आईपीसी → बीएनएस
38 प्रविष्टियाँ
धारा 32 - कार्यों का निर्देश करने वाले शब्दों के अन्तर्गत अवैध लोप आता है
कार्यों का निर्देश करने वाले शब्दों के अन्तर्गत अवैध लोप आता है जब तक कि संदर्भ से तत्प्रतिकूल आशय प्रतीत न हो, इस संहिता के हर भाग में किए गए कार्यों का निर्देश करने वाले शब्दों का विस्तार अवैध लोपों पर भी है ।
पूरा पढ़ेंसामान्य स्पष्टीकरण।
(1) इस संहिता में अपराध की प्रत्येक परिभाषा, प्रत्येक दंड प्रावधान और ऐसी प्रत्येक परिभाषा या दंड प्रावधान के प्रत्येक उदाहरण को सामान्य अपवाद नामक अध्याय में निहित अपवादों के अधीन समझा जाएगा, भले ही वे अपवाद ऐसी परिभाषा, दंड प्रावधान या उदाहरण में दोहराए न गए हों। चित्र। (क) इस संहिता में अपराधों की परिभाषाएँ देने…
पूरा पढ़ेंधारा 94 - वह कार्य जिसको करने के लिए कोई व्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है
वह कार्य जिसको करने के लिए कोई व्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है हत्या और मृत्यु से दंडनीय उन अपराधों को जो राज्य के विरुद्ध है, छोड़कर कोई बात अपराध नहीं है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाए जो उसे करने के लिए ऐसी धमकियों से विवश किया गया हो जिनसे उस बात को करते समय उसको युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो गई हो…
पूरा पढ़ेंवह कृत्य जिसके लिए किसी व्यक्ति को धमकियों के बल पर विवश किया जाता है।
हत्या और राज्य के विरुद्ध मृत्युदंड से दंडनीय अपराधों को छोड़कर, कोई भी कार्य अपराध नहीं है यदि वह किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जिसे धमकियों के कारण ऐसा करने के लिए मजबूर किया जाता है, और धमकी देने के समय, यह आशंका होती है कि अन्यथा उस व्यक्ति की तत्काल मृत्यु हो जाएगी। बशर्ते कि कृत्य करने वाले व्यक्ति ने…
पूरा पढ़ेंधारा 320 - घोर उपहति
घोर उपहति उपहति की केवल नीचे लिखी किस्में “घोर” कहलाती है - पहला - पुंस्त्वहरण । दूसरा - दोनों में से किसी भी नेत्र की दृष्टि का स्थायी विच्छेद । तीसरा - दोनों में से किसी भी कान की श्रवणशक्ति का स्थायी विच्छेद । चौथा - किसी भी अंग या जोड़ का विच्छेद । पांचवां - किसी भी अंग या जोड़ का की शक्तियों का नाश या स्थायी…
पूरा पढ़ेंगंभीर चोट।
केवल निम्नलिखित प्रकार की चोटों को ही “गंभीर चोट” की श्रेणी में रखा गया है, अर्थात्:— (क) नपुंसकीकरण; (ख) किसी भी आंख की दृष्टि का स्थायी रूप से वंचित हो जाना; (ग) किसी भी कान की श्रवण शक्ति का स्थायी रूप से समाप्त हो जाना; (घ) किसी सदस्य या संयुक्त सदस्य को वंचित करना; (ई) किसी सदस्य या संयुक्त अंग की शक्तियों का…
पूरा पढ़ेंधारा 321 - स्वेच्छया उपहति कारित करना
स्वेच्छया उपहति कारित करना जो कोई किसी कार्य को इस आशय से करता है कि तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे या इस ज्ञान के साथ करता है कि यह संभाव्य है कि वह तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे और तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करता है, वह “स्वेच्छया उपहति करता है”, यह कहा जाता है ।
पूरा पढ़ेंजानबूझकर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने के इरादे से, या इस ज्ञान के साथ कि वह किसी व्यक्ति को चोट पहुँचा सकता है, कोई कार्य करता है और इस प्रकार किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाता है, तो उसे “स्वेच्छा से चोट पहुँचाना” कहा जाता है। (2) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता…
पूरा पढ़ेंधारा 322 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना जो कोई व्यक्ति स्वेच्छया उपहति कारित करता है, यदि वह उपहति, जिसे कारित करने का उसका आशय है या जिसे वह जानता है कि उसके द्वारा उसका किया जाना सम्भाव्य है घोर उपहति है, और यदि वह उपहति, जो वह कारित करता है, घोर उपहति को, तो वह “स्वेच्छया घोर उपहति करता है”, यह कहा जाता है । स्पष्टीकरण -…
पूरा पढ़ेंजानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, यदि वह चोट जो वह पहुँचाने का इरादा रखता है या जानता है कि वह पहुँचाने की संभावना है, गंभीर चोट है, और यदि वह जो चोट पहुँचाता है वह गंभीर चोट है, तो उसे “स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाना” कहा जाता है। स्पष्टीकरण—किसी व्यक्ति को स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाने वाला तब तक नहीं कहा…
