OCHPFL Rules 14
धारा 14 · धारा 7 की उपधारा (3) के अधीन किराए का निपटान
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
धारा 7 की उपधारा (3) के तहत किराए का निपटान।
(1)
किसी भी समेकन क्षेत्र में स्थित भूमि के संबंध में बंदोबस्त करने से पहले, सहायक समेकन अधिकारी निम्नलिखित कारकों को ध्यान में रखते हुए ऐसे क्षेत्र के गांवों को विभिन्न वर्गों में समूहित कर सकता है, अर्थात्:(i)
गांव की स्थिति;(ii)
संचार एवं विपणन सुविधाएं;(iii)
जंगली जानवरों द्वारा लूटपाट; और(iv)
मौसम के उतार-चढ़ाव के प्रति उत्तरदायित्व।(2)
सहायक समेकन अधिकारी गांवों में भूमि को जितने अलग-अलग वर्गों में उचित समझे उतने में समूहित करेगा और निम्नलिखित कारकों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक भूखंड को ऐसे किसी एक वर्ग में आवंटित करेगा, अर्थात्:(i)
भूमि पर सामान्यतः उगाई जाने वाली फसल या फसलें;(ii)
मिट्टी की प्रकृति;(iii)
गांव में भूमि की स्थिति; और(iv)
सिंचाई के स्रोत।(3)
धारा 7 की उपधारा (3) के खंड (ii) के अधीन प्रावधान के अनुसार किराया बंदोबस्त के प्रयोजन से भूमि पर सामान्यतः उगाई जाने वाली फसल या फसलों पर विचार करते समय सहायक समेकन अधिकारी निम्नलिखित कारकों को ध्यान में रखेगा, अर्थात्:(i)
एक वर्ष के दौरान उगाई जा सकने वाली फसल या फसलों का प्रकार और मात्रा;(ii)
एक वर्ष में उगाई जाने वाली फसलों की संख्या;(iii)
उचित परिश्रम और उचित साधनों द्वारा भूमि से प्राप्त किया जा सकने वाला लाभ।(4)
सहायक समेकन अधिकारी किसी भूमि की स्थिति और मिट्टी की प्रकृति पर विचार करते समय निम्नलिखित कारकों को ध्यान में रखेगा, अर्थात्:(i)
प्रवाह या उत्थापन द्वारा सिंचाई की उपलब्धता;(ii)
बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ के प्रति उत्तरदायित्व या उससे सुरक्षा;(iii)
लवणता;(iv)
गाद जमाव;(v)
भूमि की सामान्य उर्वरता; और(vi)
भूमि की उत्पादकता पर प्रभाव डालने वाले कोई अन्य लाभ या हानि।(5)
(क)
धारा 7 की उपधारा (3) के द्वितीय परंतुक में निहित प्रतिबंधों के अधीन रहते हुए, सहायक समेकन अधिकारी उपरोक्त नियम के प्रावधानों के अनुसार और उक्त उपधारा में निर्दिष्ट कारकों के आलोक में, प्रत्येक भूस्वामी या भूमि में संयुक्त रूप से हितधारक भूस्वामियों के संबंध में उचित और न्यायसंगत किराया तय करेगा, यदि वे किराया दिए बिना ऐसा हित धारण करने के हकदार नहीं हैं।(ख)
उपरोक्त खंड (क) के अधीन निर्धारित या निर्धारित माना जाने वाला किराया, अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार किए गए किसी भी संशोधन के अधीन रहते हुए, भूमि के लिए देय किराया माना जाएगा, और उक्त किराया धारा 6 की उपधारा (2) के खंड (ख) के अधीन तैयार किए गए भूमि रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।(ग)
समेकन के बाद भूमि स्वामी द्वारा अपनी जोत के संबंध में देय किराया, समेकन से पहले उसकी जोत के संबंध में देय किराए के बराबर होगा, बशर्ते धारा 21 के तहत कोई कटौती की गई हो।(घ)
जब इस नियम के अधीन किराया तय किया जाता है या तय कराया जाता है, तो यह धारा 22 की उपधारा (2) के तहत अंतिम समेकन योजना के लागू होने की तिथि के बाद अगले कृषि वर्ष के प्रारंभ से प्रभावी होगा, जब तक कि सरकार आदेश द्वारा इस उद्देश्य के लिए कोई अन्य तिथि निर्धारित न करे।इस धारा पर आपका निजी नोट
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