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धारा 295 - किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना
किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना जो कोई किसी उपासना स्थान को या व्यक्तियों के किसी वर्ग द्वारा पवित्र मानी गई किसी वस्तु को नष्ट, नुकसानग्रस्त या अपवित्र इस आशय से करेगा कि किसी वर्ग के धर्म का तद्द्वारा अपमान किया जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि व्यक्तियों…
पूरा पढ़ेंकिसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना।
जो कोई भी किसी पूजा स्थल या किसी भी वर्ग के लोगों द्वारा पवित्र माने जाने वाली किसी वस्तु को किसी भी वर्ग के लोगों के धर्म का अपमान करने के इरादे से या इस ज्ञान के साथ नष्ट करता है, क्षति पहुँचाता है या अपवित्र करता है कि किसी भी वर्ग के लोग ऐसे विनाश, क्षति या अपवित्रता को अपने धर्म का अपमान मानेंगे, तो उसे किसी भी…
पूरा पढ़ेंधारा 298 - धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि जो कोई किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से उसकी श्रवणगोचरता में कोई शब्द उच्चारित करेगा या कोई ध्वनि करेगा या उसकी दृष्टिगोचरता में कोई अंगविक्षेप करेगा, या कोई वस्तु रखेगा,वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से,…
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द आदि बोलना।
जो कोई भी जानबूझकर किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस व्यक्ति के श्रवण क्षेत्र में कोई शब्द बोलता है या कोई ध्वनि उत्पन्न करता है या उस व्यक्ति की दृष्टि में कोई इशारा करता है या उस व्यक्ति की दृष्टि में कोई वस्तु रखता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या…
पूरा पढ़ें- IPC §295BNS §298
धारा 295 - किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना
किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना।
- IPC §298BNS §302
धारा 298 - धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि
किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द आदि बोलना।
