संविधान (65वाँ संशोधन) अधिनियम, 1990
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 338
संविधान के अनुच्छेद 338 में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति का प्रावधान है, जो संविधान के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच करेगा और अपने कामकाज पर राष्ट्रपति को रिपोर्ट देगा।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (अड़सठवाँ संशोधन) विधेयक, 1990 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (पैंसठवाँ संशोधन) अधिनियम, 1990 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान के अनुच्छेद 338 में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति का प्रावधान है, जो संविधान के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच करेगा और राष्ट्रपति को अपने कामकाज की रिपोर्ट देगा। यह महसूस किया जाता है कि अनुच्छेद 338 के तहत गठित पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय आयोग, वर्तमान में एक विशेष अधिकारी की तुलना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक सुरक्षा उपायों के संबंध में अधिक प्रभावी व्यवस्था होगी। यह भी महसूस किया जाता है कि उक्त आयोग के कार्यों को विस्तृत रूप से परिभाषित करना आवश्यक है ताकि इसमें उन उपायों को शामिल किया जा सके जो केंद्र या किसी राज्य द्वारा उन सुरक्षा उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के संरक्षण, कल्याण और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए अन्य उपायों के लिए उठाए जाने चाहिए, और आयोग को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के संरक्षण, कल्याण, विकास और उन्नति से संबंधित ऐसे अन्य कार्य सौंपे जाएं जिन्हें राष्ट्रपति, संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के अधीन रहते हुए, नियम द्वारा निर्दिष्ट कर सकते हैं। यह भी महसूस किया गया है कि उक्त आयोग की रिपोर्ट संसद और राज्यों के विधानमंडलों के समक्ष रखी जाएगी।
2. यह विधेयक उपर्युक्त उद्देश्यों की प्राप्ति का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के इकतालीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (पैंसठवाँ संशोधन) अधिनियम, 1990 कहा जा सकता है।
(2) यह ऐसी तिथि_677 से लागू होगा, जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
अनुच्छेद 338 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 338 में,-
(क) हाशिये के शीर्षक के स्थान पर निम्नलिखित हाशिये का शीर्षक प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग।
(ख) खंड (1) और (2) के स्थान पर निम्नलिखित खंड प्रतिस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:-
(1) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए एक आयोग होगा, जिसे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के नाम से जाना जाएगा।
(2) संसद द्वारा इस संबंध में बनाए गए किसी भी कानून के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और पाँच अन्य सदस्य होंगे तथा इस प्रकार नियुक्त अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा शर्तें और कार्यकाल ऐसे होंगे जैसे राष्ट्रपति नियम द्वारा निर्धारित कर सकते हैं।
(3) आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुहर के तहत वारंट द्वारा की जाएगी।
(4) आयोग को अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने का अधिकार होगा।
(5) आयोग का यह कर्तव्य होगा-
(क) इस संविधान के तहत या किसी अन्य कानून के तहत या सरकार के किसी आदेश के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच और निगरानी करना तथा ऐसे सुरक्षा उपायों के कामकाज का मूल्यांकन करना;
(ख) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकारों और सुरक्षा उपायों के हनन से संबंधित विशिष्ट शिकायतों की जांच करना;
(ग) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेना और सलाह देना तथा संघ और किसी भी राज्य के अधीन उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना;
(घ) राष्ट्रपति को वार्षिक रूप से तथा आयोग द्वारा उचित समझे जाने वाले अन्य समयों पर उन सुरक्षा उपायों के कामकाज पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना;
(ई) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के संरक्षण, कल्याण और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए उन सुरक्षा उपायों और अन्य उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु संघ या किसी राज्य द्वारा उठाए जाने वाले उपायों के संबंध में ऐसी रिपोर्टों में सिफारिशें करना; और
(f) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के संरक्षण, कल्याण, विकास और उन्नति के संबंध में ऐसे अन्य कार्यों का निर्वहन करना, जिन्हें राष्ट्रपति संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, नियम द्वारा निर्दिष्ट कर सकते हैं।
(6) राष्ट्रपति ऐसी सभी रिपोर्टों को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष एक ज्ञापन के साथ प्रस्तुत करवाएंगे, जिसमें संघ से संबंधित सिफारिशों पर की गई या प्रस्तावित कार्रवाई और ऐसी किसी सिफारिश को स्वीकार न करने के कारणों (यदि कोई हो) का स्पष्टीकरण दिया जाएगा।
(7) यदि ऐसी कोई रिपोर्ट, या उसका कोई भाग, किसी ऐसे मामले से संबंधित हो जिससे कोई राज्य सरकार संबंधित हो, तो ऐसी रिपोर्ट की एक प्रति राज्य के राज्यपाल को भेजी जाएगी, जो उसे राज्य के विधानमंडल के समक्ष एक ज्ञापन के साथ प्रस्तुत करवाएगा, जिसमें राज्य से संबंधित सिफारिशों पर की गई या प्रस्तावित कार्रवाई और ऐसी किसी सिफारिश को अस्वीकार किए जाने के कारणों (यदि कोई हो) का स्पष्टीकरण दिया जाएगा।
(8) आयोग, खंड (5) के उपखंड (क) में निर्दिष्ट किसी मामले की जांच करते समय या खंड (ख) के उपखंड (ख) में निर्दिष्ट किसी शिकायत की पूछताछ करते समय, किसी मुकदमे की सुनवाई करने वाले दीवानी न्यायालय की सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा, और विशेष रूप से निम्नलिखित मामलों के संबंध में, अर्थात्:-
(क) भारत के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) किसी दस्तावेज की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई सार्वजनिक अभिलेख या उसकी प्रति मंगवाना;
(ई) गवाहों और दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना;
(f) कोई अन्य मामला जिसे राष्ट्रपति नियम द्वारा निर्धारित कर सकता है।
(9) केंद्र सरकार और प्रत्येक राज्य सरकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को प्रभावित करने वाले सभी प्रमुख नीतिगत मामलों पर आयोग से परामर्श करेगी।
(ग) यथावत खंड (3) को खंड (10) के रूप में पुनः क्रमांकित किया जाएगा।