पूरा पढ़ेंजानबूझकर चोट पहुंचाने पर मिलने वाली सजा।
धारा 334 में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई भी स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या एक हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंजानबूझकर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने के इरादे से, या इस ज्ञान के साथ कि वह किसी व्यक्ति को चोट पहुँचा सकता है, कोई कार्य करता है और इस प्रकार किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाता है, तो उसे “स्वेच्छा से चोट पहुँचाना” कहा जाता है। (2) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता…
पूरा पढ़ेंधारा 324 - खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना
खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना उस दशा के सिवाय, जिसके लिए धारा 334 में उपबंध है, जो कोई असन, वेधन या काटने के किसी उपकरण द्वारा या किसी ऐसे उपकरण द्वारा जो यदि आक्रामक आयुध के तौर पर उपयोग में लाया जाए, तो उससे मॄत्यु कारित होना सम्भाव्य है, या अग्नि या किसी तप्त पदार्थ द्वारा, या किसी विष…
पूरा पढ़ेंखतरनाक हथियारों या साधनों द्वारा जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई भी स्वेच्छा से किसी तीरंदाजी, छुरा घोंपने या काटने के औजार से, या किसी ऐसे औजार से, जिसका प्रयोग अपराध के हथियार के रूप में मृत्यु का कारण बन सकता है, या आग या किसी गर्म पदार्थ से, या किसी जहर या किसी संक्षारक पदार्थ से, या किसी विस्फोटक पदार्थ से, या…
पूरा पढ़ेंधारा 325 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने के लिए दण्ड
स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने के लिए दण्ड उस दशा के सिवाय, जिसके लिए धारा 335 में उपबंध है, जो कोई स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंजानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, यदि वह चोट जो वह पहुँचाने का इरादा रखता है या जानता है कि वह पहुँचाने की संभावना है, गंभीर चोट है, और यदि वह जो चोट पहुँचाता है वह गंभीर चोट है, तो उसे “स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाना” कहा जाता है। स्पष्टीकरण—किसी व्यक्ति को स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाने वाला तब तक नहीं कहा…
पूरा पढ़ेंधारा 326 - खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना उस दशा के सिवाय, जिसके लिए धारा 335 में उपबंध है, जो कोई असन, वेधन या काटने के किसी उपकरण द्वारा या किसी ऐसे उपकरण द्वारा, जो यदि आक्रामक आयुध के तौर पर उपयोग में लाया जाए, तो उससे मॄत्यु कारित होना सम्भाव्य है, या अग्नि या किसी तप्त पदार्थ द्वारा, या किसी…
पूरा पढ़ेंखतरनाक हथियारों या साधनों द्वारा जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई भी स्वेच्छा से किसी तीरंदाजी, छुरा घोंपने या काटने के औजार से, या किसी ऐसे औजार से, जिसका प्रयोग अपराध के हथियार के रूप में मृत्यु का कारण बन सकता है, या आग या किसी गर्म पदार्थ से, या किसी जहर या किसी संक्षारक पदार्थ से, या किसी विस्फोटक पदार्थ से, या…
पूरा पढ़ेंधारा 326A - एसिड हमले
एसिड हमले अपराध: एसिड हमला। सजा: जीवन और ठीक लिए कारावास तक का हो सकता है, जो कम से कम दस साल लेकिन के लिए कारावास शिकार करने के लिए भुगतान किया जाएगा। प्रकृति: संज्ञेय, गैर जमानती
पूरा पढ़ेंएसिड आदि के प्रयोग से जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई किसी व्यक्ति के शरीर के किसी अंग या अंगों को स्थायी या आंशिक क्षति या विकृति पहुंचाता है, या जलाता है, अपंग करता है, कुरूप करता है या अक्षम बनाता है, या उस व्यक्ति पर तेजाब फेंककर या उसे तेजाब पिलाकर, या किसी अन्य साधन का प्रयोग करके, ऐसी चोट या चोट पहुंचाने के इरादे से या यह जानते हुए कि वह ऐसी चोट या चोट…
पूरा पढ़ेंधारा 326B - एसिड हमला करने का प्रयास
एसिड हमला करने का प्रयास अपराध: एसिड हमला करने का प्रयास। सजा: सात साल तक का हो सकता है, लेकिन जो कम से कम पांच साल के लिए कारावास, और साथ प्रकृति: संज्ञेय, गैर जमानती
पूरा पढ़ेंएसिड आदि के प्रयोग से जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई किसी व्यक्ति के शरीर के किसी अंग या अंगों को स्थायी या आंशिक क्षति या विकृति पहुंचाता है, या जलाता है, अपंग करता है, कुरूप करता है या अक्षम बनाता है, या उस व्यक्ति पर तेजाब फेंककर या उसे तेजाब पिलाकर, या किसी अन्य साधन का प्रयोग करके, ऐसी चोट या चोट पहुंचाने के इरादे से या यह जानते हुए कि वह ऐसी चोट या चोट…
