संविधान (51वाँ संशोधन) अधिनियम, 1984
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 330
- 332
मेघालय विधान सभा ने 31 मार्च, 1980 को एक प्रस्ताव पारित कर भारत सरकार से आग्रह किया कि वह राज्य विधान सभा और लोकसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण देश के अन्य राज्यों में प्रचलित पद्धति के अनुसार करे।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (तिरेपनवां संशोधन) विधेयक, 1984 (विधेयक संख्या 81, 1984) के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (इक्यावनवां संशोधन) अधिनियम, 1984 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
मेघालय विधानसभा ने 31 मार्च, 1980 को एक प्रस्ताव पारित कर भारत सरकार से आग्रह किया कि वह राज्य विधानसभा और लोकसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए देश के अन्य राज्यों की तरह आरक्षण का प्रावधान करे। राज्य सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 में संशोधन की सिफारिश की। नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की सरकारों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में इस संशोधन का समर्थन किया है। अतः, मेघालय, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की लोकसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान करने हेतु संविधान के अनुच्छेद 330 में संशोधन और नागालैंड और मेघालय की विधानसभाओं में इसी प्रकार के आरक्षण का प्रावधान करने हेतु अनुच्छेद 332 में संशोधन का प्रस्ताव है। ये संशोधन स्थानीय आदिवासी आबादी की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रस्तावित किए गए हैं।
2. यह विधेयक उपरोक्त उद्देश्य की प्राप्ति के लिए है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के पैंतीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (इक्यावनवाँ संशोधन) अधिनियम, 1984 कहा जा सकता है।
(2) यह ऐसी तिथि_670 से लागू होगा, जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
अनुच्छेद 330 का संशोधन
(1) संविधान के अनुच्छेद 330 में खंड (1) में उपखंड (ख) के स्थान पर निम्नलिखित उपखंड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
(ख) असम के स्वायत्त जिलों में अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर अनुसूचित जनजातियाँ; और)।
(2) संविधान के अनुच्छेद 330 में उपधारा (1) द्वारा किया गया संशोधन, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के समय विद्यमान लोकसभा के विघटन तक लोकसभा में किसी भी प्रतिनिधित्व को प्रभावित नहीं करेगा।
अनुच्छेद 332 का संशोधन
(1) संविधान के अनुच्छेद 332 में खंड (1) में, "असम, नागालैंड और मेघालय के जनजातीय क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर" शब्दों के स्थान पर "असम के स्वायत्त जिलों में अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
(2) उपधारा (1) द्वारा संविधान के अनुच्छेद 332 में किया गया संशोधन, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के समय विद्यमान नागालैंड राज्य की विधान सभा या मेघालय राज्य की विधान सभा के विघटन तक नागालैंड राज्य की विधान सभा या मेघालय राज्य की विधान सभा में किसी भी प्रतिनिधित्व को प्रभावित नहीं करेगा।
