UP Goondas Act 2
धारा 2 · िभाषायें
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जब तक कि प्रसंग द्वारा अन्यथा अपेक्षित न हो, इस अधिनियम में
(क) 'जिला मजिस्ट्रेट के अन्र्तगत राज्य सरकार द्वारा तदर्थ अधिकृत कोई अपर जिला मजिस्ट्रेट भी है;
(ख) गुण्डा का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है -
(1) जो स्वयं या किसी गिरोह के सदस्य या सरगना के रूप में अभ्यासतः भारतीय दण्ड संहिता की धारा 153 या धारा 153 ख या धारा 294 या उक्त संहिता के अध्याय 15, अध्याय 16, अध्याय 17 या अध्याय 22 के अधीन दण्डनीय अपराध करता है. या करने का प्रयास करता है या करने के लिये दुष्प्रेरित करता है; या
(2) जो स्त्री तथा लड़की अनैतिक व्यापार दमन अधिनियम, 1956 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिये सिद्धदोष ठहराया गया हो; या
(3) जो संयुक्त प्रान्त आबकारी अधिनियम, 1910 या सार्वजनिक द्यूत अधिनियम, 1867 या आयुध अधिनियम, 1959 की धारा 25, धारा 27 या धारा 29 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिये कम से कम तीन बार सिद्धदोष ठहराया गया हो; या
(4) जिसकी सामान्य ख्याती है कि वह दुःसाहसिक और जनसमुदाय के लिये खतरनाक व्यक्ति है; या
(5) जो अभ्यासतः स्त्रियों या लड़कियों के प्रति अशिष्ट उक्ति कहता रहा हो या उनसे छेडखानी करता रहा हो; या।
(6) जो दलाल (टाउट) है;
स्पष्टीकरण- "दलाल का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो-
(क) किसी व्यक्ति को अपने लिये या किसी अन्य व्यक्ति के लिये किसी प्रकार का परितोषण किसी लोक सेवक या सरकार या संसद या राज्य विधान मण्डल के सदस्य को भ्रष्ट या अवैध साधनों द्वारा केन्द्रीय या राज्य सरकार, संसद या राज्य विधान मण्डल, किसी स्थानीय प्राधिकारी, निगम, सरकारी कम्पनी या लोक सेवक से कुछ करने या कुछ करने से प्रविरत रहने या किसी व्यक्ति के प्रति अनुग्रह करने या अनुग्रह न करने या किसी व्यक्ति का उपकार या अपकार करने का प्रयत्न करने को उत्प्रेरित करने के लिये प्रतिग्रहीत करता है या अभिप्राप्त करता है या प्रतिग्रहीत करने को सहमत होता है या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करता है या
(ख) विधि व्यवसाय में हितबद्ध किसी विधि व्यवसायी द्वारा प्रस्तावित किसी पारिश्रमिक के प्रतिफल स्वरूप उस व्यवसाय में किसी विधि व्यवसायी का नियोजन प्राप्त करता है या उसको प्राप्त करने के लिये किसी विधि व्यवसायी से या विधि व्यवसाय में हितबद्ध किसी व्यक्ति से, उनमें से किसी के द्वारा प्रस्तावित किसी पारिश्रमिक के प्रतिफल स्वरूप प्रस्ताव करता है; या
(ग) स्पष्टीकरण (क) या (ख) में उल्लिखित प्रयोजनों के लिये सिविल, दाण्डिक या राजस्व न्यायालयों के अहातों में राजस्व या अन्य कार्यालयों, आवासिक कालोनी या निवास स्थानों या उपर्युक्त स्थानों या रेल या बस स्टेशनों, उतरने के स्थानों, ठहरने के स्थानों के अन्य लोक समागम स्थलों के आस-पास आता-जाता है या
(7) गृह अपग्राही है,
स्पष्टीकरण: गृह अपग्राही का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो किसी भवन का. जिसके अन्तर्गत भवन से सम्बद्ध भूमि, बाग, गैराज या वाह्रयगृह भी है, अप्राधिकृत कब्जा लेता है या लेने का प्रयत्न करता है या उसके लेने में सहायता देता है या उसके लिये दुष्प्रेरित करता है या भवन में विधिपूर्वक प्रवेश करने के उपरान्त उस पर अविधिपूर्वक कब्जा बनायें रखता है।
(8) जो साहूकारी विनियमन अधिनियम, 1976 के अधीन दण्डनीय अपराध में अन्तर्ग्रस्त हो :
(9) जो विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1966 और भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधिन दण्डनीय अपराध में अन्तर्ग्रस्त हो;
(10) गोवध निवारण अधिनियम, 1955 और पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 में उपबन्धों के उल्लंघन में मवेशियों के अवैध परिवहन और/या तस्करी के कार्यों में अन्तर्ग्रस्त हो;
(11) वाणिज्यिक शोषण, बलातश्रम, बंधुआ श्रम, बाल श्रम, यौन शोषण, अंग हटाने तथा दुर्व्यापार, भिक्षावृत्ति और इसी प्रकार के क्रियाकलापों के प्रयोजनों हेतु मानव दुर्व्यापार में अन्तर्ग्रस्त हो ।
