पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 304A अब BNS धारा 106 है
लापरवाही से मृत्यु का कारण बनना।
पुराना कानून
IPC §304A
लापरवाही से मृत्यु का कारण बनना।
1 [304ए. लापरवाही से मृत्यु का कारण बनना। --जो कोई भी किसी ऐसे जल्दबाजी या लापरवाहीपूर्ण कार्य को करके किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।]
राज्य संशोधन
हिमाचल प्रदेश।
भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 304 ए के बाद, हिमाचल प्रदेश राज्य पर इसके लागू होने के संबंध में, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्:
304-एए. सार्वजनिक सेवा वाहन चलाते समय नशे की हालत में मृत्यु या चोट पहुंचाना।--जो कोई भी नशे की हालत में सार्वजनिक सेवा वाहन चलाता है या चलाने का प्रयास करता है और किसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता है, या ऐसी शारीरिक चोट पहुंचाता है जिससे मृत्यु होने की संभावना हो, उसे आजीवन कारावास या किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, मानो जिस कृत्य से मृत्यु या शारीरिक चोट हुई है, वह इस ज्ञान के साथ किया गया हो कि ऐसे कृत्य से मृत्यु होने या ऐसी शारीरिक चोट लगने की संभावना है जिससे मृत्यु होने की संभावना हो।
स्पष्टीकरण । -- "सार्वजनिक सेवा वाहन" से तात्पर्य किसी भी मोटर वाहन से है जिसका उपयोग यात्रियों को किराए या पुरस्कार के बदले ले जाने के लिए किया जाता है या किया जा सकता है, और इसमें मैक्सिकैब, मोटरकैब, अनुबंधित वाहन और स्टेज कैरिज शामिल हैं।
[हिमाचल प्रदेश अधिनियम 19, 1997, धारा 2 देखें]।
भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 304-एए में, हिमाचल प्रदेश राज्य पर इसके लागू होने के संबंध में, --
(क) जहां कहीं भी “सार्वजनिक सेवा वाहन” शब्द आते हैं, उनके स्थान पर “कोई वाहन” शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे; और
(ख) स्पष्टीकरण को हटा दिया जाएगा।
[हिमाचल प्रदेश अधिनियम 7 ऑफ 2012, धारा 2 देखें ]।
पूरा पढ़ें: IPC §304Aराज्य संशोधन
हिमाचल प्रदेश।
भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 304 ए के बाद, हिमाचल प्रदेश राज्य पर इसके लागू होने के संबंध में, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्:
304-एए. सार्वजनिक सेवा वाहन चलाते समय नशे की हालत में मृत्यु या चोट पहुंचाना।--जो कोई भी नशे की हालत में सार्वजनिक सेवा वाहन चलाता है या चलाने का प्रयास करता है और किसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता है, या ऐसी शारीरिक चोट पहुंचाता है जिससे मृत्यु होने की संभावना हो, उसे आजीवन कारावास या किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, मानो जिस कृत्य से मृत्यु या शारीरिक चोट हुई है, वह इस ज्ञान के साथ किया गया हो कि ऐसे कृत्य से मृत्यु होने या ऐसी शारीरिक चोट लगने की संभावना है जिससे मृत्यु होने की संभावना हो।
स्पष्टीकरण । -- "सार्वजनिक सेवा वाहन" से तात्पर्य किसी भी मोटर वाहन से है जिसका उपयोग यात्रियों को किराए या पुरस्कार के बदले ले जाने के लिए किया जाता है या किया जा सकता है, और इसमें मैक्सिकैब, मोटरकैब, अनुबंधित वाहन और स्टेज कैरिज शामिल हैं।
[हिमाचल प्रदेश अधिनियम 19, 1997, धारा 2 देखें]।
भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 304-एए में, हिमाचल प्रदेश राज्य पर इसके लागू होने के संबंध में, --
(क) जहां कहीं भी “सार्वजनिक सेवा वाहन” शब्द आते हैं, उनके स्थान पर “कोई वाहन” शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे; और
(ख) स्पष्टीकरण को हटा दिया जाएगा।
[हिमाचल प्रदेश अधिनियम 7 ऑफ 2012, धारा 2 देखें ]।
नया कानून
BNS §106
लापरवाही से मृत्यु का कारण बनना।
(1) जो कोई भी लापरवाही या असावधानी से किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है, जो जानबूझकर हत्या न हो, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से पांच वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा; और यदि ऐसा कार्य किसी पंजीकृत चिकित्सक द्वारा चिकित्सा प्रक्रिया करते समय किया जाता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
स्पष्टीकरण.—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, “पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी” से तात्पर्य ऐसे चिकित्सा व्यवसायी से है जिसके पास राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 (30 ऑफ 2019) के तहत मान्यता प्राप्त कोई चिकित्सा योग्यता हो और जिसका नाम उस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर या राज्य चिकित्सा रजिस्टर में दर्ज हो।
(2) जो कोई भी वाहन की लापरवाही और लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है, जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता है, और घटना के तुरंत बाद किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना दिए बिना भाग जाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि दस वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ें: BNS §106स्पष्टीकरण.—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, “पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी” से तात्पर्य ऐसे चिकित्सा व्यवसायी से है जिसके पास राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 (30 ऑफ 2019) के तहत मान्यता प्राप्त कोई चिकित्सा योग्यता हो और जिसका नाम उस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर या राज्य चिकित्सा रजिस्टर में दर्ज हो।
(2) जो कोई भी वाहन की लापरवाही और लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है, जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता है, और घटना के तुरंत बाद किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना दिए बिना भाग जाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि दस वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
