पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 298 अब BNS धारा 302 है
धारा 298 - धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि
पुराना कानून
IPC §298
धारा 298 - धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि
जो कोई किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से उसकी श्रवणगोचरता में कोई शब्द उच्चारित करेगा या कोई ध्वनि करेगा या उसकी दृष्टिगोचरता में कोई अंगविक्षेप करेगा, या कोई वस्तु रखेगा,वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ें: IPC §298जो कोई किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से उसकी श्रवणगोचरता में कोई शब्द उच्चारित करेगा या कोई ध्वनि करेगा या उसकी दृष्टिगोचरता में कोई अंगविक्षेप करेगा, या कोई वस्तु रखेगा,वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
नया कानून
BNS §302
किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द आदि बोलना।
जो कोई भी जानबूझकर किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस व्यक्ति के श्रवण क्षेत्र में कोई शब्द बोलता है या कोई ध्वनि उत्पन्न करता है या उस व्यक्ति की दृष्टि में कोई इशारा करता है या उस व्यक्ति की दृष्टि में कोई वस्तु रखता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ें: BNS §3021 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
