संविधान (63वाँ संशोधन) अधिनियम, 1989
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 356
लेख हटा दिए गए
- 359ए
संविधान (उनसठवां संशोधन) अधिनियम, 1988 मार्च 1988 में पारित किया गया था, जिसमें पंजाब में आपातकाल की घोषणा करने और उस राज्य में राष्ट्रपति शासन की अवधि के संबंध में कुछ बदलाव किए गए थे।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (तिरेसठवां संशोधन) विधेयक, 1989 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (तिरेसठवां संशोधन) अधिनियम, 1990 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान (उनसठवां संशोधन) अधिनियम, 1988 मार्च 1988 में पारित किया गया था, जिसमें पंजाब में आपातकाल की घोषणा करने और उस राज्य में राष्ट्रपति शासन की अवधि के संबंध में कुछ बदलाव किए गए थे।
2. पुनर्विचार करने पर सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि पंजाब में आपातकाल की घोषणा के संबंध में संशोधन में परिकल्पित विशेष शक्तियों की अब कोई आवश्यकता नहीं है। यह भी माना जाता है कि उक्त अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 356 में किया गया संशोधन अब आवश्यक नहीं है। अतः यह उचित समझा जाता है कि उपरोक्त अधिनियम द्वारा किए गए संशोधनों को निरस्त कर दिया जाए।
3. संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (1) के तहत 11-5-1987 को जारी राष्ट्रपति की घोषणा के संबंध में, इसे संसद के दोनों सदनों द्वारा अक्टूबर, 1989 में अनुमोदित किया गया है।
4. इस विधेयक का उद्देश्य उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति करना है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के चालीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (तिरेसठवां संशोधन) अधिनियम, 1989 कहा जा सकता है।
(2) यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
अनुच्छेद 356 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 356 में खंड (5) में परंतुक को हटा दिया जाएगा।
अनुच्छेद 359A का लोप
संविधान के अनुच्छेद 359ए को हटा दिया जाएगा।