पूरा पढ़ेंधारा 327 - संपत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
संपत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना जो कोई इस प्रयोजन से स्वेच्छया उपहति कारित करेगा कि उपहत व्यक्ति से, या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से, कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति उद्दापित की जाए या उपहत व्यक्ति को या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति को कोई ऐसी बात, जो…
पूरा पढ़ेंसंपत्ति हड़पने या किसी अवैध कृत्य के लिए विवश करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी पीड़ित से, या पीड़ित के हित में किसी व्यक्ति से, कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति जबरन वसूलने के उद्देश्य से, या पीड़ित या पीड़ित के हित में किसी व्यक्ति को कोई ऐसा कार्य करने के लिए विवश करने के उद्देश्य से, जो अवैध हो या जिससे अपराध करने में सुविधा हो, स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार…
पूरा पढ़ेंधारा 328 - अपराध करने के आशय से विष इत्यादि द्वारा उपहति कारित करना
अपराध करने के आशय से विष इत्यादि द्वारा उपहति कारित करना जो कोई इस आशय से कि किसी व्यक्ति को उपहति कारित की जाए या अपराध करने के, या किए जाने को सुकर बनाने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह तद्द्वारा उपहति कारित करेगा, कोई विष या जड़िमाकारी, नशा करने वाली या अस्वास्थ्यकर ओषधि या अन्य चीज उस व्यक्ति को देगा या…
पूरा पढ़ेंकिसी अपराध को अंजाम देने के इरादे से जहर आदि के माध्यम से चोट पहुंचाना।
जो कोई भी किसी व्यक्ति को जहर, बेहोश करने वाली, मादक या हानिकारक दवा, या ऐसी कोई अन्य वस्तु देता है या उसे लेने के लिए प्रेरित करता है, इस इरादे से कि उस व्यक्ति को हानि पहुंचाई जाए, या किसी अपराध को अंजाम देने या उसे सुगम बनाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि इससे हानि होने की संभावना है, तो उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 329 - सम्पत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
सम्पत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना जो कोई इस प्रयोजन से स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा कि उपहत व्यक्ति से या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति उद्दापित की जाए या उपहत व्यक्ति को या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति को कोई ऐसी…
पूरा पढ़ेंसंपत्ति हड़पने या किसी अवैध कृत्य के लिए विवश करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी पीड़ित से, या पीड़ित के हित में किसी व्यक्ति से, कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति जबरन वसूलने के उद्देश्य से, या पीड़ित या पीड़ित के हित में किसी व्यक्ति को कोई ऐसा कार्य करने के लिए विवश करने के उद्देश्य से, जो अवैध हो या जिससे अपराध करने में सुविधा हो, स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार…
पूरा पढ़ेंधारा 421 - लेनदारों में वितरण निवारित करने के लिए संपत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाना
लेनदारों में वितरण निवारित करने के लिए संपत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाना जो कोई किसी संपत्ति का अपने लेनदारों या किसी अन्य व्यक्ति के लेनदारों के बीच विधि के अनुसार वितरित किया जाना तद्द्वारा निवारित करने के आशय से, या तद्द्वारा सम्भाव्यतः निवारित करेगा यह जानते हुए उस संपत्ति को बेईमानी से या…
पूरा पढ़ेंलेनदारों के बीच वितरण को रोकने के लिए बेईमानी या धोखाधड़ी से संपत्ति को हटाना या छिपाना।
जो कोई भी बेईमानी से या धोखाधड़ी से किसी संपत्ति को बिना पर्याप्त प्रतिफल के हटाता है, छुपाता है या किसी व्यक्ति को सौंपता है, या हस्तांतरित करता है या हस्तांतरित करवाता है, इस इरादे से कि वह अपने लेनदारों या किसी अन्य व्यक्ति के लेनदारों के बीच उस संपत्ति के कानून के अनुसार वितरण को रोक सके, या यह जानते हुए कि ऐसा…
पूरा पढ़ेंधारा 422 - त्रऐंण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना
