पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 130 अब BNS धारा 158 है
धारा 130 - ऐसे कैदी के निकल भागने में सहायता देना, उसे छुड़ाना या संश्रय देना
पुराना कानून
IPC §130
धारा 130 - ऐसे कैदी के निकल भागने में सहायता देना, उसे छुड़ाना या संश्रय देना
ऐसे कैदी के निकल भागने में सहायता देना, उसे छुड़ाना या संश्रय देना
जो कोई जानते हुए किसी राजकैदी या युद्धकैदी को विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागने में मदद या सहायता देगा, या किसी ऐसे कैदी को छुड़ाएगा, या छुड़ाने का प्रयत्न करेगा, या किसी ऐसे कैदी को, जो विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागा है, संश्रय देगा या छिपाएगा या ऐसे कैदी के फिर से पकड़े जाने का प्रतिरोध करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
स्पष्टीकरण - कोई राजकैदी या युद्धकैदी, जिसे अपने पैरोल पर भारत में कतिपय सीमाओं के भीतर, यथेच्छ विचरण की अनुज्ञा है, विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागा है, यह तब कहा जाता है, जब वह उन सीमाओं से परे चला जाता है, जिनके भीतर उसे यथेच्छ विचरण की अनुज्ञा है ।
पूरा पढ़ें: IPC §130जो कोई जानते हुए किसी राजकैदी या युद्धकैदी को विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागने में मदद या सहायता देगा, या किसी ऐसे कैदी को छुड़ाएगा, या छुड़ाने का प्रयत्न करेगा, या किसी ऐसे कैदी को, जो विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागा है, संश्रय देगा या छिपाएगा या ऐसे कैदी के फिर से पकड़े जाने का प्रतिरोध करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
स्पष्टीकरण - कोई राजकैदी या युद्धकैदी, जिसे अपने पैरोल पर भारत में कतिपय सीमाओं के भीतर, यथेच्छ विचरण की अनुज्ञा है, विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागा है, यह तब कहा जाता है, जब वह उन सीमाओं से परे चला जाता है, जिनके भीतर उसे यथेच्छ विचरण की अनुज्ञा है ।
नया कानून
BNS §158
ऐसे कैदी को भागने में सहायता करना, उसे बचाना या उसे शरण देना।
जो कोई भी जानबूझकर किसी राजकीय कैदी या युद्धबंदी को वैध हिरासत से भागने में सहायता करता है या सहायता प्रदान करता है, या ऐसे किसी कैदी को छुड़ाता है या छुड़ाने का प्रयास करता है, या वैध हिरासत से भागे हुए किसी कैदी को शरण देता है या छुपाता है, या ऐसे कैदी को पुनः पकड़ने में किसी प्रकार का प्रतिरोध करता है या करने का प्रयास करता है, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
स्पष्टीकरण.—भारत में किसी राज्य बंदी या युद्धबंदी को, जिसे पैरोल पर कुछ निश्चित सीमाओं के भीतर घूमने की अनुमति दी गई है, यदि वह उन सीमाओं से बाहर चला जाता है जिनके भीतर उसे घूमने की अनुमति है, तो उसे वैध हिरासत से भागने वाला माना जाता है।
पूरा पढ़ें: BNS §158स्पष्टीकरण.—भारत में किसी राज्य बंदी या युद्धबंदी को, जिसे पैरोल पर कुछ निश्चित सीमाओं के भीतर घूमने की अनुमति दी गई है, यदि वह उन सीमाओं से बाहर चला जाता है जिनके भीतर उसे घूमने की अनुमति है, तो उसे वैध हिरासत से भागने वाला माना जाता है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
