पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 188 अब BNS धारा 223 है
धारा 188 - लोक सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा
पुराना कानून
IPC §188
धारा 188 - लोक सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा
लोक सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा
जो कोई यह जानते हुए कि वह ऐसे लोक सेवक द्वारा प्रख्यापित किसी आदेश से, जो ऐसे आदेश को प्रख्यापित करने के लिए विधिपूर्वक सशक्त है, कोई कार्य करने से विरत रहने के लिए या अपने कब्जे में की, या अपने प्रबन्धाधीन, किसी संपत्ति के बारे में कोई विशेष व्यवस्था करने के लिए निर्दिष्ट किया गया है, ऐसे निदेश की अवज्ञा करेगा ;
यदि ऐसी अवज्ञा विधिपूर्वक नियोजित किन्हीं व्यक्तियों को बाधा, क्षोभ या क्षति, अथवा बाधा, क्षोभ या क्षति की जोखिम कारित करे, या कारित करने की प्रवॄत्ति रखती हो, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दौ सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
और यदि ऐसी अवज्ञा मानव जीवन, स्वास्थ्य या क्षेम को संकट कारित करे, या कारित करने की प्रवॄत्ति रखती हो, या बल्वा या दंगा कारित करती हो, या कारित करने की प्रवॄत्ति रखती हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण - यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी का आशय अपहानि उत्पन्न करने का हो या उसके ध्यान में यह हो कि उसकी अवज्ञा करने से अपहानि होना संभाव्य है । यह पर्याप्त है कि जिस आदेश की वह अवज्ञा करता है, उस आदेश का उसे ज्ञान है, और यह भी ज्ञान है कि उसके अवज्ञा करने से अपहानि उत्पन्न होती या होनी संभाव्य है ।
दृष्टांत :
एक आदेश, जिसमें यह निदेश है कि अमुक धार्मिक जुलूस अमुक सड़क से होकर न निकले, ऐसे लोक सेवक द्वारा प्रख्यापित किया जाता है, जो ऐसा आदेश प्रख्यापित करने के लिए विधिपूर्वक सशक्त है । क जानते हुए उस आदेश की अवज्ञा करता है, और तद्द्वारा बल्वे का संकट कारित करता है । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
पूरा पढ़ें: IPC §188जो कोई यह जानते हुए कि वह ऐसे लोक सेवक द्वारा प्रख्यापित किसी आदेश से, जो ऐसे आदेश को प्रख्यापित करने के लिए विधिपूर्वक सशक्त है, कोई कार्य करने से विरत रहने के लिए या अपने कब्जे में की, या अपने प्रबन्धाधीन, किसी संपत्ति के बारे में कोई विशेष व्यवस्था करने के लिए निर्दिष्ट किया गया है, ऐसे निदेश की अवज्ञा करेगा ;
यदि ऐसी अवज्ञा विधिपूर्वक नियोजित किन्हीं व्यक्तियों को बाधा, क्षोभ या क्षति, अथवा बाधा, क्षोभ या क्षति की जोखिम कारित करे, या कारित करने की प्रवॄत्ति रखती हो, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दौ सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
और यदि ऐसी अवज्ञा मानव जीवन, स्वास्थ्य या क्षेम को संकट कारित करे, या कारित करने की प्रवॄत्ति रखती हो, या बल्वा या दंगा कारित करती हो, या कारित करने की प्रवॄत्ति रखती हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण - यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी का आशय अपहानि उत्पन्न करने का हो या उसके ध्यान में यह हो कि उसकी अवज्ञा करने से अपहानि होना संभाव्य है । यह पर्याप्त है कि जिस आदेश की वह अवज्ञा करता है, उस आदेश का उसे ज्ञान है, और यह भी ज्ञान है कि उसके अवज्ञा करने से अपहानि उत्पन्न होती या होनी संभाव्य है ।
दृष्टांत :
