बीएसए → आईईए
20 प्रविष्टियाँ
जब अधिकार या रीति-रिवाज पर सवाल उठता है तो प्रासंगिक तथ्य।
जहां किसी अधिकार या प्रथा के अस्तित्व का प्रश्न हो, वहां निम्नलिखित तथ्य प्रासंगिक होते हैं-- (क) कोई भी ऐसा लेन-देन जिसके द्वारा प्रश्नगत अधिकार या प्रथा का सृजन, दावा, संशोधन, मान्यता, अभिकथन या खंडन किया गया हो, या जो उसके अस्तित्व के साथ असंगत हो; (ख) वे विशेष उदाहरण जिनमें अधिकार या प्रथा का दावा किया गया,…
पूरा पढ़ेंजबकि अधिकार या रुढि प्रश्नगत है तब सुसंगत तथ्य
जहाँ कि किसी अधिकार या रुढि के अस्तित्व के बारे में प्रश्न है, निम्नलिखित तथ्य सुसंगत है - क)कोई संव्यवहार, जिसके द्वारा प्रश्नगत अधिकार या रुढि सृष्ट, दावाकृत, उपांतरित (परिवर्तित ), मान्यकृत, प्राख्यात या प्रत्याख्यात की गई थी या जो उसके अस्तित्व से असंगत था, ख)वे विशिष्ट उदाहरण, जिनमें वह अधिकार या रुढि दावाकृत,…
पूरा पढ़ेंवे तथ्य जो इस प्रश्न से संबंधित हैं कि कृत्य आकस्मिक था या जानबूझकर किया गया था।
जब यह सवाल उठता है कि कोई कार्य आकस्मिक था या जानबूझकर किया गया था, या किसी विशेष ज्ञान या इरादे से किया गया था, तो यह तथ्य प्रासंगिक होता है कि ऐसा कार्य समान घटनाओं की एक श्रृंखला का हिस्सा था, जिनमें से प्रत्येक में कार्य करने वाला व्यक्ति शामिल था। चित्र। (क) ए पर आरोप है कि उसने बीमाकृत धन प्राप्त करने के लिए…
पूरा पढ़ेंकार्य आकस्मिक या साशय था इस प्रश्न पर प्रकाश डालने वाला तथ्य
जबकि प्रश्न यह है कि कार्य आकस्मिक या साशय था या किसी विशिष्ट ज्ञान या आशय से किया गया था, तब यह तथ्य कि ऐसा कार्य समरुप घटनाओं की आवली ( क्रमबद्धता ) का भाग था जिनमें से हर घटना के साथ वह कार्य करने वला व्यक्ति सम्पृक्त (वास्ता रखने वाला )था, सुसंगत है । दृष्टांत : क)ऐ पर यह अभियोग है कि अपने गृह के बीमे का धन…
पूरा पढ़ेंआधिकारिक संचार।
किसी भी लोक अधिकारी को आधिकारिक गोपनीयता में प्राप्त संचार का खुलासा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, जब वह यह मानता है कि खुलासा करने से सार्वजनिक हितों को नुकसान होगा।
पूरा पढ़ेंशासकीय संसूचनाएँ
कोई भी लोक ऑफिसर, उसे शासकीय विश्वास में दी गई संसूचनाओं को प्रकट करने के लिए विवश नहीं किया जाएगा, जब कि वह यह समझता है कि उस प्रकटन से लोक हितों की हानि होगी ।
पूरा पढ़ेंअपराधों के घटित होने से संबंधित जानकारी।
किसी भी मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी को यह बताने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा कि उसे किसी अपराध के घटित होने की सूचना कब मिली, और न ही किसी राजस्व अधिकारी को यह बताने के लिए बाध्य किया जाएगा कि उसे सार्वजनिक राजस्व के विरुद्ध किसी अपराध के घटित होने की सूचना कब मिली। स्पष्टीकरण। --"राजस्व अधिकारी" से तात्पर्य सार्वजनिक…
पूरा पढ़ेंअपराधों के किए जाने के बारे में जानकारी
कोई भी मजिस्ट्रेट या पुलिस ऑफिसर यह कहने के लिए विवश नहीं किया जाएगा कि किसी अपराध के किए जाने के बारे में उसे कोई जानकारी कहाँ से मिली, और कोई भी राजस्व ऑफिसर यह कहने के लिए विवश नहीं किया जाएगा कि लोक राजस्व के विरुद्ध किसी अपराध के किए जाने के बारे में उसे कोई जानकारी कहाँ से मिली । स्पष्टीकरण : इस धारा में "राजस्व…
