NCW Act 10अध्याय III · Functions of the Commission
धारा 10 · आयोग के कार्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) आयोग निम्नलिखित में से सभी या कोई भी कार्य करेगा, अर्थात्:--
(क) संविधान और अन्य कानूनों के तहत महिलाओं के लिए प्रदान की गई सुरक्षा व्यवस्थाओं से संबंधित सभी मामलों की जांच और परीक्षण करना;
(ख) केंद्र सरकार को वार्षिक रूप से और आयोग द्वारा उचित समझे जाने वाले अन्य समयों पर उन सुरक्षा उपायों के कामकाज पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना;
(ग) ऐसी रिपोर्टों में संघ या किसी राज्य द्वारा महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिए उन सुरक्षा उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु सिफारिशें करना;
(घ) समय-समय पर संविधान और महिलाओं को प्रभावित करने वाले अन्य कानूनों के मौजूदा प्रावधानों की समीक्षा करना और उनमें संशोधन की सिफारिश करना ताकि ऐसे कानूनों में किसी भी खामी, अपर्याप्तता या खामियों को दूर करने के लिए उपचारात्मक विधायी उपायों का सुझाव दिया जा सके;
(ई) संविधान और महिलाओं से संबंधित अन्य कानूनों के प्रावधानों के उल्लंघन के मामलों को उपयुक्त अधिकारियों के समक्ष उठाना;
(f) शिकायतों की जांच करना और निम्नलिखित मामलों का स्वतः संज्ञान लेना--
(i) महिलाओं के अधिकारों का हनन;
(ii) महिलाओं को संरक्षण प्रदान करने और समानता एवं विकास के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए बनाए गए कानूनों का कार्यान्वयन न होना;
(iii) महिलाओं की कठिनाइयों को कम करने, उनके कल्याण को सुनिश्चित करने और उन्हें राहत प्रदान करने के उद्देश्य से बनाए गए नीतिगत निर्णयों, दिशा-निर्देशों या निर्देशों का अनुपालन न करना।
और ऐसे मामलों से उत्पन्न होने वाले मुद्दों को उचित अधिकारियों के समक्ष उठाना;
(जी) महिलाओं के खिलाफ भेदभाव और अत्याचारों से उत्पन्न होने वाली विशिष्ट समस्याओं या स्थितियों में विशेष अध्ययन या जांच का आह्वान करना और बाधाओं की पहचान करना ताकि उन्हें दूर करने के लिए रणनीतियों की सिफारिश की जा सके;
(h) सभी क्षेत्रों में महिलाओं के उचित प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के तरीके सुझाने और उनकी उन्नति में बाधा डालने वाले कारकों की पहचान करने के लिए प्रचार और शैक्षिक अनुसंधान करना, जैसे कि आवास और बुनियादी सेवाओं तक पहुंच की कमी, श्रमसाध्य और व्यावसायिक स्वास्थ्य खतरों को कम करने और उनकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए अपर्याप्त सहायता सेवाएं और प्रौद्योगिकियां;
(i) महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेना और सलाह देना;
(j) संघ और किसी राज्य के अंतर्गत महिलाओं के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना;
(ख) किसी जेल, सुधार गृह, महिला संस्था या हिरासत के अन्य स्थान का निरीक्षण करना या करवाना जहाँ महिलाओं को कैदी के रूप में या अन्यथा रखा जाता है, और यदि आवश्यक पाया जाए तो उपचारात्मक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों से परामर्श करना;
(एल) महिलाओं के एक बड़े समूह को प्रभावित करने वाले मुद्दों से जुड़े मुकदमेबाजी के लिए धन देना;
(m) महिलाओं से संबंधित किसी भी मामले पर और विशेष रूप से महिलाओं को जिन विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, उन पर सरकार को आवधिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना;
(n) कोई अन्य मामला जो केंद्र सरकार द्वारा इसे संदर्भित किया जा सकता है।
(2) केंद्र सरकार उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट सभी रिपोर्टों को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष एक ज्ञापन के साथ प्रस्तुत करवाएगी, जिसमें संघ से संबंधित सिफारिशों पर की गई या प्रस्तावित कार्रवाई और ऐसी किसी सिफारिश को अस्वीकार किए जाने के कारणों का स्पष्टीकरण दिया जाएगा।
(3) यदि ऐसी कोई रिपोर्ट या उसका कोई भाग किसी ऐसे मामले से संबंधित है जिससे कोई राज्य सरकार संबंधित है, तो आयोग ऐसी रिपोर्ट या उसके भाग की एक प्रति उस राज्य सरकार को भेजेगा, जो उसे राज्य के विधानमंडल के समक्ष एक ज्ञापन के साथ प्रस्तुत करवाएगी, जिसमें राज्य से संबंधित सिफारिशों पर की गई या प्रस्तावित कार्रवाई और ऐसी किसी सिफारिश को अस्वीकार किए जाने के कारणों (यदि कोई हो) का स्पष्टीकरण दिया जाएगा।
(4) उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (च) के उपखंड (i) में निर्दिष्ट किसी मामले की जांच करते समय आयोग को किसी मुकदमे की सुनवाई करने वाले दीवानी न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी, और विशेष रूप से निम्नलिखित मामलों के संबंध में, अर्थात्:--
(क) भारत के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) किसी दस्तावेज की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई सार्वजनिक अभिलेख या उसकी प्रति मंगवाना;
(ई) गवाहों और दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना; और
