HSCNSC Act 29अध्याय VIII · Revision and Appeals
धारा 29 · अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) न्यायनिर्णय प्राधिकारी के किसी आदेश से पीड़ित कोई कर योग्य व्यक्ति, अपील किए गए आदेश की प्राप्ति की तिथि से तीन माह की अवधि के भीतर, बोर्ड के आदेश द्वारा इस संबंध में अधिकृत आयुक्त के पद से नीचे के किसी भी अपीलीय प्राधिकारी को, निर्धारित प्रपत्र और तरीके से अपील कर सकता है।
(2) आयुक्त से कम रैंक का उचित अधिकारी, अपनी स्वयं की पहल पर, किसी भी कार्यवाही का अभिलेख मंगवाकर उसकी जांच कर सकता है जिसमें किसी निर्णय प्राधिकारी ने इस अधिनियम के अंतर्गत कोई आदेश पारित किया हो, ताकि वह ऐसे आदेश की वैधता या औचित्य से स्वयं संतुष्ट हो सके और वह आदेश द्वारा अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को यह निर्देश दे सकता है कि वह निर्णय प्राधिकारी के आदेश की सूचना मिलने की तिथि से छह माह के भीतर अपीलीय प्राधिकारी को उक्त निर्णय या आदेश से उत्पन्न होने वाले ऐसे बिंदुओं के निर्धारण के लिए आवेदन करे, जो उचित अधिकारी द्वारा अपने आदेश में निर्दिष्ट किए गए हों।
(3) जहां उपधारा ( 2 ) के तहत किसी आदेश के अनुसरण में, अधिकृत अधिकारी अपीलीय प्राधिकारी को आवेदन करता है, तो अपीलीय प्राधिकारी ऐसे आवेदन पर इस प्रकार विचार करेगा मानो वह निर्णय प्राधिकारी के निर्णय या आदेश के विरुद्ध की गई अपील हो और ऐसा अधिकृत अधिकारी अपीलकर्ता हो, और इस अधिनियम के अपील संबंधी प्रावधान ऐसे आवेदन पर लागू होंगे।
(4) इस धारा के अंतर्गत प्रत्येक अपील का सत्यापन ऐसे तरीके से किया जाएगा, जैसा कि निर्धारित किया जा सके।
(5) उपधारा ( 1 ) के अंतर्गत कोई अपील तब तक दायर नहीं की जाएगी, जब तक कि अपीलकर्ता ने भुगतान न कर दिया हो---
(क) विवादित आदेश से उत्पन्न उपकर, ब्याज, जुर्माना, शुल्क और दंड की राशि का वह भाग, जिसे उसने स्वीकार किया है, पूर्ण रूप से; और
(ख) उक्त आदेश से उत्पन्न विवादित उपकर की शेष राशि के दस प्रतिशत के बराबर राशि, जो अधिकतम पच्चीस करोड़ रुपये तक सीमित है, जिसके संबंध में अपील दायर की गई है।
(6) जहां अपीलकर्ता ने उपधारा ( 5 ) के तहत राशि का भुगतान कर दिया है, वहां शेष राशि की वसूली की कार्यवाही स्थगित मानी जाएगी।
(7) अपीलीय प्राधिकारी अपीलकर्ता को सुनवाई का उचित अवसर देगा।
(8) अपीलीय प्राधिकारी, यदि अपील की सुनवाई के किसी भी चरण में पर्याप्त कारण बताया जाए, तो पक्षकारों या उनमें से किसी को समय दे सकता है और लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों से अपील की सुनवाई स्थगित कर सकता है।
(9) इस धारा के तहत किसी अपील की प्राप्ति के बाद, अपीलीय प्राधिकारी अपीलकर्ता को मामले में सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद और आवश्यक आगे की जांच करने के बाद, अपील किए गए आदेश की पुष्टि, संशोधन या निरस्त करने के लिए ऐसा आदेश पारित करेगा, जैसा वह उचित और न्यायसंगत समझे, लेकिन मामले को उक्त आदेश पारित करने वाले निर्णयकर्ता प्राधिकारी को वापस नहीं भेजेगा।
(10) अपीलीय प्राधिकारी द्वारा अपील का निपटारा करने का आदेश लिखित में होगा तथा उसमें निर्धारण के बिंदु, उस पर निर्णय तथा ऐसे निर्णय के कारण बताए जाएंगे।
