UP Goondas Act 3
धारा 3 · ुंडो का बहिष्कासन इत्यादि
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि जिला मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत हो कि -
(क) कोई व्यक्ति गुण्डा है और
(ख)
(i) जिले या उसके किसी भाग में उसकी गतिविधियां या कार्य व्यक्तियों की जान या सम्पत्ति के लिये संत्रास, संकट या अपहानि करते हैं या करने के लिये आयोजित है; या
(ii) ऐसा विश्वास करने का युक्तियुक्त कारण है कि वह जिले या उसके किसी भाग में धारा 2 के खण्ड (ख) के उपखण्ड (1) से (3) तक में निर्दिष्ट किसी अपराध को करने में या किसी ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण में लगा है या लगने वाला है: और
(ग) साक्षीगण अपनी जान या सम्पत्ति के क्षेत्र के सम्बन्ध में अपनी आशंका के कारण उसके विरूद्ध साक्ष्य देने को तैयार नहीं है;
तो जिला मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को लिखित नोटिस द्वारा खण्ड (क). (ख) और (ग) के संबंध में उसके विरूद्ध सारवान् आरोपों की सामान्य प्रकृति की सूचना देगा, और उसको उनके विरूद्ध स्पष्टीकरण देने का समुचित अवसर देगा ।
(2) उस व्यक्ति को, जिसके विरूद्ध इस धारा के अधीन आदेश देने का प्रस्ताव हो. अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने और उसके द्वारा प्रतिरक्षित किये जाने का अधिकार होगा तथा, जब तक जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अभिलिखित किये जाने वाले कारणों से उनकी राय में उसकी तदर्थ प्रार्थना परेशान या विलम्ब करने के प्रयोजन से न की गई हो, उसे, यदि वह ऐसा चाहे, स्वयं परीक्षित होने का और ऐसे अन्य किन्हीं साक्षियों को भी जिन्हें वह अपने स्पष्टीकरण के समर्थन में पेश करना चाहे, परीक्षित करने का समुचित अवसर दिया जायेगा।
(3) तदुपरान्त जिला मजिस्ट्रेट अपना यह समाधान करने पर कि उपधारा (1) के खण्ड (क), (ख) और (ग) में उल्लिखित शर्तें विद्यमान है, लिखित आदेश द्वारा
(क) उसे यह निर्देश दे सकता है कि वह ऐसे मार्ग से यदि कोई हों और ऐसे समय के भीतर जैसा आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाय, अपनी स्थानीय अधिकारिता की सीमा के भीतर के क्षेत्र से या ऐसे क्षेत्र और ऐसे किसी जिले या जिलों या उनके किसी भाग से जो उससे आसन्न हो, स्वयं बाहर चला जाय और उक्त क्षेत्र या उक्त क्षेत्र और ऐसे आसन्न जिला या जिलों या उसके या उनके या उनके किसी भाग में, यथास्थित जहां से उसे स्वयं बाहर जाने का निर्देश दिया गया था, तब तक प्रवेश न करें जब तक कि छः मास से अनाधिक ऐसी अवधि जो उक्त आदेश में विनिर्दिष्ट की जाय समाप्त न हो जाय
(ख) (1) ऐसे व्यक्ति से, ऐसी रीति से. ऐसे समय पर और ऐसे प्राधिकारी या व्यक्ति को, जो आदेश में निर्दिष्ट किया जाये, अपनी गतिविधि की सूचना देने या स्वयं उपस्थित होने अथवा दोनों कार्य करने की तब तक के लिये अपेक्षा कर सकता है;
(2) उसके द्वारा किसी ऐसी वस्तु को, जो आदेश में निर्दिष्ट की जाय, कब्जे में रखने या उसको प्रयोग करने से तब तक के लिये प्रतिबद्ध या निर्बन्धित करने का
(3) उसके द्वारा अन्यथा ऐसी रीति से, जैसी आदेश में निर्दिष्ट की जाय, आचरण करने का तब तक के लिये निर्देश दे सकता है -
