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ऐसा कृत्य जिससे दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो।
जो कोई भी ऐसा कार्य इतनी जल्दबाजी या लापरवाही से करता है जिससे मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ जाए, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन महीने तक की अवधि के लिए या ढाई हजार रुपये तक के जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा, लेकिन— (क) जहां चोट पहुंचाई जाती है, वहां छह महीने तक की अवधि के लिए…
पूरा पढ़ेंधारा 337 - ऐसे कार्य द्वारा उपहति कारित करना, जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए
ऐसे कार्य द्वारा उपहति कारित करना, जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए जो कोई ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से कोई कार्य करने द्वारा, जिससे मानव जीवन या दूसरों का वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए, किसी व्यक्ति को उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो…
पूरा पढ़ेंन्यायालय के अभिलेखों या सार्वजनिक रजिस्टर आदि की जालसाजी।
जो कोई भी किसी न्यायालय की कार्यवाही या अभिलेख, या सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र (मतदाता पहचान पत्र या आधार कार्ड सहित), या जन्म, विवाह या मृत्यु का रजिस्टर, या किसी लोक सेवक द्वारा रखा गया रजिस्टर, या किसी लोक सेवक द्वारा अपनी आधिकारिक क्षमता में जारी किया गया प्रमाण पत्र या दस्तावेज, या किसी मुकदमे को दायर करने या…
पूरा पढ़ेंधारा 466 - न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना
न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना जो कोई ऐसे दस्तावेज की या ऐसे इलैक्ट्रानिक अभिलेख कीट जिसका कि किसी न्यायालय का या न्यायालय में अभिलेख या कार्यवाही होना, या जन्म, वपतिस्मा, विवाह या अन्त्येष्टि का रजिस्टर, या लोक सेवक द्वारा लोक सेवक के नाते रखा गया रजिस्टर होना तात्पर्यित हो, अथवा किसी प्रमाणपत्र…
पूरा पढ़ें- BNS §125(a)IPC §337
ऐसा कृत्य जिससे दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो।
धारा 337 - ऐसे कार्य द्वारा उपहति कारित करना, जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए
- BNS §337IPC §466
न्यायालय के अभिलेखों या सार्वजनिक रजिस्टर आदि की जालसाजी।
धारा 466 - न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना
