संविधान (101वाँ संशोधन) अधिनियम, 2016
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 248
- 249
- 250
- 268
- 269
- 270
- 271
- 286
- 366
- 368
लेख सम्मिलित किए गए
- 246-ए
- 269-ए
- 279-ए
लेख हटा दिए गए
- 268-ए
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- छठी अनुसूची
- सातवीं अनुसूची
संविधान में संशोधन का प्रस्ताव है ताकि वस्तु एवं सेवा कर लागू किया जा सके और केंद्र शासित प्रदेशों सहित सभी राज्यों को समवर्ती कराधान शक्तियां प्रदान की जा सकें, जहां विधानमंडल को वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति के प्रत्येक लेनदेन पर वस्तु एवं सेवा कर लगाने के लिए कानून बनाने का अधिकार होगा।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम
भारत गणराज्य के 67वें वर्ष में संसद द्वारा यह अधिनियमित किया जाता है कि:-
1. राष्ट्रपति की सहमति 8 सितंबर, 2016 को प्राप्त हुई और भारत के राजपत्र, अतिरिक्त, भाग II, खंड 1, दिनांक 8 सितंबर, 2016, पृष्ठ 1-6, संख्या 55 में प्रकाशित हुई। उद्देश्यों और कारणों का विवरण - संविधान में संशोधन प्रस्तावित है ताकि वस्तु एवं सेवा कर लागू किया जा सके और केंद्र शासित प्रदेशों सहित राज्यों को समवर्ती कराधान शक्तियां प्रदान की जा सकें, जहां विधानमंडल वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति के प्रत्येक लेनदेन पर वस्तु एवं सेवा कर लगाने के लिए कानून बना सके। वस्तु एवं सेवा कर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जा रहे कई अप्रत्यक्ष करों का स्थान लेगा और इसका उद्देश्य करों के क्रमिक प्रभाव को समाप्त करना और वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए एक साझा राष्ट्रीय बाजार प्रदान करना है। प्रस्तावित केंद्रीय और राज्य वस्तु एवं सेवा कर वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित सभी लेनदेनों पर लगाया जाएगा, सिवाय उन लेनदेनों के जिन्हें वस्तु एवं सेवा कर के दायरे से बाहर रखा गया है।
2. प्रस्तावित विधेयक, जो संविधान में और संशोधन करना चाहता है, अन्य बातों के अलावा निम्नलिखित प्रावधान करता है:
(क) विभिन्न केंद्रीय अप्रत्यक्ष करों और करों जैसे केंद्रीय उत्पाद शुल्क, अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, औषधीय और शौचालय संबंधी तैयारी (उत्पाद शुल्क) अधिनियम, 1955 के तहत लगाया गया उत्पाद शुल्क, सेवा कर, अतिरिक्त सीमा शुल्क जिसे आमतौर पर प्रतिपूरक शुल्क के रूप में जाना जाता है, विशेष अतिरिक्त सीमा शुल्क और केंद्रीय अधिभार और उपकरों को, जहां तक वे वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित हैं, समाहित करना;
(ख) राज्य मूल्य वर्धित कर/बिक्री कर, मनोरंजन कर (स्थानीय निकायों द्वारा लगाए गए करों के अलावा), केंद्रीय बिक्री कर (केंद्र द्वारा लगाया गया और राज्यों द्वारा एकत्र किया गया), चुंगी और प्रवेश कर, क्रय कर, विलासिता कर, लॉटरी, सट्टेबाजी और जुए पर कर; और राज्य उपकर और अधिभार, जहां तक वे वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित हैं, को समाहित करना;
(ग) संविधान के अंतर्गत 'विशेष महत्व की घोषित वस्तुओं' की अवधारणा को समाप्त करना;
(घ) अंतर-राज्यीय वस्तुओं और सेवाओं के लेन-देन पर एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर लगाना;
(ई) अंतर-राज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान माल की आपूर्ति पर एक अतिरिक्त कर लगाना, जो एक प्रतिशत से अधिक न हो, जिसे भारत सरकार द्वारा दो वर्ष की अवधि के लिए एकत्र किया जाएगा और उन राज्यों को आवंटित किया जाएगा जहां से आपूर्ति उत्पन्न होती है;
(f) वस्तुओं और सेवाओं पर कर से संबंधित कानून बनाने के लिए संसद और राज्य विधानमंडलों को समवर्ती शक्ति प्रदान करना;
(g) मानव उपभोग के लिए मादक पेय पदार्थों को छोड़कर, सभी वस्तुओं और सेवाओं पर वस्तु एवं सेवा कर लगाया जाएगा। पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों के मामले में, यह प्रावधान किया गया है कि वस्तु एवं सेवा कर परिषद की सिफारिश पर अधिसूचित तिथि तक इन वस्तुओं पर वस्तु एवं सेवा कर नहीं लगाया जाएगा;
(h) वस्तुओं और सेवाओं पर कर के लागू होने के कारण राजस्व की हानि के लिए राज्यों को मुआवजा, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है;
(i) वस्तु एवं सेवा कर से संबंधित मुद्दों की जांच करने और दरों, छूट सूची और सीमा सीमाओं जैसे मापदंडों पर केंद्र और राज्यों को सिफारिशें देने के लिए वस्तु एवं सेवा कर परिषद का गठन। परिषद केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में कार्य करेगी और इसमें राजस्व या वित्त प्रभारी केंद्रीय राज्य मंत्री, वित्त या कराधान प्रभारी मंत्री या प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा मनोनीत कोई अन्य मंत्री सदस्य होंगे। यह भी प्रावधान है कि परिषद का प्रत्येक निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के भारित मतों के कम से कम तीन-चौथाई बहुमत से निम्नलिखित सिद्धांतों के अनुसार लिया जाएगा:-
(ए) केंद्र सरकार के मत का भार कुल डाले गए मतों का एक तिहाई होगा, और
(ख) सभी राज्य सरकारों के संयुक्त मतों का भार उस बैठक में डाले गए कुल मतों का दो-तिहाई होगा।
चित्रण
प्रस्तावित अनुच्छेद 279-ए के खंड (9) के अनुसार, वस्तु एवं सेवा कर परिषद में किसी प्रस्ताव के पक्ष में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के भारित मतों का निर्धारण निम्नानुसार किया जाएगा:-
WT = WC+WS
कहाँ,
WT=WC+WS=(WST/SP)*SF
जिसमें-
WT = किसी प्रस्ताव के पक्ष में सभी सदस्यों के कुल भारित मत।
WC = संघ का भारित मत = ⅓ यानी 33.33% यदि संघ प्रस्ताव के पक्ष में है और यदि संघ प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है तो इसे "0" माना जाएगा।
WS = किसी प्रस्ताव के पक्ष में राज्यों के भारित मत।
SP = उपस्थित और मतदान करने वाले राज्यों की संख्या।
WST = उपस्थित और मतदान करने वाले सभी राज्यों के भारित मतों का योग, अर्थात् ⅔, यानी 66.67%
SF = किसी प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने वाले राज्यों की संख्या।
(जे) प्रस्तावित विधेयक का खंड 20, किसी भी राज्य में इस अधिनियम द्वारा संशोधित संविधान के प्रावधानों के प्रारंभ होने पर लागू वस्तुओं या सेवाओं या दोनों पर कर से संबंधित किसी भी कानून के संबंध में उत्पन्न होने वाली किसी भी असंगति का एक वर्ष की अवधि के भीतर ध्यान रखने के लिए संक्रमणकालीन प्रावधान करता है।
3. विधेयक उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति का प्रयास करता है।
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (एक सौ एकवाँ संशोधन) अधिनियम, 2016 कहा जा सकता है।
(2) यह अधिनियम ऐसे किसी तिथि से लागू होगा जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे, और इस अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के लिए अलग-अलग तिथियां नियुक्त की जा सकती हैं, और किसी भी ऐसे प्रावधान में इस अधिनियम के प्रारंभ होने के संदर्भ को उस प्रावधान के प्रारंभ होने के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा।
नए अनुच्छेद 246-A का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 246 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
246-ए. वस्तु एवं सेवा कर के संबंध में विशेष प्रावधान।
