पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNS धारा 337 अब IPC धारा 466 है
न्यायालय के अभिलेखों या सार्वजनिक रजिस्टर आदि की जालसाजी।
पुराना कानून
BNS §337
न्यायालय के अभिलेखों या सार्वजनिक रजिस्टर आदि की जालसाजी।
जो कोई भी किसी न्यायालय की कार्यवाही या अभिलेख, या सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र (मतदाता पहचान पत्र या आधार कार्ड सहित), या जन्म, विवाह या मृत्यु का रजिस्टर, या किसी लोक सेवक द्वारा रखा गया रजिस्टर, या किसी लोक सेवक द्वारा अपनी आधिकारिक क्षमता में जारी किया गया प्रमाण पत्र या दस्तावेज, या किसी मुकदमे को दायर करने या बचाव करने, या उसमें कोई कार्यवाही करने, या निर्णय स्वीकार करने का अधिकार पत्र, या पावर ऑफ अटॉर्नी को जाली बनाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
स्पष्टीकरण। —इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "रजिस्टर" में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (21 ऑफ 2000) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (आर) में परिभाषित इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखी गई किसी भी प्रविष्टि की सूची, डेटा या रिकॉर्ड शामिल है।
पूरा पढ़ें: BNS §337स्पष्टीकरण। —इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "रजिस्टर" में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (21 ऑफ 2000) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (आर) में परिभाषित इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखी गई किसी भी प्रविष्टि की सूची, डेटा या रिकॉर्ड शामिल है।
नया कानून
IPC §466
धारा 466 - न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना
न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना
जो कोई ऐसे दस्तावेज की या ऐसे इलैक्ट्रानिक अभिलेख कीट जिसका कि किसी न्यायालय का या न्यायालय में अभिलेख या कार्यवाही होना, या जन्म, वपतिस्मा, विवाह या अन्त्येष्टि का रजिस्टर, या लोक सेवक द्वारा लोक सेवक के नाते रखा गया रजिस्टर होना तात्पर्यित हो, अथवा किसी प्रमाणपत्र की या ऐसी दस्तावेज की जिसके बारे में यह तात्पर्यित हो कि वह किसी लोक सेवक द्वारा उसकी पदीय हैसियत में रची गई है, या जो किसी वाद को संस्थित करने या वाद में प्रतिरक्षा करने का, उसमें कोई कार्यवाही करने का, या दावा संस्वीकॄत कर लेने का,
स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “रजिस्टर” के अंतर्गत सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (द) में परिभाषित इलैक्ट्रानिक रूप में रखी गई कोई सूची, डाटा या किसी प्रविष्टि का अभिलेख भी है ।
पूरा पढ़ें: IPC §466जो कोई ऐसे दस्तावेज की या ऐसे इलैक्ट्रानिक अभिलेख कीट जिसका कि किसी न्यायालय का या न्यायालय में अभिलेख या कार्यवाही होना, या जन्म, वपतिस्मा, विवाह या अन्त्येष्टि का रजिस्टर, या लोक सेवक द्वारा लोक सेवक के नाते रखा गया रजिस्टर होना तात्पर्यित हो, अथवा किसी प्रमाणपत्र की या ऐसी दस्तावेज की जिसके बारे में यह तात्पर्यित हो कि वह किसी लोक सेवक द्वारा उसकी पदीय हैसियत में रची गई है, या जो किसी वाद को संस्थित करने या वाद में प्रतिरक्षा करने का, उसमें कोई कार्यवाही करने का, या दावा संस्वीकॄत कर लेने का,
स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “रजिस्टर” के अंतर्गत सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (द) में परिभाषित इलैक्ट्रानिक रूप में रखी गई कोई सूची, डाटा या किसी प्रविष्टि का अभिलेख भी है ।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
