पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 500 अब CrPC धारा 454 है
धारा 498 या धारा 499 के तहत आदेशों के विरुद्ध अपील।
पुराना कानून
BNSS §500
धारा 498 या धारा 499 के तहत आदेशों के विरुद्ध अपील।
(1) धारा 498 या धारा 499 के तहत किसी न्यायालय या मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए आदेश से पीड़ित कोई व्यक्ति उस आदेश के विरुद्ध उस न्यायालय में अपील कर सकता है जिसमें पूर्व न्यायालय द्वारा दिए गए दोषसिद्धि के विरुद्ध अपीलें सामान्यतः होती हैं।
(2) ऐसी अपील पर, अपीलीय न्यायालय अपील के निपटारे तक आदेश को स्थगित करने का निर्देश दे सकता है, या आदेश को संशोधित, परिवर्तित या रद्द कर सकता है और कोई भी आगे के आदेश दे सकता है जो उचित हो।
(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग अपील, पुष्टि या पुनरीक्षण न्यायालय द्वारा भी उस मामले से निपटते समय किया जा सकता है जिसमें उपधारा (1) में निर्दिष्ट आदेश दिया गया था।
पूरा पढ़ें: BNSS §500(2) ऐसी अपील पर, अपीलीय न्यायालय अपील के निपटारे तक आदेश को स्थगित करने का निर्देश दे सकता है, या आदेश को संशोधित, परिवर्तित या रद्द कर सकता है और कोई भी आगे के आदेश दे सकता है जो उचित हो।
(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग अपील, पुष्टि या पुनरीक्षण न्यायालय द्वारा भी उस मामले से निपटते समय किया जा सकता है जिसमें उपधारा (1) में निर्दिष्ट आदेश दिया गया था।
नया कानून
CrPC §454
धारा 454. धारा 452 या धारा 453 के अधीन आदेशों के विरुद्ध अपील
454. धारा 452 या धारा 453 के अधीन आदेशों के विरुद्ध अपील
(1) कोई व्यक्ति, जो धारा 452 या धारा 453 के अधीन किसी न्यायालय द्वारा किए गए आदेश से व्यथित है, उस न्यायालय में उसके विरुद्ध अपील कर सकेगा जिसमें पूर्वोक्त न्यायालय द्वारा की गई दोषसिद्धियों से साधारणतया अपील होती है।
(2) ऐसी अपील पर, अपील न्यायालय यह निदेश दे सकेगा कि अपील के निपटारे तक आदेश पर रोक रहेगी, अथवा वह उस आदेश को उपांतरित, परिवर्तित या अपास्त कर सकेगा और ऐसे और आदेश कर सकेगा जो न्यायसंगत हों।
(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग अपील, पुष्टि या पुनरीक्षण न्यायालय द्वारा उस मामले का निपटारा करते समय भी किया जा सकेगा जिसमें उपधारा (1) में निर्दिष्ट आदेश किया गया था।
पूरा पढ़ें: CrPC §454(1) कोई व्यक्ति, जो धारा 452 या धारा 453 के अधीन किसी न्यायालय द्वारा किए गए आदेश से व्यथित है, उस न्यायालय में उसके विरुद्ध अपील कर सकेगा जिसमें पूर्वोक्त न्यायालय द्वारा की गई दोषसिद्धियों से साधारणतया अपील होती है।
(2) ऐसी अपील पर, अपील न्यायालय यह निदेश दे सकेगा कि अपील के निपटारे तक आदेश पर रोक रहेगी, अथवा वह उस आदेश को उपांतरित, परिवर्तित या अपास्त कर सकेगा और ऐसे और आदेश कर सकेगा जो न्यायसंगत हों।
(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग अपील, पुष्टि या पुनरीक्षण न्यायालय द्वारा उस मामले का निपटारा करते समय भी किया जा सकेगा जिसमें उपधारा (1) में निर्दिष्ट आदेश किया गया था।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