(1) अनुच्छेद 246 और 254 में किसी बात के होते हुए भी, संसद और खंड (2) के अधीन रहते हुए, प्रत्येक राज्य के विधानमंडल को संघ या ऐसे राज्य द्वारा लगाए गए माल एवं सेवा कर के संबंध में कानून बनाने का अधिकार है।
(2) संसद को माल और सेवा कर के संबंध में कानून बनाने का अनन्य अधिकार है, जहाँ माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति अंतर-राज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान होती है।
स्पष्टीकरण - इस अनुच्छेद के प्रावधान, अनुच्छेद 279-ए के खंड (5) में निर्दिष्ट वस्तु एवं सेवा कर के संबंध में, वस्तु एवं सेवा कर परिषद द्वारा अनुशंसित तिथि से प्रभावी होंगे।
अनुच्छेद 248 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 248 में खंड (1) में, "संसद" शब्द के स्थान पर, "अनुच्छेद 246-ए के अधीन संसद" शब्द, अंक और अक्षर प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
अनुच्छेद 249 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 249 में, खंड (1) में, "के संबंध में" शब्दों के बाद, शब्द, अंक और अक्षर "अनुच्छेद 246-ए के तहत प्रदान किया गया माल और सेवा कर या" सम्मिलित किया जाएगा।
अनुच्छेद 250 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 250 में, खंड (1) में, "के संबंध में" शब्दों के बाद, शब्द, अंक और अक्षर "अनुच्छेद 246-ए के तहत प्रदान किया गया माल और सेवा कर या" सम्मिलित किया जाएगा।
अनुच्छेद 268 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 268 में खंड (1) में "और औषधीय एवं टॉयलेट तैयारियों पर ऐसे उत्पाद शुल्क" शब्द हटा दिए जाएंगे।
अनुच्छेद 268-A का लोप
संविधान के अनुच्छेद 268-ए, जिसे संविधान (अस्सी-आठवां संशोधन) अधिनियम, 2003 की धारा 2 द्वारा जोड़ा गया था, को हटा दिया जाएगा।
अनुच्छेद 269 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 269 में, खंड (1) में, "माल की खेप" शब्दों के बाद, शब्द, अंक और अक्षर "अनुच्छेद 269-ए में दिए गए प्रावधानों को छोड़कर" जोड़े जाएंगे।
नए अनुच्छेद 269-A का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 269 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
269-ए. अंतरराज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान माल एवं सेवा कर का लेवी एवं संग्रह।
(1) अंतर-राज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान आपूर्ति पर वस्तु एवं सेवा कर भारत सरकार द्वारा लगाया और एकत्र किया जाएगा तथा ऐसा कर संघ और राज्यों के बीच उस तरीके से विभाजित किया जाएगा जैसा कि संसद वस्तु एवं सेवा कर परिषद की सिफारिशों पर कानून द्वारा निर्धारित करे।
स्पष्टीकरण .- इस खंड के प्रयोजनों के लिए, भारत के क्षेत्र में आयात के दौरान माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति को अंतर-राज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति माना जाएगा।
(2) खंड (1) के अधीन किसी राज्य को आवंटित राशि भारत की संचित निधि का भाग नहीं होगी।
(3) जहां खंड (1) के अधीन लगाए गए कर के रूप में एकत्रित राशि का उपयोग अनुच्छेद 246-ए के अधीन किसी राज्य द्वारा लगाए गए कर के भुगतान के लिए किया गया है, तो ऐसी राशि भारत की संचित निधि का हिस्सा नहीं होगी।
(4) जहाँ किसी राज्य द्वारा अनुच्छेद 246-ए के अधीन लगाए गए कर के रूप में एकत्रित राशि का उपयोग खंड (1) के अधीन लगाए गए कर के भुगतान के लिए किया गया है, तो ऐसी राशि राज्य की समेकित निधि का हिस्सा नहीं होगी।
(5) संसद विधि द्वारा आपूर्ति के स्थान का निर्धारण करने के लिए सिद्धांत निर्धारित कर सकती है, और यह भी कि जब वस्तुओं, सेवाओं या दोनों की आपूर्ति अंतर-राज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान होती है।
