OZP Act 3
धारा 3 · परिषद का गठन और कार्य
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1)
सरकार अधिसूचना द्वारा प्रत्येक जिले के लिए एक परिषद का गठन कर सकती है।(2)
प्रत्येक परिषद, जिस जिले के लिए गठित की गई है, उसके नाम से एक निगमित निकाय होगी, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और एक सामान्य मुहर होगी, और इस अधिनियम या किसी अन्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन लगाए गए किसी भी प्रतिबंध और योग्यता के अधीन रहते हुए, उसे चल और अचल दोनों प्रकार की संपत्ति प्राप्त करने और धारण करने, अपने द्वारा धारित ऐसी किसी भी संपत्ति को हस्तांतरित करने, अनुबंध करने और इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए आवश्यक, उचित या उपयुक्त समझे जाने वाले अन्य सभी कार्य करने का अधिकार होगा, और वह अपने निगमित नाम से मुकदमा कर सकती है और उस पर मुकदमा किया जा सकता है।(3)
प्रत्येक परिषद को निम्नलिखित अधिकार होंगे:(i)
कृषि, सामाजिक वानिकी, पशुधन, उद्योग, सहकारी आंदोलन, ग्रामीण ऋण, जल आपूर्ति, आवश्यक वस्तुओं का वितरण, ग्रामीण विद्युतीकरण (विद्युत वितरण सहित), लघु सिंचाई, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता (औषधालयों और अस्पतालों की स्थापना सहित), संचार, प्राथमिक, माध्यमिक और वयस्क शिक्षा (कल्याण सहित) और सामान्य जनउपयोगिता के अन्य उद्देश्यों से संबंधित योजनाओं को शुरू करना या उपाय अपनाना;(ii)
[आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करना; [उड़ीसा अधिनियम संख्या 21, 1995 (ओजीई संख्या 1448 दिनांक 21.12.1995) द्वारा प्रतिस्थापित](iii)
सार्वजनिक उपयोगिता के किसी कार्य या उसमें निहित या उसके नियंत्रण एवं प्रबंधन के अधीन किसी संस्था का प्रबंधन या रखरखाव करना;(iv)
जिले के भीतर किसी विद्यालय, सार्वजनिक पुस्तकालय, सार्वजनिक संस्थान या सार्वजनिक कल्याण संगठन को सहायता प्रदान करना;(v)
जिले के बाहर स्थित किसी संस्था के रखरखाव की लागत के लिए ऐसी राशि का योगदान करना, जिस पर सहमति हो, जो जिले के निवासियों के लिए लाभकारी हो और जिसका उपयोग जिले के निवासी नियमित रूप से करते हों;(vi)
तकनीकी या अन्य विशेष प्रकार की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य के भीतर छात्रवृत्ति स्थापित करना या वजीफा देना;(vii)
[* * *] [उड़ीसा अधिनियम संख्या 4, 2001 (ओजीई संख्या 994 दिनांक 28.5.2001) द्वारा हटा दिया गया।](viii)
जिले के भीतर समितियों या ग्राम पंचायतों को अनुदान देना;(ix)
सरकार की स्वीकृति से, जिले के भीतर किसी नगर पालिका या अधिसूचित क्षेत्र परिषद द्वारा किए गए जल आपूर्ति या महामारी-विरोधी उपायों की लागत के लिए ऐसी राशि का योगदान करना, जैसा वह तय करे;(x)
संकट से राहत के लिए उपाय अपनाना;(xi)
जिले में किसी समिति द्वारा तैयार की गई विकास योजनाओं और कार्यक्रमों का समन्वय एवं एकीकरण करना;(xii)
[* * *] [उड़ीसा अधिनियम संख्या 17, 1997 (ओजीई संख्या 1566 दिनांक 22.12.1997) द्वारा हटा दिया गया।](xiii)
जिला योजना तैयार करना, उसे लागू करना और उसकी निगरानी करना, जो निम्नलिखित से संबंधित हो:(क)
जवाहर रोजगार योजना (जेआरवाई) जैसे कार्यक्रमों की निगरानी और पर्यवेक्षण, जिनका प्रत्यक्ष कार्यान्वयन ग्राम पंचायत और पंचायत समितियों द्वारा किया जाना है;(ख)
गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों का कार्यान्वयन और उनकी निगरानी;(ग)
समय-समय पर जिला ग्रामीण विकास एजेंसियों को सौंपे गए उत्तरदायित्वों और कार्यों का निर्वहन; और(घ)
अप्रतिबंधित निधियों का वितरण;(4)
किसी अन्य कानून में इसके विपरीत कोई प्रावधान होते हुए भी, इस अधिनियम के अंतर्गत अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक निष्पादित करने के उद्देश्य से, प्रत्येक परिषद अपने अधिकार क्षेत्र की सीमा के भीतर-(क)
ऐसे आंकड़े एकत्र करना जिन्हें वह आवश्यक समझे;(ख)
जिले में ग्राम पंचायतों और समितियों की विकास गतिविधियों के नियमन के विभिन्न पहलुओं से संबंधित आंकड़े या अन्य जानकारी प्रकाशित करना;(ग)
किसी ग्राम पंचायत या समिति से ऐसी जानकारी उपलब्ध कराने की अपेक्षा करना, जो उस ग्राम पंचायत या समिति द्वारा अपने विकासात्मक कार्यों के नियमन के लिए किए गए उपायों और ऐसे अन्य मामलों के संबंध में अपेक्षित हो, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।(5)
परिषद के प्रत्येक गैर-सरकारी सदस्य को, निर्धारित प्रतिबंधों के अधीन रहते हुए, परिषद के अधिकार क्षेत्र में स्थित प्राथमिक शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और औषधालयों, कृषि फार्मों और पशु चिकित्सा औषधालयों तथा अस्पतालों का निरीक्षण और पर्यवेक्षण करने का अधिकार होगा और वह अपनी रिपोर्ट और सुझाव परिषद को प्रस्तुत करेगा, जिसकी जांच करने के बाद परिषद सरकार को अपनाई जाने वाली कार्रवाई के संबंध में सलाह देगी।(6)
[इस अधिनियम या किसी अन्य कानून में इस समय लागू किसी भी विपरीत बात के होते हुए भी, अनुसूचित क्षेत्रों में,-(क)
उड़ीसा जिला परिषद (संशोधन) अधिनियम, 1997 के प्रारंभ होने के बाद किसी भी कानून के तहत लघु खनिजों के लिए कोई पूर्व-अनुमान लाइसेंस या खनन पट्टा या नीलामी द्वारा लघु खनिजों के दोहन के लिए कोई रियायत परिषद की पूर्व अनुशंसा के बिना प्रदान नहीं की जाएगी;(ख)
विकास परियोजनाओं के लिए तथा ऐसी परियोजनाओं से प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास या पुनर्स्थापन के लिए भूमि अधिग्रहण परिषद से पूर्व परामर्श किए बिना किसी भी कानून के तहत नहीं किया जाएगा; और(ग)
परिषद लघु जल निकायों की योजना बनाएगी और उनका प्रबंधन करेगी।]इस धारा पर आपका निजी नोट
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