पूरा पढ़ेंपेशेवर संचार।
(1) किसी भी अधिवक्ता को, अपने मुवक्किल की स्पष्ट सहमति के बिना, किसी भी समय, अपने मुवक्किल द्वारा या उसकी ओर से अधिवक्ता के रूप में अपनी सेवा के दौरान और उसके उद्देश्य से उसे प्राप्त किसी भी संचार का खुलासा करने, या किसी ऐसे दस्तावेज़ की विषयवस्तु या स्थिति बताने की अनुमति नहीं दी जाएगी जिससे वह अपनी पेशेवर सेवा के…
पूरा पढ़ेंवृत्तिक (व्यावसायिक) संसूचनाएँ
कोई भी बैरिस्टर, अटर्नी, प्लीडर या वकिल अपने कक्षीकार की अभिव्यक्त सम्मति के सिवाय ऐसी किसी संसूचना को प्रकट करने के लिए, जो उसके बैरिस्टर, अटर्नी, प्लीडर या वकिल की हैसियत में नियोजन के अनुक्रम में या के प्रयोजनार्थ उसके कक्षीकार द्वारा, या की ओर से उसे दी गई हो अथवा किसी दस्तावेज की, जिससे वह अपने वृत्तिक नियोजन के…
पूरा पढ़ेंपेशेवर संचार।
(1) किसी भी अधिवक्ता को, अपने मुवक्किल की स्पष्ट सहमति के बिना, किसी भी समय, अपने मुवक्किल द्वारा या उसकी ओर से अधिवक्ता के रूप में अपनी सेवा के दौरान और उसके उद्देश्य से उसे प्राप्त किसी भी संचार का खुलासा करने, या किसी ऐसे दस्तावेज़ की विषयवस्तु या स्थिति बताने की अनुमति नहीं दी जाएगी जिससे वह अपनी पेशेवर सेवा के…
पूरा पढ़ेंवृत्तिक (व्यावसायिक) संसूचनाएँ
कोई भी बैरिस्टर, अटर्नी, प्लीडर या वकिल अपने कक्षीकार की अभिव्यक्त सम्मति के सिवाय ऐसी किसी संसूचना को प्रकट करने के लिए, जो उसके बैरिस्टर, अटर्नी, प्लीडर या वकिल की हैसियत में नियोजन के अनुक्रम में या के प्रयोजनार्थ उसके कक्षीकार द्वारा, या की ओर से उसे दी गई हो अथवा किसी दस्तावेज की, जिससे वह अपने वृत्तिक नियोजन के…
पूरा पढ़ेंपेशेवर संचार।
(1) किसी भी अधिवक्ता को, अपने मुवक्किल की स्पष्ट सहमति के बिना, किसी भी समय, अपने मुवक्किल द्वारा या उसकी ओर से अधिवक्ता के रूप में अपनी सेवा के दौरान और उसके उद्देश्य से उसे प्राप्त किसी भी संचार का खुलासा करने, या किसी ऐसे दस्तावेज़ की विषयवस्तु या स्थिति बताने की अनुमति नहीं दी जाएगी जिससे वह अपनी पेशेवर सेवा के…
पूरा पढ़ेंवृत्तिक (व्यावसायिक) संसूचनाएँ
कोई भी बैरिस्टर, अटर्नी, प्लीडर या वकिल अपने कक्षीकार की अभिव्यक्त सम्मति के सिवाय ऐसी किसी संसूचना को प्रकट करने के लिए, जो उसके बैरिस्टर, अटर्नी, प्लीडर या वकिल की हैसियत में नियोजन के अनुक्रम में या के प्रयोजनार्थ उसके कक्षीकार द्वारा, या की ओर से उसे दी गई हो अथवा किसी दस्तावेज की, जिससे वह अपने वृत्तिक नियोजन के…
पूरा पढ़ेंपेशेवर संचार।
(1) किसी भी अधिवक्ता को, अपने मुवक्किल की स्पष्ट सहमति के बिना, किसी भी समय, अपने मुवक्किल द्वारा या उसकी ओर से अधिवक्ता के रूप में अपनी सेवा के दौरान और उसके उद्देश्य से उसे प्राप्त किसी भी संचार का खुलासा करने, या किसी ऐसे दस्तावेज़ की विषयवस्तु या स्थिति बताने की अनुमति नहीं दी जाएगी जिससे वह अपनी पेशेवर सेवा के…
पूरा पढ़ेंधारा १२६ दुभाषियों आदि को लागू होगी