अनुच्छेद 270 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 270 में,-
(i) खंड (1) में, शब्द, अंक और अक्षर "अनुच्छेद 268, 268-ए और 269" के स्थान पर शब्द, अंक और अक्षर "अनुच्छेद 268, 269 और 269-ए" प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ii) खंड (1) के स्थान पर निम्नलिखित खंड जोड़े जाएंगे, अर्थात्:-
"(1-ए) अनुच्छेद 246-ए के खंड (1) के तहत संघ द्वारा एकत्र किया गया कर भी खंड (2) में दिए गए तरीके से संघ और राज्यों के बीच वितरित किया जाएगा।
(1-ख) अनुच्छेद 246-अ और अनुच्छेद 269-अ के खंड (2) के अधीन संघ द्वारा लगाया और एकत्र किया गया कर, जिसका उपयोग अनुच्छेद 246-अ के खंड (1) के अधीन संघ द्वारा लगाए गए कर के भुगतान के लिए किया गया है, और अनुच्छेद 269-अ के खंड (1) के अधीन संघ को आवंटित राशि, संघ और राज्यों के बीच खंड (2) में दिए गए तरीके से वितरित की जाएगी।
अनुच्छेद 271 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 271 में, "उन अनुच्छेदों में" शब्दों के बाद, "अनुच्छेद 246-ए के अधीन माल एवं सेवा कर को छोड़कर" शब्द, अंक और अक्षर जोड़े जाएंगे।
नए अनुच्छेद 279-A का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 279 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
279-ए. वस्तु एवं सेवा कर परिषद.-
(1) राष्ट्रपति संविधान (एक सौ एकवाँ संशोधन) अधिनियम, 2016 के प्रारंभ होने की तिथि से साठ दिनों के भीतर आदेश द्वारा एक परिषद का गठन करेगा जिसे वस्तु एवं सेवा कर परिषद कहा जाएगा।
(2) वस्तु एवं सेवा कर परिषद में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्:-
(क) केंद्रीय वित्त मंत्री … अध्यक्ष;
(ख) राजस्व या वित्त के प्रभारी केंद्रीय राज्य मंत्री… सदस्य;
(ग) वित्त या कराधान के प्रभारी मंत्री या प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा नामित कोई अन्य मंत्री … सदस्य।
(3) खंड (2) के उपखंड (सी) में निर्दिष्ट वस्तु एवं सेवा कर परिषद के सदस्य यथाशीघ्र अपने बीच से किसी एक को परिषद का उपाध्यक्ष ऐसे समय के लिए चुनेंगे जैसा वे तय करें।
(4) वस्तु एवं सेवा कर परिषद केंद्र और राज्यों को निम्नलिखित विषयों पर सिफारिशें करेगी-
(क) संघ, राज्यों और स्थानीय निकायों द्वारा लगाए गए कर, उपकर और अधिभार जिन्हें वस्तु एवं सेवा कर में समाहित किया जा सकता है;
(ख) वे वस्तुएँ और सेवाएँ जिन पर वस्तु एवं सेवा कर लगाया जा सकता है या जिन्हें वस्तु एवं सेवा कर से छूट दी जा सकती है;
(ग) वस्तु एवं सेवा कर कानून के आदर्श, कर लगाने के सिद्धांत, अनुच्छेद 269-ए के अंतर्गत अंतर-राज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान आपूर्ति पर लगाए गए वस्तु एवं सेवा कर का विभाजन और आपूर्ति के स्थान को नियंत्रित करने वाले सिद्धांत;
(घ) कारोबार की वह सीमा जिसके नीचे वस्तुओं और सेवाओं को वस्तु एवं सेवा कर से छूट दी जा सकती है;
(ई) माल एवं सेवा कर की दरें, जिनमें न्यूनतम दरें और श्रेणीबद्ध दरें शामिल हैं;
(f) किसी प्राकृतिक आपदा या संकट के दौरान अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए किसी निर्दिष्ट अवधि के लिए कोई विशेष दर या दरें;
(जी) अरुणाचल प्रदेश, असम, जम्मू और कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों के संबंध में विशेष प्रावधान; और
(h) वस्तु एवं सेवा कर से संबंधित कोई अन्य मामला, जैसा कि परिषद निर्णय ले सकती है।
(5) वस्तु एवं सेवा कर परिषद पेट्रोलियम कच्चे तेल, उच्च गति डीजल, मोटर स्पिरिट (जिसे आमतौर पर पेट्रोल के नाम से जाना जाता है), प्राकृतिक गैस और विमानन टरबाइन ईंधन पर वस्तु एवं सेवा कर लगाने की तिथि की सिफारिश करेगी।