(क) 'जिला मजिस्ट्रेट के अन्र्तगत राज्य सरकार द्वारा तदर्थ अधिकृत कोई अपर जिला मजिस्ट्रेट भी है;
(ख) गुण्डा का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है -
(1) जो स्वयं या किसी गिरोह के सदस्य या सरगना के रूप में अभ्यासतः भारतीय दण्ड संहिता की धारा 153 या धारा 153 ख या धारा 294 या उक्त संहिता के अध्याय 15, अध्याय 16, अध्याय 17 या अध्याय 22 के अधीन दण्डनीय अपराध करता है. या करने का प्रयास करता है या करने के लिये दुष्प्रेरित करता है; या
(2) जो स्त्री तथा लड़की अनैतिक व्यापार दमन अधिनियम, 1956 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिये सिद्धदोष ठहराया गया हो; या
(3) जो संयुक्त प्रान्त आबकारी अधिनियम, 1910 या सार्वजनिक द्यूत अधिनियम, 1867 या आयुध अधिनियम, 1959 की धारा 25, धारा 27 या धारा 29 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिये कम से कम तीन बार सिद्धदोष ठहराया गया हो; या
(4) जिसकी सामान्य ख्याती है कि वह दुःसाहसिक और जनसमुदाय के लिये खतरनाक व्यक्ति है; या
(5) जो अभ्यासतः स्त्रियों या लड़कियों के प्रति अशिष्ट उक्ति कहता रहा हो या उनसे छेडखानी करता रहा हो; या।
(6) जो दलाल (टाउट) है;
स्पष्टीकरण- "दलाल का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो-
(क) किसी व्यक्ति को अपने लिये या किसी अन्य व्यक्ति के लिये किसी प्रकार का परितोषण किसी लोक सेवक या सरकार या संसद या राज्य विधान मण्डल के सदस्य को भ्रष्ट या अवैध साधनों द्वारा केन्द्रीय या राज्य सरकार, संसद या राज्य विधान मण्डल, किसी स्थानीय प्राधिकारी, निगम, सरकारी कम्पनी या लोक सेवक से कुछ करने या कुछ करने से प्रविरत रहने या किसी व्यक्ति के प्रति अनुग्रह करने या अनुग्रह न करने या किसी व्यक्ति का उपकार या अपकार करने का प्रयत्न करने को उत्प्रेरित करने के लिये प्रतिग्रहीत करता है या अभिप्राप्त करता है या प्रतिग्रहीत करने को सहमत होता है या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करता है या
(ख) विधि व्यवसाय में हितबद्ध किसी विधि व्यवसायी द्वारा प्रस्तावित किसी पारिश्रमिक के प्रतिफल स्वरूप उस व्यवसाय में किसी विधि व्यवसायी का नियोजन प्राप्त करता है या उसको प्राप्त करने के लिये किसी विधि व्यवसायी से या विधि व्यवसाय में हितबद्ध किसी व्यक्ति से, उनमें से किसी के द्वारा प्रस्तावित किसी पारिश्रमिक के प्रतिफल स्वरूप प्रस्ताव करता है; या
(ग) स्पष्टीकरण (क) या (ख) में उल्लिखित प्रयोजनों के लिये सिविल, दाण्डिक या राजस्व न्यायालयों के अहातों में राजस्व या अन्य कार्यालयों, आवासिक कालोनी या निवास स्थानों या उपर्युक्त स्थानों या रेल या बस स्टेशनों, उतरने के स्थानों, ठहरने के स्थानों के अन्य लोक समागम स्थलों के आस-पास आता-जाता है या
(7) गृह अपग्राही है,
स्पष्टीकरण: गृह अपग्राही का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो किसी भवन का. जिसके अन्तर्गत भवन से सम्बद्ध भूमि, बाग, गैराज या वाह्रयगृह भी है, अप्राधिकृत कब्जा लेता है या लेने का प्रयत्न करता है या उसके लेने में सहायता देता है या उसके लिये दुष्प्रेरित करता है या भवन में विधिपूर्वक प्रवेश करने के उपरान्त उस पर अविधिपूर्वक कब्जा बनायें रखता है।
(8) जो साहूकारी विनियमन अधिनियम, 1976 के अधीन दण्डनीय अपराध में अन्तर्ग्रस्त हो :
(9) जो विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1966 और भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधिन दण्डनीय अपराध में अन्तर्ग्रस्त हो;
(10) गोवध निवारण अधिनियम, 1955 और पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 में उपबन्धों के उल्लंघन में मवेशियों के अवैध परिवहन और/या तस्करी के कार्यों में अन्तर्ग्रस्त हो;
(11) वाणिज्यिक शोषण, बलातश्रम, बंधुआ श्रम, बाल श्रम, यौन शोषण, अंग हटाने तथा दुर्व्यापार, भिक्षावृत्ति और इसी प्रकार के क्रियाकलापों के प्रयोजनों हेतु मानव दुर्व्यापार में अन्तर्ग्रस्त हो ।
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