त्रऐंण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना जो कोई किसी त्रऐंण का या मांग का, जो स्वयं उसको या किसी अन्य व्यक्ति को शोध्य हो, अपने या ऐसे अन्य व्यक्ति के त्रऐंणों को चुकाने के लिए विधि के अनुसार उपलभ्य होना कपटपूर्वक या बेईमानी से निवारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास…
पूरा पढ़ेंबेईमानी या धोखाधड़ी से लेनदारों को ऋण उपलब्ध होने से रोकना।
जो कोई बेईमानी या कपट से अपने या किसी अन्य व्यक्ति के ऋण के भुगतान के लिए कानून के अनुसार देय किसी ऋण या मांग को उपलब्ध कराने से रोकता है, उसे दो वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 423 - अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन
अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्वक किसी ऐसे विलेख या लिखत को हस्ताक्षरित करेगा, निष्पादित करेगा, या उसका पक्षकार बनेगा, जिससे किसी सम्पत्ति का, या उसमें के किसी हित का, अंतरित किया जाना, या किसी भार के अधीन किया…
पूरा पढ़ेंबेईमानी या कपटपूर्ण तरीके से किए गए हस्तांतरण विलेख का निष्पादन जिसमें प्रतिफल का झूठा विवरण शामिल हो।
जो कोई भी बेईमानी से या कपटपूर्वक किसी ऐसे विलेख या दस्तावेज पर हस्ताक्षर करता है, उसे निष्पादित करता है या उसका पक्षकार बनता है, जो किसी संपत्ति या उसमें निहित किसी हित को हस्तांतरित करने या उस पर कोई प्रभार लगाने का दावा करता है, और जिसमें ऐसे हस्तांतरण या प्रभार के प्रतिफल से संबंधित या उस व्यक्ति या व्यक्तियों से…
पूरा पढ़ेंधारा 424 - सम्पत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना
सम्पत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्वक अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की किसी सम्पत्ति को छिपाएगा या अपसारित करेगा, या उसके छिपाए जाने में या अपसारित किए जाने में बेईमानी से या कपटपूर्वक सहायता करेगा, या बेईमानी से किसी ऐसी मांग या दावे को, जिसका वह हकदार है, छोड़ देगा, वह…
पूरा पढ़ेंसंपत्ति को बेईमानी या धोखाधड़ी से हटाना या छिपाना।
जो कोई भी बेईमानी या कपट से अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति को छुपाता या हटाता है, या बेईमानी या कपट से उसे छुपाने या हटाने में सहायता करता है, या बेईमानी से किसी ऐसे दावे या मांग को छोड़ देता है जिसका वह हकदार है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया…
पूरा पढ़ेंधारा 425 - रिष्टि
रिष्टि जो काई इस आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि, वह लोक को या किसी व्यक्ति को सदोष हानि या नुकसान कारित करे, किसी सम्पत्ति का नाश या किसी सम्पत्ति में या उसकी स्थिति में ऐसी तब्दीली कारित करता है, जिससे उसका मूल्य या उपयोगिता नष्ट या कम हो जाती है, या उस पर क्षतिकारक प्रभाव पड़ता है, वह “रिष्टि” करता है ।…
पूरा पढ़ेंशरारत।
(1) जो कोई भी जनता या किसी व्यक्ति को अनुचित हानि या क्षति पहुँचाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि वह ऐसा करने की संभावना रखता है, किसी संपत्ति का विनाश करता है, या किसी संपत्ति में या उसकी स्थिति में ऐसा कोई परिवर्तन करता है जिससे उसका मूल्य या उपयोगिता नष्ट हो जाती है या कम हो जाती है, या उसे नुकसान पहुँचता है, वह…
पूरा पढ़ेंधारा 426 - रिष्टि के लिए दण्ड
रिष्टि के लिए दण्ड जो कोई रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंशरारत।
(1) जो कोई भी जनता या किसी व्यक्ति को अनुचित हानि या क्षति पहुँचाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि वह ऐसा करने की संभावना रखता है, किसी संपत्ति का विनाश करता है, या किसी संपत्ति में या उसकी स्थिति में ऐसा कोई परिवर्तन करता है जिससे उसका मूल्य या उपयोगिता नष्ट हो जाती है या कम हो जाती है, या उसे नुकसान पहुँचता है, वह…
पूरा पढ़ेंधारा 427 - रिष्टि जिससे पचास रुपए का नुकसान होता है
रिष्टि जिससे पचास रुपए का नुकसान होता है जो कोई रिष्टि करेगा और तद्द्वारा पचास रुपए या उससे अधिक रिष्टि की हानि या नुकसान कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंशरारत।
(1) जो कोई भी जनता या किसी व्यक्ति को अनुचित हानि या क्षति पहुँचाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि वह ऐसा करने की संभावना रखता है, किसी संपत्ति का विनाश करता है, या किसी संपत्ति में या उसकी स्थिति में ऐसा कोई परिवर्तन करता है जिससे उसका मूल्य या उपयोगिता नष्ट हो जाती है या कम हो जाती है, या उसे नुकसान पहुँचता है, वह…