(11) अपीलीय प्राधिकारी, जहाँ संभव हो, प्रत्येक अपील को दाखिल करने की तिथि से छह माह की अवधि के भीतर सुनेगा और निर्णय करेगा।
(2) आयुक्त से कम रैंक का उचित अधिकारी, अपनी स्वयं की पहल पर, किसी भी कार्यवाही का अभिलेख मंगवाकर उसकी जांच कर सकता है जिसमें किसी निर्णय प्राधिकारी ने इस अधिनियम के अंतर्गत कोई आदेश पारित किया हो, ताकि वह ऐसे आदेश की वैधता या औचित्य से स्वयं संतुष्ट हो सके और वह आदेश द्वारा अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को यह निर्देश दे सकता है कि वह निर्णय प्राधिकारी के आदेश की सूचना मिलने की तिथि से छह माह के भीतर अपीलीय प्राधिकारी को उक्त निर्णय या आदेश से उत्पन्न होने वाले ऐसे बिंदुओं के निर्धारण के लिए आवेदन करे, जो उचित अधिकारी द्वारा अपने आदेश में निर्दिष्ट किए गए हों।
(3) जहां उपधारा ( 2 ) के तहत किसी आदेश के अनुसरण में, अधिकृत अधिकारी अपीलीय प्राधिकारी को आवेदन करता है, तो अपीलीय प्राधिकारी ऐसे आवेदन पर इस प्रकार विचार करेगा मानो वह निर्णय प्राधिकारी के निर्णय या आदेश के विरुद्ध की गई अपील हो और ऐसा अधिकृत अधिकारी अपीलकर्ता हो, और इस अधिनियम के अपील संबंधी प्रावधान ऐसे आवेदन पर लागू होंगे।
(4) इस धारा के अंतर्गत प्रत्येक अपील का सत्यापन ऐसे तरीके से किया जाएगा, जैसा कि निर्धारित किया जा सके।
(5) उपधारा ( 1 ) के अंतर्गत कोई अपील तब तक दायर नहीं की जाएगी, जब तक कि अपीलकर्ता ने भुगतान न कर दिया हो---
(क) विवादित आदेश से उत्पन्न उपकर, ब्याज, जुर्माना, शुल्क और दंड की राशि का वह भाग, जिसे उसने स्वीकार किया है, पूर्ण रूप से; और
(ख) उक्त आदेश से उत्पन्न विवादित उपकर की शेष राशि के दस प्रतिशत के बराबर राशि, जो अधिकतम पच्चीस करोड़ रुपये तक सीमित है, जिसके संबंध में अपील दायर की गई है।
(6) जहां अपीलकर्ता ने उपधारा ( 5 ) के तहत राशि का भुगतान कर दिया है, वहां शेष राशि की वसूली की कार्यवाही स्थगित मानी जाएगी।
(7) अपीलीय प्राधिकारी अपीलकर्ता को सुनवाई का उचित अवसर देगा।
(8) अपीलीय प्राधिकारी, यदि अपील की सुनवाई के किसी भी चरण में पर्याप्त कारण बताया जाए, तो पक्षकारों या उनमें से किसी को समय दे सकता है और लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों से अपील की सुनवाई स्थगित कर सकता है।
(9) इस धारा के तहत किसी अपील की प्राप्ति के बाद, अपीलीय प्राधिकारी अपीलकर्ता को मामले में सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद और आवश्यक आगे की जांच करने के बाद, अपील किए गए आदेश की पुष्टि, संशोधन या निरस्त करने के लिए ऐसा आदेश पारित करेगा, जैसा वह उचित और न्यायसंगत समझे, लेकिन मामले को उक्त आदेश पारित करने वाले निर्णयकर्ता प्राधिकारी को वापस नहीं भेजेगा।
(10) अपीलीय प्राधिकारी द्वारा अपील का निपटारा करने का आदेश लिखित में होगा तथा उसमें निर्धारण के बिंदु, उस पर निर्णय तथा ऐसे निर्णय के कारण बताए जाएंगे।
(11) अपीलीय प्राधिकारी, जहाँ संभव हो, प्रत्येक अपील को दाखिल करने की तिथि से छह माह की अवधि के भीतर सुनेगा और निर्णय करेगा।
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