जब तक कि छः माह से अनधिक ऐसी अवधि जो आदेश में निर्दिष्ट की जाय, समाप्त न हो जायें।
(क) कोई व्यक्ति गुण्डा है और
(ख)
(i) जिले या उसके किसी भाग में उसकी गतिविधियां या कार्य व्यक्तियों की जान या सम्पत्ति के लिये संत्रास, संकट या अपहानि करते हैं या करने के लिये आयोजित है; या
(ii) ऐसा विश्वास करने का युक्तियुक्त कारण है कि वह जिले या उसके किसी भाग में धारा 2 के खण्ड (ख) के उपखण्ड (1) से (3) तक में निर्दिष्ट किसी अपराध को करने में या किसी ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण में लगा है या लगने वाला है: और
(ग) साक्षीगण अपनी जान या सम्पत्ति के क्षेत्र के सम्बन्ध में अपनी आशंका के कारण उसके विरूद्ध साक्ष्य देने को तैयार नहीं है;
तो जिला मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को लिखित नोटिस द्वारा खण्ड (क). (ख) और (ग) के संबंध में उसके विरूद्ध सारवान् आरोपों की सामान्य प्रकृति की सूचना देगा, और उसको उनके विरूद्ध स्पष्टीकरण देने का समुचित अवसर देगा ।
(2) उस व्यक्ति को, जिसके विरूद्ध इस धारा के अधीन आदेश देने का प्रस्ताव हो. अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने और उसके द्वारा प्रतिरक्षित किये जाने का अधिकार होगा तथा, जब तक जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अभिलिखित किये जाने वाले कारणों से उनकी राय में उसकी तदर्थ प्रार्थना परेशान या विलम्ब करने के प्रयोजन से न की गई हो, उसे, यदि वह ऐसा चाहे, स्वयं परीक्षित होने का और ऐसे अन्य किन्हीं साक्षियों को भी जिन्हें वह अपने स्पष्टीकरण के समर्थन में पेश करना चाहे, परीक्षित करने का समुचित अवसर दिया जायेगा।
(3) तदुपरान्त जिला मजिस्ट्रेट अपना यह समाधान करने पर कि उपधारा (1) के खण्ड (क), (ख) और (ग) में उल्लिखित शर्तें विद्यमान है, लिखित आदेश द्वारा
(क) उसे यह निर्देश दे सकता है कि वह ऐसे मार्ग से यदि कोई हों और ऐसे समय के भीतर जैसा आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाय, अपनी स्थानीय अधिकारिता की सीमा के भीतर के क्षेत्र से या ऐसे क्षेत्र और ऐसे किसी जिले या जिलों या उनके किसी भाग से जो उससे आसन्न हो, स्वयं बाहर चला जाय और उक्त क्षेत्र या उक्त क्षेत्र और ऐसे आसन्न जिला या जिलों या उसके या उनके या उनके किसी भाग में, यथास्थित जहां से उसे स्वयं बाहर जाने का निर्देश दिया गया था, तब तक प्रवेश न करें जब तक कि छः मास से अनाधिक ऐसी अवधि जो उक्त आदेश में विनिर्दिष्ट की जाय समाप्त न हो जाय
(ख) (1) ऐसे व्यक्ति से, ऐसी रीति से. ऐसे समय पर और ऐसे प्राधिकारी या व्यक्ति को, जो आदेश में निर्दिष्ट किया जाये, अपनी गतिविधि की सूचना देने या स्वयं उपस्थित होने अथवा दोनों कार्य करने की तब तक के लिये अपेक्षा कर सकता है;
(2) उसके द्वारा किसी ऐसी वस्तु को, जो आदेश में निर्दिष्ट की जाय, कब्जे में रखने या उसको प्रयोग करने से तब तक के लिये प्रतिबद्ध या निर्बन्धित करने का
(3) उसके द्वारा अन्यथा ऐसी रीति से, जैसी आदेश में निर्दिष्ट की जाय, आचरण करने का तब तक के लिये निर्देश दे सकता है -
जब तक कि छः माह से अनधिक ऐसी अवधि जो आदेश में निर्दिष्ट की जाय, समाप्त न हो जायें।
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