पूरा पढ़ेंधारा 428 - दस रुपए के मूल्य के जीवजन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि
दस रुपए के मूल्य के जीवजन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि जो कोई दस रुपए या उससे अधिक के मूल्य के किसी जीवजन्तु या जीवजन्तुओं को वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों…
पूरा पढ़ेंकिसी जानवर को मारकर या अपंग करके उसे नुकसान पहुंचाना।
जो कोई भी किसी जानवर को मारकर, जहर देकर, अपंग करके या उसे बेकार करके नुकसान पहुंचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि पांच वर्ष तक हो सकती है, या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 429 - किसी मूल्य के ढोर, आदि को या पचास रुपए के मूल्य के किसी जीवजन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि
किसी मूल्य के ढोर, आदि को या पचास रुपए के मूल्य के किसी जीवजन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि जो कोई किसी हाथी, ऊंट, घोड़े, खच्चर, भैंस, सांड़, गाय या बैल को, चाहे उसका कुछ भी मूल्य हो, या पचास रुपए या उससे अधिक मूल्य के किसी भी अन्य जीवजन्तु को वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा…
पूरा पढ़ेंकिसी जानवर को मारकर या अपंग करके उसे नुकसान पहुंचाना।
जो कोई भी किसी जानवर को मारकर, जहर देकर, अपंग करके या उसे बेकार करके नुकसान पहुंचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि पांच वर्ष तक हो सकती है, या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 430 - सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि
सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे कॄषिक प्रयोजनो के लिए, या मानव प्राणियों के या उन जीवजन्तुओं के, जो सम्पत्ति है, खाने या पीने के, या सफाई के या किसी विनिर्माण को चलाने के जलप्रदाय में कमी कारित होती हो या कमी कारित होना वह…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 431 - लोक सड़क, पुल, नदी या जलसरणी को क्षति पहुंचाकर रिष्टि
लोक सड़क, पुल, नदी या जलसरणी को क्षति पहुंचाकर रिष्टि जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे किसी लोक सड़क, पुल, नाव्य, नदी या प्राकॄतिक या कॄत्रिम नाव्य जलसरणी को यात्रा या सम्पत्ति प्रवहण के लिए अगम्य या कम निरापद बना दिया जाए या बना दिया जाना वह सम्भाव्य जानता हो, वह दोनो में से, किसी भांति के…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 432 - लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि
लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे किसी लोक जलनिकास में क्षतिप्रद या नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित हो जाए, या होना वह सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 433 - किसी दीपगॄह या समुद्री-चिह्न को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि
किसी दीपगॄह या समुद्री-चिह्न को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि जो कोई किसी दीपगॄह को, या समुद्री- चिह्न के रूप में उपयोग में आने वाले अन्य प्रकाश के, या किसी समुद्री-चिह्न या बोया या अन्य चीज के, जो नौ-चालकों के लिए मार्ग प्रदर्शन के लिए रखी गई हो, नष्ट करने या, हटाने द्वारा अथवा कोई ऐसा कार्य करने द्वारा,…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 434 - लोक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि
लोक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि जो कोई लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा लगाए गए किसी भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने द्वारा अथवा कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे ऐसा भूमि चिह्न ऐसे भूमि चिह्न के रूप में कम उपयोगी बन जाए, रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 435 - सौ रुपए का या (कॄषि उपज की दशा में) दस रुपए का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि
सौ रुपए का या (कॄषि उपज की दशा में) दस रुपए का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि जो कोई किसी सम्पत्ति को, एक सौ रुपए या उससे अधिक का या (जहां कि सम्पत्ति कॄषि उपज हो, वहां) दस रुपए या उससे अधिक का नुकसान कारित करने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह तद्द्वारा ऐसा नुकसान कारित…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 436 - गॄह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि
गॄह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि जो कोई किसी ऐसे निर्माण का, जो मामूली तौर पर उपासनास्थान के रूप में या मानव-विकास के रूप में या संपत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में आता हो, नाश कारित करने के आशय से, या यह सभ्भाव्य जानते हुए कि वह तद्द्वारा उसका नाश कारित करेगा, अग्नि…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 437 - तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि
तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि जो कोई किसी तल्लायुक्त जलयान या बीस टन या उससे अधिक बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बना देने के आशय से, या यह सभ्भाव्य जानते हुए कि वह तद्द्वारा उसे नष्ट करेगा, या सापद बना देगा, उस जलयान की रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के…
पूरा पढ़ेंरेल, विमान, डेक वाले जहाज या बीस टन भार वाले किसी भी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से की गई शरारत।
(1) जो कोई भी किसी रेल, विमान, या डेक वाले जहाज या बीस टन या उससे अधिक भार वाले किसी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि वह ऐसा करके उस रेल, विमान या जहाज को नष्ट या असुरक्षित बना देगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी…
पूरा पढ़ेंधारा 438 - धारा 437 में वर्णित अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई रिष्टि के लिए दंड
धारा 437 में वर्णित अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई रिष्टि के लिए दंड जो कोई अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा ऐसी रिष्टि करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, जैसी अंतिम पूर्ववर्ती धारा में वर्णित है, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा…
पूरा पढ़ेंरेल, विमान, डेक वाले जहाज या बीस टन भार वाले किसी भी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से की गई शरारत।
(1) जो कोई भी किसी रेल, विमान, या डेक वाले जहाज या बीस टन या उससे अधिक भार वाले किसी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि वह ऐसा करके उस रेल, विमान या जहाज को नष्ट या असुरक्षित बना देगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी…
पूरा पढ़ेंधारा 439 - चोरी, आदि करने के आशय से जलयान को साशय भूमि या किनारे पर चढ़ा देने के लिए दंड
चोरी, आदि करने के आशय से जलयान को साशय भूमि या किनारे पर चढ़ा देने के लिए दंड जो कोई किसी जलयान को यह आशय रखते हुए कि वह उसमें अंतर्विष्ट किसी संपत्ति की चोरी करे या बेईमानी से ऐसी किसी संपत्ति का दुर्विनियोग करे, या इस आशय से कि ऐसी चोरी या संपत्ति का दुर्विनियोग किया जाए, साशय भूमि पर चढ़ा देगा, वह दोनों में से किसी…
पूरा पढ़ेंचोरी आदि के इरादे से जानबूझकर जहाज को किनारे या समुद्र तट पर फंसाने के लिए दंड।
जो कोई भी जानबूझकर किसी पोत को किनारे या समुद्र तट पर फंसाता है, इस इरादे से कि उसमें निहित किसी संपत्ति की चोरी की जाए या बेईमानी से ऐसी संपत्ति का दुरुपयोग किया जाए, या इस इरादे से कि ऐसी चोरी या संपत्ति का दुरुपयोग किया जा सके, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और जुर्माना…
पूरा पढ़ेंधारा 440 - मॄत्यु या उपहति कारित करने की तैयारी के पश्चात् की गई रिष्टि
मॄत्यु या उपहति कारित करने की तैयारी के पश्चात् की गई रिष्टि जो कोई किसी व्यक्ति को मॄत्यु या उसे उपहति या उसका संदोष अवरोध कारित करने की अथवा मॄत्यु का, या उपहति का, या सदोष अवरोध का भय कारित करने की, तैयारी करके रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया…
पूरा पढ़ेंशरारत।
(1) जो कोई भी जनता या किसी व्यक्ति को अनुचित हानि या क्षति पहुँचाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि वह ऐसा करने की संभावना रखता है, किसी संपत्ति का विनाश करता है, या किसी संपत्ति में या उसकी स्थिति में ऐसा कोई परिवर्तन करता है जिससे उसका मूल्य या उपयोगिता नष्ट हो जाती है या कम हो जाती है, या उसे नुकसान पहुँचता है, वह…
पूरा पढ़ेंधारा 441 - आपराधिक अतिचार