(6) इस अनुच्छेद द्वारा प्रदत्त कार्यों का निर्वहन करते समय, वस्तु एवं सेवा कर परिषद वस्तु एवं सेवा कर की सामंजस्यपूर्ण संरचना और वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए सामंजस्यपूर्ण राष्ट्रीय बाजार के विकास की आवश्यकता से निर्देशित होगी।
(7) वस्तु एवं सेवा कर परिषद के कुल सदस्यों की आधी संख्या उसकी बैठकों में कोरम का गठन करेगी।
(8) वस्तु एवं सेवा कर परिषद अपने कार्यों के निष्पादन में प्रक्रिया निर्धारित करेगी।
(9) वस्तु एवं सेवा कर परिषद का प्रत्येक निर्णय बैठक में उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के भारित मतों के कम से कम तीन-चौथाई बहुमत से निम्नलिखित सिद्धांतों के अनुसार लिया जाएगा, अर्थात्:-
(क) केंद्र सरकार के मत का भार कुल डाले गए मतों का एक तिहाई होगा, और
(ख) उस बैठक में सभी राज्य सरकारों के संयुक्त मतों का भार कुल डाले गए मतों का दो-तिहाई होगा।
(10) वस्तु एवं सेवा कर परिषद का कोई भी कार्य या कार्यवाही मात्र निम्नलिखित कारणों से अमान्य नहीं होगी: (क) परिषद में कोई रिक्ति, या परिषद के गठन में कोई दोष; या (ख) परिषद के सदस्य के रूप में किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई दोष; या (ग) परिषद की कोई प्रक्रियात्मक अनियमितता जो मामले के गुण-दोष को प्रभावित न करती हो।
(11) वस्तु एवं सेवा कर परिषद किसी भी विवाद के निपटारे के लिए एक तंत्र स्थापित करेगी।
(क) भारत सरकार और एक या एक से अधिक राज्यों के बीच; या
(ख) भारत सरकार और किसी राज्य या राज्यों के बीच एक पक्ष और एक या एक से अधिक अन्य राज्यों के बीच दूसरे पक्ष; या
(ग) दो या दो से अधिक राज्यों के बीच, परिषद की सिफारिशों या उनके कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले विवाद।
अनुच्छेद 286 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 286 में,-
(i) खंड (1) में,-
(ए) "माल की बिक्री या खरीद जहां ऐसी बिक्री या खरीद होती है" शब्दों के स्थान पर "माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति, जहां ऐसी आपूर्ति होती है" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ख) उपखंड (ख) में, जहाँ कहीं भी “वस्तुएँ” शब्द आता है, वहाँ “वस्तुएँ या सेवाएँ या दोनों” शब्द प्रतिस्थापित किए जाएँगे;
(ii) खंड (2) में, "माल की बिक्री या खरीद होती है" शब्दों के स्थान पर "माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(iii) खंड (3) को हटा दिया जाएगा।
अनुच्छेद 366 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 366 में,-
(i) खंड (12) के स्थान पर निम्नलिखित खंड जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
(12-ए) "वस्तु एवं सेवा कर" से तात्पर्य वस्तुओं, सेवाओं या दोनों की आपूर्ति पर लगने वाले किसी भी कर से है, सिवाय मानव उपभोग के लिए मादक पेय पदार्थों की आपूर्ति पर लगने वाले करों के;
(ii) खंड (26) के स्थान पर निम्नलिखित खंड जोड़े जाएंगे, अर्थात्:-
(26-ए) "सेवाएं" का अर्थ है माल के अलावा कुछ भी;
(26-बी) अनुच्छेद 246-ए, 268, 269, 269-ए और अनुच्छेद 279-ए के संदर्भ में "राज्य" में विधानमंडल सहित एक केंद्र शासित प्रदेश शामिल है;
अनुच्छेद 368 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 368 में, खंड (2) में, परंतुक में, खंड (क) में, शब्द और अंक "अनुच्छेद 162 या अनुच्छेद 241" के स्थान पर, शब्द, अंक और अक्षर "अनुच्छेद 162, अनुच्छेद 241 या अनुच्छेद 279-ए" प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
छठी अनुसूची का संशोधन
संविधान की छठी अनुसूची में, अनुच्छेद 8 में, उप-अनुच्छेद (3) में,-
