संविधान (95वाँ संशोधन) अधिनियम, 2009
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 334
संविधान (95वां संशोधन) अधिनियम, 2009
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (95वां संशोधन) अधिनियम, 2009
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम
भारत गणराज्य के साठवें वर्ष में संसद द्वारा यह अधिनियमित किया जाता है कि:-
प्रस्तावना-उद्देश्य और कारणों का विवरण।
संविधान के अनुच्छेद 334 में यह प्रावधान है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों तथा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में नामांकन द्वारा एंग्लो-इंडियन समुदाय के प्रतिनिधित्व से संबंधित संविधान के प्रावधान संविधान के लागू होने की तिथि से साठ वर्ष की अवधि समाप्त होने पर प्रभावी नहीं रहेंगे। दूसरे शब्दों में, यदि इन्हें आगे नहीं बढ़ाया जाता है, तो ये प्रावधान 25 जनवरी, 2010 को प्रभावी होना बंद हो जाएंगे।
2. यद्यपि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ने पिछले साठ वर्षों में काफी प्रगति की है, फिर भी संविधान सभा द्वारा उपर्युक्त आरक्षण और सदस्यों के नामांकन संबंधी प्रावधान करते समय जिन कारणों का ध्यान रखा गया था, वे अब भी प्रासंगिक हैं। अतः, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण और एंग्लो-इंडियन समुदाय के नामांकन द्वारा प्रतिनिधित्व को अगले दस वर्षों के लिए जारी रखने का प्रस्ताव है।
3. विधेयक उपरोक्त उद्देश्य की प्राप्ति का प्रयास करता है।
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (पचानवेवाँ संशोधन) अधिनियम, 2009 कहा जा सकता है।
(2) यह 25 जनवरी, 2010 को लागू होगा।
अनुच्छेद 334 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 334 में, "साठ वर्ष" शब्दों के स्थान पर "सत्तर वर्ष" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
