पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 511 अब CrPC धारा 465 है
त्रुटि, चूक या अनियमितता के कारण निर्णय या सजा को पलटा जा सकता है।
पुराना कानून
BNSS §511
त्रुटि, चूक या अनियमितता के कारण निर्णय या सजा को पलटा जा सकता है।
(1) इसमें पूर्वोक्त प्रावधानों के अधीन रहते हुए, सक्षम न्यायालय द्वारा पारित किसी भी निर्णय, सजा या आदेश को अपील न्यायालय, पुष्टिकरण न्यायालय या पुनरीक्षण न्यायालय द्वारा शिकायत, सम्मन, वारंट, उद्घोषणा, आदेश, निर्णय या अन्य कार्यवाही में, मुकदमे से पहले या उसके दौरान, या इस संहिता के अंतर्गत किसी भी जांच या अन्य कार्यवाही में, या अभियोजन के लिए किसी भी मंजूरी में किसी त्रुटि या अनियमितता के कारण उलट या परिवर्तित नहीं किया जाएगा, जब तक कि उस न्यायालय की राय में, वास्तव में न्याय में विफलता न हुई हो।
(2) इस संहिता के अंतर्गत किसी कार्यवाही में किसी त्रुटि, चूक या अनियमितता, या अभियोजन के लिए किसी स्वीकृति में किसी त्रुटि या अनियमितता के कारण न्याय में विफलता हुई है या नहीं, यह निर्धारित करते समय न्यायालय इस तथ्य पर विचार करेगा कि क्या आपत्ति कार्यवाही के प्रारंभिक चरण में उठाई जा सकती थी और उठाई जानी चाहिए थी।
पूरा पढ़ें: BNSS §511(2) इस संहिता के अंतर्गत किसी कार्यवाही में किसी त्रुटि, चूक या अनियमितता, या अभियोजन के लिए किसी स्वीकृति में किसी त्रुटि या अनियमितता के कारण न्याय में विफलता हुई है या नहीं, यह निर्धारित करते समय न्यायालय इस तथ्य पर विचार करेगा कि क्या आपत्ति कार्यवाही के प्रारंभिक चरण में उठाई जा सकती थी और उठाई जानी चाहिए थी।
नया कानून
CrPC §465
धारा 465. निष्कर्ष या दंडादेश किस दशा में त्रुटि, लोप या अनियमितता के कारण उलटा जा सकेगा
465. निष्कर्ष या दंडादेश किस दशा में त्रुटि, लोप या अनियमितता के कारण उलटा जा सकेगा
(1) इसमें इससे पूर्व अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा पारित कोई निष्कर्ष, दंडादेश या आदेश, परिवाद, समन, वारंट, उद्घोषणा, आदेश, निर्णय या विचारण के पूर्व या उसके दौरान की अन्य कार्यवाहियों में, अथवा इस संहिता के अधीन किसी जांच या अन्य कार्यवाही में, किसी त्रुटि, लोप या अनियमितता के कारण, अथवा अभियोजन के लिए किसी मंजूरी में किसी त्रुटि या अनियमितता के कारण, अपील, पुष्टि या पुनरीक्षण न्यायालय द्वारा उलटा या परिवर्तित नहीं किया जाएगा, जब तक कि उस न्यायालय की राय में उससे वस्तुतः न्याय की विफलता न हुई हो।
(2) यह अवधारित करने में कि क्या इस संहिता के अधीन किसी कार्यवाही में किसी त्रुटि, लोप या अनियमितता से, अथवा अभियोजन के लिए किसी मंजूरी में किसी त्रुटि या अनियमितता से, न्याय की विफलता हुई है, न्यायालय इस तथ्य को ध्यान में रखेगा कि क्या वह आपत्ति कार्यवाहियों के किसी पूर्वतर प्रक्रम में उठाई जा सकती थी और उठाई जानी चाहिए थी।
पूरा पढ़ें: CrPC §465(1) इसमें इससे पूर्व अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा पारित कोई निष्कर्ष, दंडादेश या आदेश, परिवाद, समन, वारंट, उद्घोषणा, आदेश, निर्णय या विचारण के पूर्व या उसके दौरान की अन्य कार्यवाहियों में, अथवा इस संहिता के अधीन किसी जांच या अन्य कार्यवाही में, किसी त्रुटि, लोप या अनियमितता के कारण, अथवा अभियोजन के लिए किसी मंजूरी में किसी त्रुटि या अनियमितता के कारण, अपील, पुष्टि या पुनरीक्षण न्यायालय द्वारा उलटा या परिवर्तित नहीं किया जाएगा, जब तक कि उस न्यायालय की राय में उससे वस्तुतः न्याय की विफलता न हुई हो।
(2) यह अवधारित करने में कि क्या इस संहिता के अधीन किसी कार्यवाही में किसी त्रुटि, लोप या अनियमितता से, अथवा अभियोजन के लिए किसी मंजूरी में किसी त्रुटि या अनियमितता से, न्याय की विफलता हुई है, न्यायालय इस तथ्य को ध्यान में रखेगा कि क्या वह आपत्ति कार्यवाहियों के किसी पूर्वतर प्रक्रम में उठाई जा सकती थी और उठाई जानी चाहिए थी।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