(i) खंड (c) में अंत में आने वाला शब्द "और" हटा दिया जाएगा;
(ii) खंड (d) में अंत में "और" शब्द जोड़ा जाएगा;
(iii) खंड (d) के स्थान पर निम्नलिखित खंड जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
"(ई) मनोरंजन और आमोद-प्रमोद पर कर"।
सातवीं अनुसूची का संशोधन
संविधान की सातवीं अनुसूची में,-
(क) सूची I में - संघ सूची,-
(i) प्रविष्टि 84 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्:-
84. भारत में निर्मित या उत्पादित निम्नलिखित वस्तुओं पर उत्पाद शुल्क, अर्थात्:-
(क) पेट्रोलियम कच्चा तेल;
(ख) हाई स्पीड डीजल;
(ग) मोटर स्पिरिट (जिसे आमतौर पर पेट्रोल के नाम से जाना जाता है);
(घ) प्राकृतिक गैस;
(ई) विमानन टरबाइन ईंधन; और (एफ) तंबाकू और तंबाकू उत्पाद।"
(ii) प्रविष्टियाँ 92 और 92-सी हटा दी जाएँगी;
(ख) सूची द्वितीय - राज्य सूची में,-
(i) प्रविष्टि 52 को हटा दिया जाएगा;
(ii) प्रविष्टि 54 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्:-
54. पेट्रोलियम कच्चे तेल, उच्च गति वाले डीजल, मोटर स्पिरिट (जिसे आमतौर पर पेट्रोल के नाम से जाना जाता है), प्राकृतिक गैस, विमानन टरबाइन ईंधन और मानव उपभोग के लिए मादक पेय पदार्थों की बिक्री पर कर, लेकिन अंतर-राज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान या ऐसे सामानों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान बिक्री शामिल नहीं है।
(iii) प्रविष्टि 55 को हटा दिया जाएगा;
(iv) प्रविष्टि 62 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्:-
62. पंचायत, नगरपालिका, क्षेत्रीय परिषद या जिला परिषद द्वारा लगाए और वसूल किए जाने वाले मनोरंजन और मौज-मस्ती पर कर।
माल और सेवा कर लागू किए जाने के कारण राजस्व की हानि के लिए राज्यों को प्रतिकर
संसद, वस्तु एवं सेवा कर परिषद की सिफारिश पर, कानून द्वारा, राज्यों को वस्तु एवं सेवा कर के कार्यान्वयन के कारण होने वाले राजस्व के नुकसान के लिए पांच वर्ष की अवधि तक मुआवजे का प्रावधान करेगी।
संक्रमणकालीन उपबंध
इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, किसी भी राज्य में इस अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पहले लागू वस्तुओं या सेवाओं या दोनों पर कर से संबंधित किसी भी कानून का कोई भी प्रावधान, जो इस अधिनियम द्वारा संशोधित संविधान के प्रावधानों के साथ असंगत है, तब तक लागू रहेगा जब तक कि किसी सक्षम विधानमंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा इसे संशोधित या निरस्त नहीं कर दिया जाता है, या ऐसे प्रारंभ होने की तिथि से एक वर्ष की समाप्ति तक, जो भी पहले हो।
राष्ट्रपति की कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति
(1) यदि इस अधिनियम द्वारा संशोधित संविधान के प्रावधानों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है (जिसमें राष्ट्रपति द्वारा इस अधिनियम को स्वीकृति देने की तिथि से ठीक पहले के संविधान के प्रावधानों से इस अधिनियम द्वारा संशोधित संविधान के प्रावधानों में संक्रमण से संबंधित कोई कठिनाई भी शामिल है), तो राष्ट्रपति आदेश द्वारा ऐसे प्रावधान कर सकते हैं, जिनमें इस अधिनियम या कानून द्वारा संशोधित संविधान के किसी प्रावधान का कोई अनुकूलन या संशोधन भी शामिल है, जो राष्ट्रपति को कठिनाई दूर करने के उद्देश्य से आवश्यक या उपयुक्त प्रतीत हों:
बशर्ते कि ऐसी सहमति की तारीख से तीन वर्ष की समाप्ति के बाद ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया जाएगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन पारित प्रत्येक आदेश, पारित होने के बाद यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा।