धारा १२६ के उपबंध दुभाषियों और बैरिस्टरों, प्लीडरों, अटर्नियों और वकिलों के लिपिकों या सेवकों का लागू होंगे ।
पूरा पढ़ेंसाक्ष्य प्रस्तुत करने मात्र से विशेषाधिकार का त्याग नहीं हो जाता।
यदि किसी मुकदमे का कोई पक्षकार अपनी ओर से या अन्यथा उसमें साक्ष्य देता है, तो उसे धारा 132 में उल्लिखित प्रकटीकरण के लिए सहमति देने वाला नहीं माना जाएगा; और यदि किसी मुकदमे या कार्यवाही का कोई पक्षकार किसी ऐसे अधिवक्ता को गवाह के रूप में बुलाता है, तो उसे ऐसे प्रकटीकरण के लिए सहमति देने वाला तभी माना जाएगा जब वह ऐसे…
पूरा पढ़ेंसाक्ष्य देने के लिए स्वयंमेव उद्दत (स्वेच्छया) होने से विशेषाधिकार अधित्यक्त नहीं हो जाता
यदि किसी वाद का कोई पक्षकार स्वप्रेरणा से ही या अन्यथा उसमें साक्ष्य देता है तो यह न समझा जाएगा कि तद्द्वारा उसे ऐसे प्रकटन के लिए, जैसा धारा १२६ में वर्णित है, सम्मति दे दी है, तथा यदि किसी वाद या कार्यवाही का कोई पक्षकार ऐसे किसी बैरिस्टर, प्लीडर, अटर्नी या वकील को साक्षी के रुप में बुलाता है, तो यह कि उसने ऐसे…
पूरा पढ़ेंकानूनी सलाहकारों के साथ गोपनीय संचार।
किसी भी व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष अपने और अपने कानूनी सलाहकार के बीच हुई किसी भी गोपनीय बातचीत का खुलासा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, सिवाय इसके कि वह स्वयं गवाह के रूप में पेश हो। यदि वह स्वयं गवाह के रूप में पेश होता है, तो उसे ऐसी किसी भी बातचीत का खुलासा करने के लिए बाध्य किया जा सकता है जो न्यायालय को…
पूरा पढ़ेंविधि सलाहकारों से गोपनीय संसूचनाएं
कोई भी व्यक्ति किसी गोपनीय संसूचना को, जो उसके और उसके विधि वृत्तिक सलाहकार के बीच हुई है, न्यायालय को प्रकट करने के लिए विवश नहीं किया जाएगा, जब तक कि वह अपने को साक्षी के तौर पर पेश न कर दे, ऐसे पेश करने की दशा में किन्हीं भी ऐसी संसूचनाओं को, जिन्हें उस किसी साक्ष्य को स्पष्ट करने के लिए जानना, जो उसने दिया है,…
पूरा पढ़ेंजो गवाह पक्षकार नहीं है, उसके स्वामित्व दस्तावेजों का प्रस्तुतीकरण।
किसी भी ऐसे गवाह को, जो मुकदमे का पक्षकार नहीं है, किसी संपत्ति के स्वामित्व विलेख या किसी ऐसे दस्तावेज को प्रस्तुत करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा जिसके आधार पर वह किसी संपत्ति को गिरवीदार या बंधकदार के रूप में धारण करता है, या किसी ऐसे दस्तावेज को प्रस्तुत करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा जिसके प्रस्तुतीकरण से…
पूरा पढ़ेंजो साक्षी पक्षकार नहीं है उसके हक-विलेखों को पेश किया जाना
कोई भी साक्षी, जो वाद का पक्षकार नहीं है, किसी संपत्ति संबंधी अपने हक विलेखों को, या किसी ऐसी दस्तावेज को, जिसके बल पर वह गिरवीदार या बंधकदार के रुप में कोई संपत्ति धारण करता है, या किसी दस्तावेज को, जिसका पेशकरण उसे अपराद में फंसाने की प्रवृति रखता है, पेश करने के लिए विवश नहीं किया जाएगा, जब तक कि उसने ऐसे विलेखों…
पूरा पढ़ेंऐसे दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करना जिन्हें किसी अन्य व्यक्ति, जिसके पास वे मौजूद हैं, प्रस्तुत करने से इनकार कर सकता है।
