संविधान (93वाँ संशोधन) अधिनियम, 2005
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 15
उद्देश्यों और कारणों का कथन
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम।
भारत गणराज्य के छप्पनवें वर्ष में संसद द्वारा यह अधिनियमित किया जाता है कि:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (तिरानवेवाँ संशोधन) अधिनियम, 2005 कहा जा सकता है।
(2) यह उस तिथि से लागू होगा जो केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
अनुच्छेद 15 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 15 में खंड (4) के बाद निम्नलिखित खंड जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
(5) इस अनुच्छेद या अनुच्छेद 19 के खंड (1) के उपखंड (जी) में कोई बात राज्य को किसी सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग के नागरिकों या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के उत्थान के लिए विधि द्वारा कोई विशेष प्रावधान करने से नहीं रोकेगी, जहाँ तक ऐसे विशेष प्रावधान राज्य द्वारा सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त निजी शैक्षणिक संस्थानों सहित शैक्षणिक संस्थानों में उनके प्रवेश से संबंधित हों, अनुच्छेद 30 के खंड (1) में निर्दिष्ट अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को छोड़कर।
