणना करते समय, उस अवधि को भी शामिल किया जाएगा जिसमें वह केंद्र या राज्य सरकार के अधीन (इस अधिनियम के अधीन किसी पद सहित) उसी वेतनमान पर उच्च वेतनमान वाले किसी अन्य पद पर आसीन रहा हो।
बशर्ते कि इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त व्यक्ति अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होगा यदि ऐसा व्यक्ति कम से कम दो वर्षों की अवधि के लिए उपाध्यक्ष के पद पर रहा हो।
(2) कोई व्यक्ति नियुक्ति के लिए योग्य नहीं होगा,--
(क) प्रशासनिक सदस्य के रूप में, जब तक कि उसने कम से कम दो वर्षों तक भारत सरकार के सचिव का पद या केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पद पर, जिसका वेतनमान भारत सरकार के सचिव के वेतनमान से कम न हो, या कम से कम पांच वर्षों तक भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव का पद या केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पद पर, जिसका वेतनमान भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव के वेतनमान से कम न हो, कम से कम पांच वर्षों तक न रहा हो:
बशर्ते कि अखिल भारतीय सेवाओं से संबंधित वे अधिकारी जो किसी निचले पद पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे या हैं, उन्हें सचिव या अतिरिक्त सचिव, जैसा भी मामला हो, के पद पर उस तिथि से आसीन माना जाएगा जिस तिथि से ऐसे अधिकारियों को सचिव या अतिरिक्त सचिव, जैसा भी मामला हो, के स्तर पर औपचारिक पदोन्नति या वास्तविक पदोन्नति प्रदान की गई थी, जो भी पहले हो, और ऐसी तिथि के बाद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर व्यतीत अवधि इस खंड के प्रयोजनों के लिए अर्हक सेवा के रूप में गिनी जाएगी;
(ख) न्यायिक सदस्य के रूप में, जब तक कि वह उच्च न्यायालय का न्यायाधीश न हो या न्यायाधीश बनने के योग्य न हो, या उसने कम से कम दो वर्षों तक भारत सरकार के विधि मामलों के विभाग या विधान विभाग में सचिव का पद धारण न किया हो, जिसमें भारत के विधि आयोग के सदस्य-सचिव का पद भी शामिल है, या कम से कम पांच वर्षों की अवधि के लिए भारत सरकार के विधि मामलों के विभाग और विधान विभाग में अतिरिक्त सचिव का पद धारण न किया हो।
(3) केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष और अन्य सभी सदस्यों की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।
(4) उपधारा (3) के प्रावधान के अधीन रहते हुए, किसी राज्य के प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष और प्रत्येक अन्य सदस्य की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के बाद की जाएगी।
(5) संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष और अन्य प्रत्येक सदस्य को उप-धारा (3) के प्रावधानों के अधीन तथा मुख्य अधिनियम की धारा 4 की उप-धारा (3) के अंतर्गत प्रकाशित सहभागी राज्य सरकारों के बीच समझौते की शर्तों के अधीन, संबंधित राज्यों के राज्यपालों से परामर्श के बाद राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाएगा।
स्पष्टीकरण .--इस धारा के प्रयोजन के लिए, केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी पद पर आसीन रहने की अवधि की गणना करते समय, उस अवधि को भी शामिल किया जाएगा जिसमें वह केंद्र या राज्य सरकार के अधीन (इस अधिनियम के अधीन किसी पद सहित) उसी वेतनमान पर उच्च वेतनमान वाले किसी अन्य पद पर आसीन रहा हो।
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