HMG Act 3
धारा 3 · अधिनियम का अनुप्रयोग।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यह अधिनियम लागू होता है,--
(क) किसी भी ऐसे व्यक्ति को जो किसी भी रूप या विकास में हिंदू धर्म का अनुयायी हो, जिसमें वीरशैव, लिंगायत या ब्रह्म समाज, प्रार्थना समाज या आर्य समाज का अनुयायी शामिल हो;
(ख) किसी ऐसे व्यक्ति को जो धर्म से बौद्ध, जैन या सिख हो, और
(ग) इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में निवास करने वाले किसी अन्य व्यक्ति को, जो धर्म से मुस्लिम, ईसाई, पारसी या यहूदी नहीं है, जब तक कि यह सिद्ध न हो जाए कि यदि यह अधिनियम पारित न हुआ होता तो ऐसे किसी व्यक्ति पर हिंदू कानून या उस कानून के अंतर्गत किसी रीति-रिवाज या प्रथा के तहत इस अधिनियम में वर्णित किसी भी मामले में शासन नहीं किया जाता।
स्पष्टीकरण .--निम्नलिखित व्यक्ति धर्म से हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख हैं, जैसा भी मामला हो:--
(i) कोई भी संतान, चाहे वैध हो या अवैध, जिसके माता-पिता दोनों धर्म से हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख हों;
(ii) कोई भी संतान, चाहे वैध हो या अवैध, जिसके माता-पिता में से एक हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख धर्म का हो और जिसका पालन-पोषण उस जनजाति, समुदाय, समूह या परिवार के सदस्य के रूप में हुआ हो जिससे वह माता-पिता संबंधित हैं या संबंधित थे; और
(iii) कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख धर्म में परिवर्तित हो गया हो या पुनः परिवर्तित हो गया हो।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम में निहित कोई बात संविधान के अनुच्छेद 366 के खंड (25) के अर्थ में किसी अनुसूचित जनजाति के सदस्यों पर लागू नहीं होगी, जब तक कि केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अन्यथा निर्देश न दे।
1 [(2ए) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम में निहित कोई बात पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश के त्यागपत्रों पर लागू नहीं होगी।]
(3) इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान में "हिंदू" अभिव्यक्ति का अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा मानो इसमें वह व्यक्ति भी शामिल हो जो धर्म से हिंदू न होते हुए भी, इस धारा में निहित प्रावधानों के कारण इस अधिनियम के अंतर्गत आता हो।
(क) किसी भी ऐसे व्यक्ति को जो किसी भी रूप या विकास में हिंदू धर्म का अनुयायी हो, जिसमें वीरशैव, लिंगायत या ब्रह्म समाज, प्रार्थना समाज या आर्य समाज का अनुयायी शामिल हो;
(ख) किसी ऐसे व्यक्ति को जो धर्म से बौद्ध, जैन या सिख हो, और
(ग) इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में निवास करने वाले किसी अन्य व्यक्ति को, जो धर्म से मुस्लिम, ईसाई, पारसी या यहूदी नहीं है, जब तक कि यह सिद्ध न हो जाए कि यदि यह अधिनियम पारित न हुआ होता तो ऐसे किसी व्यक्ति पर हिंदू कानून या उस कानून के अंतर्गत किसी रीति-रिवाज या प्रथा के तहत इस अधिनियम में वर्णित किसी भी मामले में शासन नहीं किया जाता।
स्पष्टीकरण .--निम्नलिखित व्यक्ति धर्म से हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख हैं, जैसा भी मामला हो:--
(i) कोई भी संतान, चाहे वैध हो या अवैध, जिसके माता-पिता दोनों धर्म से हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख हों;
(ii) कोई भी संतान, चाहे वैध हो या अवैध, जिसके माता-पिता में से एक हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख धर्म का हो और जिसका पालन-पोषण उस जनजाति, समुदाय, समूह या परिवार के सदस्य के रूप में हुआ हो जिससे वह माता-पिता संबंधित हैं या संबंधित थे; और
(iii) कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख धर्म में परिवर्तित हो गया हो या पुनः परिवर्तित हो गया हो।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम में निहित कोई बात संविधान के अनुच्छेद 366 के खंड (25) के अर्थ में किसी अनुसूचित जनजाति के सदस्यों पर लागू नहीं होगी, जब तक कि केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अन्यथा निर्देश न दे।
1 [(2ए) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम में निहित कोई बात पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश के त्यागपत्रों पर लागू नहीं होगी।]
(3) इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान में "हिंदू" अभिव्यक्ति का अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा मानो इसमें वह व्यक्ति भी शामिल हो जो धर्म से हिंदू न होते हुए भी, इस धारा में निहित प्रावधानों के कारण इस अधिनियम के अंतर्गत आता हो।
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