आपराधिक अतिचार जो कोई ऐसी संपत्ति में या ऐसी संपत्ति पर, जो किसी दूसरे के कब्जे में है, इस आशय से प्रवेश करता है, कि वह कोई अपराध करे या किसी व्यक्ति को, जिसके कब्जे में ऐसी संपत्ति है ; अभित्रस्त, अपमानित या क्षुब्ध करे, अथवा ऐसी संपत्ति में या ऐसी संपत्ति पर, विधिपूर्वक प्रवेश करके वहां विधिविरुद्ध रूप में इस आशय से…
पूरा पढ़ेंआपराधिक अतिक्रमण और घर में अनाधिकृत प्रवेश।
(1) जो कोई किसी दूसरे के कब्जे वाली संपत्ति में अपराध करने के इरादे से या ऐसी संपत्ति के कब्जे में मौजूद किसी व्यक्ति को डराने, अपमानित करने या परेशान करने के इरादे से प्रवेश करता है, या ऐसी संपत्ति में वैध रूप से प्रवेश करने के बाद, किसी ऐसे व्यक्ति को डराने, अपमानित करने या परेशान करने के इरादे से या अपराध करने के…
पूरा पढ़ेंधारा 442 - गॄह-अतिचार
गॄह-अतिचार जो कोई किसी निर्माण, तम्बू या जलयान में, जो मानव-निवास के रूप में उपयोग में आता है, या किसी निर्माण में, जो उपासना-स्थान के रूप में, या किसी संपत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में आता है, प्रवेश करके या उसमें बना रह कर, आपराधिक अतिचार करता है, वह “गॄह-अतिचार” करता है, यह कहा जाता है । स्पष्टीकरण…
पूरा पढ़ेंआपराधिक अतिक्रमण और घर में अनाधिकृत प्रवेश।
(1) जो कोई किसी दूसरे के कब्जे वाली संपत्ति में अपराध करने के इरादे से या ऐसी संपत्ति के कब्जे में मौजूद किसी व्यक्ति को डराने, अपमानित करने या परेशान करने के इरादे से प्रवेश करता है, या ऐसी संपत्ति में वैध रूप से प्रवेश करने के बाद, किसी ऐसे व्यक्ति को डराने, अपमानित करने या परेशान करने के इरादे से या अपराध करने के…
पूरा पढ़ेंधारा 447 - आपराधिक अतिचार के लिए दंड
आपराधिक अतिचार के लिए दंड जो कोई आपराधिक अतिचार करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंआपराधिक अतिक्रमण और घर में अनाधिकृत प्रवेश।
(1) जो कोई किसी दूसरे के कब्जे वाली संपत्ति में अपराध करने के इरादे से या ऐसी संपत्ति के कब्जे में मौजूद किसी व्यक्ति को डराने, अपमानित करने या परेशान करने के इरादे से प्रवेश करता है, या ऐसी संपत्ति में वैध रूप से प्रवेश करने के बाद, किसी ऐसे व्यक्ति को डराने, अपमानित करने या परेशान करने के इरादे से या अपराध करने के…
पूरा पढ़ेंधारा 448 - गॄह-अतिचार के लिए दंड
गॄह-अतिचार के लिए दंड जो कोई गॄह-अतिचार करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंआपराधिक अतिक्रमण और घर में अनाधिकृत प्रवेश।
(1) जो कोई किसी दूसरे के कब्जे वाली संपत्ति में अपराध करने के इरादे से या ऐसी संपत्ति के कब्जे में मौजूद किसी व्यक्ति को डराने, अपमानित करने या परेशान करने के इरादे से प्रवेश करता है, या ऐसी संपत्ति में वैध रूप से प्रवेश करने के बाद, किसी ऐसे व्यक्ति को डराने, अपमानित करने या परेशान करने के इरादे से या अपराध करने के…
पूरा पढ़ें- IPC §32BNS §3(4)
धारा 32 - कार्यों का निर्देश करने वाले शब्दों के अन्तर्गत अवैध लोप आता है
सामान्य स्पष्टीकरण।
- IPC §94BNS §32
धारा 94 - वह कार्य जिसको करने के लिए कोई व्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है
वह कृत्य जिसके लिए किसी व्यक्ति को धमकियों के बल पर विवश किया जाता है।
- IPC §320BNS §116
धारा 320 - घोर उपहति
गंभीर चोट।
- IPC §321BNS §115(1)
धारा 321 - स्वेच्छया उपहति कारित करना
जानबूझकर चोट पहुंचाना।
- IPC §322BNS §117(1)
धारा 322 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
- IPC §323BNS §115(2)
जानबूझकर चोट पहुंचाने पर मिलने वाली सजा।
जानबूझकर चोट पहुंचाना।
- IPC §324BNS §118(1)
धारा 324 - खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना
खतरनाक हथियारों या साधनों द्वारा जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
- IPC §325BNS §117(2)
धारा 325 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने के लिए दण्ड
जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
- IPC §326BNS §118(2)
धारा 326 - खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
खतरनाक हथियारों या साधनों द्वारा जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
- IPC §326ABNS §124(1)
धारा 326A - एसिड हमले
एसिड आदि के प्रयोग से जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
- IPC §326BBNS §124(2)
धारा 326B - एसिड हमला करने का प्रयास
