संविधान (77वाँ संशोधन) अधिनियम, 1995
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 16
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को 1955 से ही पदोन्नति में आरक्षण की सुविधा प्राप्त है। सर्वोच्च न्यायालय ने 16 नवंबर, 1992 को इंदिरा साहनी और अन्य बनाम मामले में अपने फैसले में यह बात कही थी।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (छियासीवाँ संशोधन) विधेयक, 1995 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (सत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1995 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को 1955 से ही पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिलता आ रहा है। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने 16 नवंबर, 1992 को इंदिरा साहनी और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य के मामले में अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत नियुक्तियों या पदों का आरक्षण केवल प्रारंभिक नियुक्ति तक ही सीमित है और पदोन्नति के मामले में आरक्षण लागू नहीं हो सकता। सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। चूंकि राज्यों में सेवाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचा है, इसलिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए पदोन्नति में आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था को जारी रखना आवश्यक है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हितों की रक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को देखते हुए, सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए पदोन्नति में आरक्षण की मौजूदा नीति को जारी रखने का निर्णय लिया है। इसे लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 16 में संशोधन करना आवश्यक है, उक्त अनुच्छेद में एक नया खंड (4ए) जोड़कर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान करना आवश्यक है।
2. यह विधेयक उपरोक्त उद्देश्य की प्राप्ति का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के छियालीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (सत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1995 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 16 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 16 में खंड (4) के बाद निम्नलिखित खंड जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
(4क) इस अनुच्छेद में कोई बात राज्य को राज्य के अधीन सेवाओं में किसी वर्ग या वर्गों के पदों पर पदोन्नति के मामलों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पक्ष में आरक्षण का प्रावधान करने से नहीं रोकेगी, जो राज्य की राय में राज्य के अधीन सेवाओं में पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
