OPSCST Act 3
धारा 3 · अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित निर्दिष्ट वृक्षों में निहित हितों का संरक्षण
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित विशिष्ट वृक्षों में निहित हितों का संरक्षण।
(1)
इस अधिनियम के प्रारंभ होने के बाद किसी निर्दिष्ट वृक्ष के स्वामी द्वारा उसकी लकड़ी की बिक्री के लिए किया गया कोई भी अनुबंध वैध नहीं होगा यदि ऐसा स्वामी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य है और यदि अनुबंध प्रस्तावित लकड़ी का पर्याप्त विवरण देते हुए उस संबंध में किए गए आवेदन पर रेंज अधिकारी द्वारा दी गई पूर्व लिखित अनुमति के बिना किया गया है।(2)
आवेदन प्राप्त होने पर, संबंधित रेंज अधिकारी मौके पर मामले की जांच करेगा या किसी अन्य वन अधिकारी द्वारा ऐसी जांच करवाएगा और संबंधित ग्राम पंचायत या शहरी स्थानीय निकाय, जैसा भी मामला हो, से अनुरोध किया जाएगा कि वह जांच की तिथि पर एक या अधिक वार्ड सदस्यों को मौके पर भेजे: बशर्ते कि यदि रेंज अधिकारी को लगता है कि अनुबंध के लिए प्रतिफल अपर्याप्त है, तो वह मालिक को उड़ीसा वन निगम लिमिटेड या किसी अन्य राज्य के स्वामित्व वाले निगम को ऐसे प्रतिफल पर वृक्ष बेचने के लिए कह सकता है, जिसे रेंज अधिकारी उचित समझे।(3)
जांच रिपोर्ट पर जांच करने वाले अधिकारी, उपस्थित वार्ड सदस्य या सदस्यों और आवेदक द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे।(4)
जांच रिपोर्ट में अन्य बातों के अलावा, वृक्षों की प्रजातिवार संख्या, प्रत्येक वृक्ष की मोटाई और लकड़ी के लिए उचित प्रतिफल का उल्लेख किया जाएगा।(5)
आवेदक के वृक्ष में अधिकार, स्वामित्व और हित तथा अनुबंध के लिए प्रतिफल की पर्याप्तता से संतुष्ट होने पर, रेंज अधिकारी क्रेता को अपनी उपस्थिति में प्रतिफल राशि का भुगतान करने पर लकड़ी उठाने की अनुमति देगा।(6)
यदि आवेदन प्राप्त होने की तिथि से पंद्रह दिनों के भीतर रेंज अधिकारी द्वारा आवेदन पर कोई आदेश पारित नहीं किया जाता है, तो वृक्ष के स्वामी को अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति को वृक्ष बेचने की स्वतंत्रता होगी।इस धारा पर आपका निजी नोट
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