किसी भी व्यक्ति को उसके कब्जे में मौजूद दस्तावेजों या उसके नियंत्रण में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को प्रस्तुत करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, जिन्हें यदि कोई अन्य व्यक्ति अपने कब्जे या नियंत्रण में होने पर प्रस्तुत करने से इनकार करने का हकदार होता, तो ऐसा तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि उक्त व्यक्ति उन्हें…
पूरा पढ़ेंऐसे दस्तावेजों या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों का पेश किया जाना, जिन्हें कोई दूसरा व्यक्ति, जिसका उन पर कब्जा है, पेश करने से इंकार कर सकता था
कोई भी व्यक्ति, अपने कब्जे में की ऐसे दस्तावेजों या अपने नियंत्रण वाले इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को पेश करने के लिए, जिनको पेश करने के लिए कोई अन्य व्यक्ति, यदि वे उसके कब्जे या नियंत्रण में होते, पेश करने से इंकार करने का हकदार होता, विवश नहीं किया जाएगा, जब तक कि ऐसा अंतिम वर्णित व्यक्ति उन्हें पेश करने के लिए सहमति…
पूरा पढ़ेंगवाह को इस आधार पर जवाब देने से छूट नहीं दी जा सकती कि जवाब देने से वह खुद अपराध साबित कर देगा।
किसी भी मुकदमे या किसी भी दीवानी या आपराधिक कार्यवाही में विचाराधीन मामले से संबंधित किसी भी मामले के बारे में किसी भी प्रश्न का उत्तर देने से किसी गवाह को इस आधार पर छूट नहीं दी जाएगी कि ऐसे प्रश्न का उत्तर देने से वह गवाह अपराधी साबित होगा, या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपराधी साबित होने की संभावना है, या इससे…
पूरा पढ़ेंइस आधार पर कि उत्तर उसे अपराध में फंसाएगा, साक्षी उत्तर देने से क्षम्य न होगा
कोई साक्षी किसी वाद या किसी सिविल या दाण्डिक कार्यवाही में विवाद्यक विषय से सुसंगत किसी विषय के बारे में किए गए किसी प्रश्न का उत्तर देने से इस आधार पर क्षम्य नहीं होगा कि ऐसे प्रश्न का उत्तर ऐसे साक्षी को अपराध में फंसाएगा या उसकी प्रवृत्ति प्रत्यक्षत: या परोक्षत: अपराध में फंसाने की होगी अथवा वह ऐसे साक्षी को किसी…
पूरा पढ़ेंसहयोगी।
किसी अपराध में सह-अपराधी आरोपी व्यक्ति के विरुद्ध एक सक्षम गवाह हो सकता है; और यदि किसी सह-अपराधी की पुष्ट गवाही के आधार पर दोषसिद्धि की जाती है तो वह अवैध नहीं है।
पूरा पढ़ेंसह-अपराधी
सह-अपराधी, अभियुक्त के विरुद्ध सक्षम साक्षी होगा, और कोई दोषसिद्धि केवल इसलिए अवैध नहीं है कि वह किसी सह-अपराधी के असम्पुष्ट परिसाक्ष्य (बयान) के आधार पर की गई है ।
पूरा पढ़ेंगवाहों की संख्या।
किसी भी तथ्य को साबित करने के लिए किसी भी मामले में गवाहों की कोई विशेष संख्या आवश्यक नहीं होगी।
पूरा पढ़ेंसाक्षियों की संख्या
किसी मामले में किसी तथ्य को साबित करने के लिए साक्षियों की कोई विशिष्ट संख्या अपेक्षित नहीं होगी ।
पूरा पढ़ेंगवाहों को पेश करने और उनकी जांच का क्रम।
गवाहों को पेश करने और उनसे पूछताछ करने का क्रम, दीवानी और आपराधिक प्रक्रिया से संबंधित तत्कालीन कानून और प्रथा द्वारा विनियमित किया जाएगा, और ऐसे किसी कानून के अभाव में, न्यायालय के विवेक द्वारा विनियमित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंसक्षियों के पेशकरण और उनकी परीक्षा का क्रम
