किस उपबंध के अधीन: भा.ना.सु.सं. धारा 250 / 262 (दं.प्र.सं. 227 / 239)
उन्मोचन (डिस्चार्ज) का आवेदन — भा.ना.सु.सं. धारा 250 / 262 (दं.प्र.सं. 227 / 239)
यह प्रारूप अंग्रेज़ी में (English)
खाने भरिए
आप यहाँ जो कुछ भी लिखते हैं वह आपके अपने ब्राउज़र में ही रहता है। न कहीं भेजा जाता है, न सहेजा जाता है, न हमें दिखता है। पन्ना बंद करते ही वह मिट जाता है — इसलिए प्रिंट करने से पहले बंद मत कीजिए।
जो खाना खाली छोड़ेंगे, उसकी जगह प्रिंट में एक लकीर छपेगी — उसे हाथ से भरा जा सकता है। खाली फ़ॉर्म प्रिंट करके साथ ले जाना भी ठीक है।
जैसे: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट; सत्र न्यायाधीश; अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय।
जैसे लिखी हैं वैसे ही — '318(4), 61(2) BNS'।
जिस तिथि से अपील या आवेदन की अवधि गिनी जाती है।
हर आधार अलग पंक्ति में, क्रमांक सहित। तथ्य लिखिए, विशेषण नहीं।
दस्तावेज़
न्यायालय श्रीमान ________________, ________________
वाद क्रमांक ________________
राज्य बनाम ________________
प्रथम सूचना रिपोर्ट क्रमांक ________________ दिनांक ________________, थाना ________________; धाराएँ: ________________
अभियुक्त की ओर से उन्मोचन (डिस्चार्ज) का आवेदन
इसके अधीन: भा.ना.सु.सं. धारा 250 (सत्र न्यायालय — सुपुर्दगी से 60 दिन के भीतर) या धारा 262 (मजिस्ट्रेट द्वारा वारंट मामला — दस्तावेज़ मिलने से 60 दिन के भीतर) [दं.प्र.सं. धारा 227 / 239]।
अभियुक्त सविनय निवेदन करता है:
1. पुलिस रिपोर्ट और उसके साथ के दस्तावेज़ अभियुक्त को दिनांक ________________ को मिले। यह आवेदन उस तिथि से 60 दिन के भीतर है।
2. अभिलेख पर उपलब्ध सामग्री को उसके पूरे रूप में स्वीकार कर लेने पर भी अभियुक्त के विरुद्ध कार्यवाही का पर्याप्त आधार नहीं बनता, क्योंकि:
________________
3. आरोप विरचित करने के चरण पर न्यायालय यह देखता है कि क्या प्रथम दृष्टया मामला बनता है; जहाँ सामग्री से केवल संदेह उत्पन्न हो, गंभीर संदेह नहीं, वहाँ अभियुक्त उन्मोचित किए जाने का हक़दार है (भारत संघ बनाम प्रफुल्ल कुमार सामल, (1979) 3 SCC 4)।
प्रार्थना: अतः प्रार्थना है कि अभियुक्त को इस मामले से उन्मोचित किया जाए।
अभियुक्त / द्वारा अधिवक्ता
________________
स्थान: ________________
दिनांक: ________________साथ क्या लगाना है
- आरोप-पत्र और उसके साथ मिले सभी दस्तावेज़ों की प्रति (धारा 230 / 231)।
- दस्तावेज़ मिलने या सुपुर्दगी की तिथि का प्रमाण — 60 दिन उसी से गिने जाते हैं।
- हर आधार के सामने आरोप-पत्र का पृष्ठ / गवाह का बयान लिखिए।