(f) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
(क) संविधान और अन्य कानूनों के तहत महिलाओं के लिए प्रदान की गई सुरक्षा व्यवस्थाओं से संबंधित सभी मामलों की जांच और परीक्षण करना;
(ख) केंद्र सरकार को वार्षिक रूप से और आयोग द्वारा उचित समझे जाने वाले अन्य समयों पर उन सुरक्षा उपायों के कामकाज पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना;
(ग) ऐसी रिपोर्टों में संघ या किसी राज्य द्वारा महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिए उन सुरक्षा उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु सिफारिशें करना;
(घ) समय-समय पर संविधान और महिलाओं को प्रभावित करने वाले अन्य कानूनों के मौजूदा प्रावधानों की समीक्षा करना और उनमें संशोधन की सिफारिश करना ताकि ऐसे कानूनों में किसी भी खामी, अपर्याप्तता या खामियों को दूर करने के लिए उपचारात्मक विधायी उपायों का सुझाव दिया जा सके;
(ई) संविधान और महिलाओं से संबंधित अन्य कानूनों के प्रावधानों के उल्लंघन के मामलों को उपयुक्त अधिकारियों के समक्ष उठाना;
(f) शिकायतों की जांच करना और निम्नलिखित मामलों का स्वतः संज्ञान लेना--
(i) महिलाओं के अधिकारों का हनन;
(ii) महिलाओं को संरक्षण प्रदान करने और समानता एवं विकास के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए बनाए गए कानूनों का कार्यान्वयन न होना;
(iii) महिलाओं की कठिनाइयों को कम करने, उनके कल्याण को सुनिश्चित करने और उन्हें राहत प्रदान करने के उद्देश्य से बनाए गए नीतिगत निर्णयों, दिशा-निर्देशों या निर्देशों का अनुपालन न करना।
और ऐसे मामलों से उत्पन्न होने वाले मुद्दों को उचित अधिकारियों के समक्ष उठाना;
(जी) महिलाओं के खिलाफ भेदभाव और अत्याचारों से उत्पन्न होने वाली विशिष्ट समस्याओं या स्थितियों में विशेष अध्ययन या जांच का आह्वान करना और बाधाओं की पहचान करना ताकि उन्हें दूर करने के लिए रणनीतियों की सिफारिश की जा सके;
(h) सभी क्षेत्रों में महिलाओं के उचित प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के तरीके सुझाने और उनकी उन्नति में बाधा डालने वाले कारकों की पहचान करने के लिए प्रचार और शैक्षिक अनुसंधान करना, जैसे कि आवास और बुनियादी सेवाओं तक पहुंच की कमी, श्रमसाध्य और व्यावसायिक स्वास्थ्य खतरों को कम करने और उनकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए अपर्याप्त सहायता सेवाएं और प्रौद्योगिकियां;
(i) महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेना और सलाह देना;
(j) संघ और किसी राज्य के अंतर्गत महिलाओं के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना;
(ख) किसी जेल, सुधार गृह, महिला संस्था या हिरासत के अन्य स्थान का निरीक्षण करना या करवाना जहाँ महिलाओं को कैदी के रूप में या अन्यथा रखा जाता है, और यदि आवश्यक पाया जाए तो उपचारात्मक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों से परामर्श करना;
(एल) महिलाओं के एक बड़े समूह को प्रभावित करने वाले मुद्दों से जुड़े मुकदमेबाजी के लिए धन देना;
(m) महिलाओं से संबंधित किसी भी मामले पर और विशेष रूप से महिलाओं को जिन विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, उन पर सरकार को आवधिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना;
(n) कोई अन्य मामला जो केंद्र सरकार द्वारा इसे संदर्भित किया जा सकता है।
(2) केंद्र सरकार उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट सभी रिपोर्टों को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष एक ज्ञापन के साथ प्रस्तुत करवाएगी, जिसमें संघ से संबंधित सिफारिशों पर की गई या प्रस्तावित कार्रवाई और ऐसी किसी सिफारिश को अस्वीकार किए जाने के कारणों का स्पष्टीकरण दिया जाएगा।
(3) यदि ऐसी कोई रिपोर्ट या उसका कोई भाग किसी ऐसे मामले से संबंधित है जिससे कोई राज्य सरकार संबंधित है, तो आयोग ऐसी रिपोर्ट या उसके भाग की एक प्रति उस राज्य सरकार को भेजेगा, जो उसे राज्य के विधानमंडल के समक्ष एक ज्ञापन के साथ प्रस्तुत करवाएगी, जिसमें राज्य से संबंधित सिफारिशों पर की गई या प्रस्तावित कार्रवाई और ऐसी किसी सिफारिश को अस्वीकार किए जाने के कारणों (यदि कोई हो) का स्पष्टीकरण दिया जाएगा।
(4) उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (च) के उपखंड (i) में निर्दिष्ट किसी मामले की जांच करते समय आयोग को किसी मुकदमे की सुनवाई करने वाले दीवानी न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी, और विशेष रूप से निम्नलिखित मामलों के संबंध में, अर्थात्:--
(क) भारत के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) किसी दस्तावेज की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई सार्वजनिक अभिलेख या उसकी प्रति मंगवाना;
(ई) गवाहों और दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना; और
(f) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
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