सक्षियों के पेशकरण और उनकी परीक्षा का क्रम क्रमश: सिविल और दण्ड प्रक्रिया से तत्समय संबंधित विधि और पद्धति द्वारा, तथा ऐसी किसी विधि के अभाव में न्यायालय के विवेक द्वारा, विनियमित (नियंत्रण द्वारा सही करना) होगा ।
पूरा पढ़ेंन्यायाधीश को साक्ष्य की स्वीकार्यता के संबंध में निर्णय लेना है।
(1) जब कोई पक्ष किसी तथ्य का साक्ष्य देने का प्रस्ताव करता है, तो न्यायाधीश साक्ष्य देने का प्रस्ताव करने वाले पक्ष से पूछ सकता है कि यदि वह तथ्य सिद्ध हो जाता है, तो वह किस प्रकार प्रासंगिक होगा; और न्यायाधीश साक्ष्य को स्वीकार करेगा यदि वह सोचता है कि यदि वह तथ्य सिद्ध हो जाता है, तो वह प्रासंगिक होगा, अन्यथा नहीं।…
पूरा पढ़ेंन्यायाधीश साक्ष्य की ग्राह्यता के बारे में निश्चय करेगा
जबकि दोनों में से कोई पक्षकार किसी तथ्य का साक्ष्य देने की प्रस्थापना करता है, तब न्यायाधीश साक्ष्य देने की प्रस्थापना करने वाले पक्षकार से पूछ सकेगा कि अभिकथित तथ्य, यदि वह साबित हो जाए, किसी प्रकार सुसंगत होगा, और यदि न्यायाधीश यह समझता है कि वह तथ्य यदि साबित हो गया तो सुसंगत होगा, तो वह उस साक्ष्य को ग्रहण करेगा…
पूरा पढ़ेंगवाहों की जांच।
(1) किसी गवाह को बुलाने वाले पक्ष द्वारा उसकी परीक्षा को उसकी मुख्य परीक्षा कहा जाएगा। (2) विरोधी पक्ष द्वारा किसी गवाह की परीक्षा को उसकी जिरह कहा जाएगा। (3) जिरह के बाद गवाह की परीक्षा, उसे बुलाने वाले पक्ष द्वारा की जाएगी, जिसे उसकी पुनर्परीक्षा कहा जाएगा।
पूरा पढ़ेंमुख्य परिक्षा
किसी साक्षी की उस पक्षकार द्वारा, जो उसे बुलाता है, परीक्षा उसकी मुख्य परीक्षा कहलाएगी । प्रतिपरिक्षा - किसी साक्षी की प्रतिपक्षी द्वारा की गई परिक्षा उसकी प्रतिपरीक्षा कहलाएगी । पुन:परिक्षा - किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा के पश्चात् उसकी उस पक्षकार द्वारा, जिसने उसे बुलाया था, परीक्षा उसकी पुन:परीक्षा कहलाएगी ।
पूरा पढ़ेंपरीक्षाओं का क्रम।
(1) गवाहों की पहले मुख्य परीक्षा ली जाएगी, फिर (यदि विरोधी पक्ष चाहे तो) जिरह की जाएगी, फिर (यदि बुलाने वाला पक्ष चाहे तो) पुनः परीक्षा ली जाएगी। (2) मुख्य परीक्षा और जिरह प्रासंगिक तथ्यों से संबंधित होनी चाहिए, लेकिन जिरह उन तथ्यों तक सीमित नहीं होनी चाहिए जिनके बारे में गवाह ने अपनी मुख्य परीक्षा में गवाही दी थी।…
पूरा पढ़ेंपरीक्षाओं का क्रम।
गवाहों की पहले मुख्य परीक्षा ली जाएगी, फिर (यदि विरोधी पक्ष चाहे तो) जिरह की जाएगी, और फिर (यदि गवाह को बुलाने वाला पक्ष चाहे तो) पुनः परीक्षा ली जाएगी। जांच और जिरह प्रासंगिक तथ्यों से संबंधित होनी चाहिए, लेकिन जिरह उन तथ्यों तक सीमित नहीं होनी चाहिए जिनका गवाह ने अपनी मुख्य परीक्षा में उल्लेख किया है। पुनर्परीक्षा…
पूरा पढ़ेंकिसी दस्तावेज को प्रस्तुत करने के लिए बुलाए गए व्यक्ति से जिरह करना।