एक आदेश, जिसमें यह निदेश है कि अमुक धार्मिक जुलूस अमुक सड़क से होकर न निकले, ऐसे लोक सेवक द्वारा प्रख्यापित किया जाता है, जो ऐसा आदेश प्रख्यापित करने के लिए विधिपूर्वक सशक्त है । क जानते हुए उस आदेश की अवज्ञा करता है, और तद्द्वारा बल्वे का संकट कारित करता है । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
नया कानून
BNS §223
लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी किए गए आदेश की अवज्ञा करना।
जो कोई भी, यह जानते हुए कि किसी लोक सेवक द्वारा, जिसे ऐसा आदेश जारी करने का विधिवत अधिकार प्राप्त है, जारी किए गए आदेश के द्वारा उसे किसी विशिष्ट कार्य से परहेज करने या अपने कब्जे में या अपने प्रबंधन के अधीन किसी विशिष्ट संपत्ति के संबंध में कोई विशिष्ट आदेश लेने का निर्देश दिया गया है, ऐसे निर्देश का उल्लंघन करता है,—
(क) यदि ऐसी अवज्ञा से किसी वैध रूप से नियोजित व्यक्ति को बाधा, असुविधा या चोट लगती है या बाधा, असुविधा या चोट लगने का खतरा होता है, तो उसे छह महीने तक के साधारण कारावास या दो हजार पांच सौ रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा;
(ख) और जहाँ ऐसी अवज्ञा मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा पैदा करती है या पैदा करने की प्रवृत्ति रखती है, या दंगा या झड़प का कारण बनती है या पैदा करने की प्रवृत्ति रखती है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या पाँच हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण. —यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी का इरादा हानि पहुँचाने का हो, या वह अपने अवज्ञा को हानि उत्पन्न करने की संभावना के रूप में देखता हो। यह पर्याप्त है कि वह उस आदेश की जानकारी रखता हो जिसका वह उल्लंघन कर रहा है, और यह कि उसकी अवज्ञा हानि उत्पन्न करती है, या हानि उत्पन्न करने की संभावना रखती है।
चित्रण .
किसी लोक सेवक द्वारा, जिसे ऐसा आदेश जारी करने का विधिवत अधिकार प्राप्त है, यह आदेश जारी किया जाता है कि कोई धार्मिक जुलूस किसी निश्चित सड़क से न गुजरे। कोई व्यक्ति जानबूझकर इस आदेश का उल्लंघन करता है और इस प्रकार दंगे का खतरा पैदा करता है। उसने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
पूरा पढ़ें: BNS §223(क) यदि ऐसी अवज्ञा से किसी वैध रूप से नियोजित व्यक्ति को बाधा, असुविधा या चोट लगती है या बाधा, असुविधा या चोट लगने का खतरा होता है, तो उसे छह महीने तक के साधारण कारावास या दो हजार पांच सौ रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा;
(ख) और जहाँ ऐसी अवज्ञा मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा पैदा करती है या पैदा करने की प्रवृत्ति रखती है, या दंगा या झड़प का कारण बनती है या पैदा करने की प्रवृत्ति रखती है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या पाँच हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण. —यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी का इरादा हानि पहुँचाने का हो, या वह अपने अवज्ञा को हानि उत्पन्न करने की संभावना के रूप में देखता हो। यह पर्याप्त है कि वह उस आदेश की जानकारी रखता हो जिसका वह उल्लंघन कर रहा है, और यह कि उसकी अवज्ञा हानि उत्पन्न करती है, या हानि उत्पन्न करने की संभावना रखती है।
चित्रण .
किसी लोक सेवक द्वारा, जिसे ऐसा आदेश जारी करने का विधिवत अधिकार प्राप्त है, यह आदेश जारी किया जाता है कि कोई धार्मिक जुलूस किसी निश्चित सड़क से न गुजरे। कोई व्यक्ति जानबूझकर इस आदेश का उल्लंघन करता है और इस प्रकार दंगे का खतरा पैदा करता है। उसने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