एसिड आदि के प्रयोग से जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
- IPC §327BNS §119(1)
धारा 327 - संपत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
संपत्ति हड़पने या किसी अवैध कृत्य के लिए विवश करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
- IPC §328BNS §123
धारा 328 - अपराध करने के आशय से विष इत्यादि द्वारा उपहति कारित करना
किसी अपराध को अंजाम देने के इरादे से जहर आदि के माध्यम से चोट पहुंचाना।
- IPC §329BNS §119(2)
धारा 329 - सम्पत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
संपत्ति हड़पने या किसी अवैध कृत्य के लिए विवश करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
- IPC §421BNS §320
धारा 421 - लेनदारों में वितरण निवारित करने के लिए संपत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाना
लेनदारों के बीच वितरण को रोकने के लिए बेईमानी या धोखाधड़ी से संपत्ति को हटाना या छिपाना।
- IPC §422BNS §321
धारा 422 - त्रऐंण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना
बेईमानी या धोखाधड़ी से लेनदारों को ऋण उपलब्ध होने से रोकना।
- IPC §423BNS §322
धारा 423 - अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन
बेईमानी या कपटपूर्ण तरीके से किए गए हस्तांतरण विलेख का निष्पादन जिसमें प्रतिफल का झूठा विवरण शामिल हो।
- IPC §424BNS §323
धारा 424 - सम्पत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना
संपत्ति को बेईमानी या धोखाधड़ी से हटाना या छिपाना।
- IPC §425BNS §324(1)
धारा 425 - रिष्टि
शरारत।
- IPC §426BNS §324(2)
धारा 426 - रिष्टि के लिए दण्ड
शरारत।
- IPC §427BNS §324(4)
धारा 427 - रिष्टि जिससे पचास रुपए का नुकसान होता है
शरारत।
- IPC §428BNS §325
धारा 428 - दस रुपए के मूल्य के जीवजन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि
किसी जानवर को मारकर या अपंग करके उसे नुकसान पहुंचाना।
- IPC §429BNS §325
धारा 429 - किसी मूल्य के ढोर, आदि को या पचास रुपए के मूल्य के किसी जीवजन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि
किसी जानवर को मारकर या अपंग करके उसे नुकसान पहुंचाना।
- IPC §430BNS §326(a)
धारा 430 - सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
- IPC §431BNS §326(b)
धारा 431 - लोक सड़क, पुल, नदी या जलसरणी को क्षति पहुंचाकर रिष्टि
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
- IPC §432BNS §326(c)
धारा 432 - लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
- IPC §433BNS §326(d)
धारा 433 - किसी दीपगॄह या समुद्री-चिह्न को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
- IPC §434BNS §326(e)
धारा 434 - लोक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
- IPC §435BNS §326(f)
धारा 435 - सौ रुपए का या (कॄषि उपज की दशा में) दस रुपए का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
- IPC §436BNS §326(g)
धारा 436 - गॄह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
- IPC §437BNS §327(1)
धारा 437 - तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि
रेल, विमान, डेक वाले जहाज या बीस टन भार वाले किसी भी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से की गई शरारत।
- IPC §438BNS §327(2)
धारा 438 - धारा 437 में वर्णित अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई रिष्टि के लिए दंड
रेल, विमान, डेक वाले जहाज या बीस टन भार वाले किसी भी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से की गई शरारत।
- IPC §439BNS §328
धारा 439 - चोरी, आदि करने के आशय से जलयान को साशय भूमि या किनारे पर चढ़ा देने के लिए दंड
चोरी आदि के इरादे से जानबूझकर जहाज को किनारे या समुद्र तट पर फंसाने के लिए दंड।
- IPC §440BNS §324(6)
धारा 440 - मॄत्यु या उपहति कारित करने की तैयारी के पश्चात् की गई रिष्टि
शरारत।
- IPC §441BNS §329(1)
धारा 441 - आपराधिक अतिचार
आपराधिक अतिक्रमण और घर में अनाधिकृत प्रवेश।
- IPC §442BNS §329(2)
धारा 442 - गॄह-अतिचार
आपराधिक अतिक्रमण और घर में अनाधिकृत प्रवेश।
- IPC §447BNS §329(3)
धारा 447 - आपराधिक अतिचार के लिए दंड
आपराधिक अतिक्रमण और घर में अनाधिकृत प्रवेश।
- IPC §448BNS §329(4)
धारा 448 - गॄह-अतिचार के लिए दंड
आपराधिक अतिक्रमण और घर में अनाधिकृत प्रवेश।