किसी व्यक्ति को दस्तावेज पेश करने के लिए बुलाया जाता है, लेकिन केवल दस्तावेज पेश करने मात्र से वह गवाह नहीं बन जाता, और जब तक उसे गवाह के रूप में नहीं बुलाया जाता, तब तक उससे जिरह नहीं की जा सकती।
पूरा पढ़ेंकिसी दस्तावेज को पेश करने के लिए समनित व्यक्ति की प्रतिपरीक्षा
किसी दस्तावेज को पेश करने के लिए समनित व्यक्ति केवल इस तथ्य के कारण कि वह उसे पेश करता है साक्षी नहीं हो जाता तथा यदि और जब तक वह साक्षी के तौर पर बुलाया नहीं जाता, उसकी प्रतिपरिक्षा नहीं की जा सकती ।
पूरा पढ़ें- BSA §11IEA §13
जब अधिकार या रीति-रिवाज पर सवाल उठता है तो प्रासंगिक तथ्य।
जबकि अधिकार या रुढि प्रश्नगत है तब सुसंगत तथ्य
- BSA §13IEA §15
वे तथ्य जो इस प्रश्न से संबंधित हैं कि कृत्य आकस्मिक था या जानबूझकर किया गया था।
कार्य आकस्मिक या साशय था इस प्रश्न पर प्रकाश डालने वाला तथ्य
- BSA §130IEA §124
आधिकारिक संचार।
शासकीय संसूचनाएँ
- BSA §131IEA §125
अपराधों के घटित होने से संबंधित जानकारी।
अपराधों के किए जाने के बारे में जानकारी
- BSA §132IEA §126बदलाव हुआ
पेशेवर संचार।
वृत्तिक (व्यावसायिक) संसूचनाएँ
- BSA §132IEA §126
पेशेवर संचार।
वृत्तिक (व्यावसायिक) संसूचनाएँ
- BSA §132IEA §126
पेशेवर संचार।
वृत्तिक (व्यावसायिक) संसूचनाएँ
- BSA §132IEA §127
पेशेवर संचार।
धारा १२६ दुभाषियों आदि को लागू होगी
- BSA §133IEA §128
साक्ष्य प्रस्तुत करने मात्र से विशेषाधिकार का त्याग नहीं हो जाता।
साक्ष्य देने के लिए स्वयंमेव उद्दत (स्वेच्छया) होने से विशेषाधिकार अधित्यक्त नहीं हो जाता
- BSA §134IEA §129
कानूनी सलाहकारों के साथ गोपनीय संचार।
विधि सलाहकारों से गोपनीय संसूचनाएं
- BSA §135IEA §130
जो गवाह पक्षकार नहीं है, उसके स्वामित्व दस्तावेजों का प्रस्तुतीकरण।
जो साक्षी पक्षकार नहीं है उसके हक-विलेखों को पेश किया जाना
- BSA §136IEA §131
ऐसे दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करना जिन्हें किसी अन्य व्यक्ति, जिसके पास वे मौजूद हैं, प्रस्तुत करने से इनकार कर सकता है।
ऐसे दस्तावेजों या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों का पेश किया जाना, जिन्हें कोई दूसरा व्यक्ति, जिसका उन पर कब्जा है, पेश करने से इंकार कर सकता था
- BSA §137IEA §132
गवाह को इस आधार पर जवाब देने से छूट नहीं दी जा सकती कि जवाब देने से वह खुद अपराध साबित कर देगा।
इस आधार पर कि उत्तर उसे अपराध में फंसाएगा, साक्षी उत्तर देने से क्षम्य न होगा
- BSA §138IEA §133बदलाव हुआ
सहयोगी।
सह-अपराधी
- BSA §139IEA §134
गवाहों की संख्या।
साक्षियों की संख्या
- BSA §140IEA §135
गवाहों को पेश करने और उनकी जांच का क्रम।
सक्षियों के पेशकरण और उनकी परीक्षा का क्रम
- BSA §141IEA §136
न्यायाधीश को साक्ष्य की स्वीकार्यता के संबंध में निर्णय लेना है।
न्यायाधीश साक्ष्य की ग्राह्यता के बारे में निश्चय करेगा
- BSA §142IEA §137
गवाहों की जांच।
मुख्य परिक्षा
- BSA §143IEA §138
परीक्षाओं का क्रम।
- BSA §144IEA §139
किसी दस्तावेज को प्रस्तुत करने के लिए बुलाए गए व्यक्ति से जिरह करना।
किसी दस्तावेज को पेश करने के लिए समनित व्यक्ति की प्रतिपरीक्षा
