पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 105 अब BNS धारा 43 है
धारा 105 - संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना
पुराना कानून
IPC §105
धारा 105 - संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना
संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना
संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार तब प्रारंभ होता है, जब संपत्ति के संकट की युक्तियुक्त आशंका प्रारंभ होती है ।
संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार, चोरी के विरुद्ध अपराधी के संपत्ति सहित पहुंच से बाहर हो जाने तक अथवा या तो लोक प्राधिकार्यो की सहायता अभिप्राप्त कर लेने या संपत्ति प्रत्युध्रुत हो जाने तक बना रहता है ।
संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार लूट के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक अपराधी किसी व्यक्ति की मृत्यु या उपहाति, या सदोष अवरोध कारित कर्ता रहता या कारित करने का प्रयत्न कर्ता रहता है, अथवा जब तक तत्काल मृत्यु का, या तत्काल उपहति का, या तत्काल वैयक्तिक अवरोध का, भय बना रहता है ।
संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार आप्राधिक अतिचार या रिष्टि के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक अपराधी आप्राधिक अतिचार या रिष्टि कर्ता रहता है ।
संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार रात्रो गॄह-भेदन के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक ऐसे गॄहभेदन से आरंभ हुआ गॄह-अतिचार होता रहता है ।
पूरा पढ़ें: IPC §105संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार तब प्रारंभ होता है, जब संपत्ति के संकट की युक्तियुक्त आशंका प्रारंभ होती है ।
संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार, चोरी के विरुद्ध अपराधी के संपत्ति सहित पहुंच से बाहर हो जाने तक अथवा या तो लोक प्राधिकार्यो की सहायता अभिप्राप्त कर लेने या संपत्ति प्रत्युध्रुत हो जाने तक बना रहता है ।
संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार लूट के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक अपराधी किसी व्यक्ति की मृत्यु या उपहाति, या सदोष अवरोध कारित कर्ता रहता या कारित करने का प्रयत्न कर्ता रहता है, अथवा जब तक तत्काल मृत्यु का, या तत्काल उपहति का, या तत्काल वैयक्तिक अवरोध का, भय बना रहता है ।
संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार आप्राधिक अतिचार या रिष्टि के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक अपराधी आप्राधिक अतिचार या रिष्टि कर्ता रहता है ।
संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार रात्रो गॄह-भेदन के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक ऐसे गॄहभेदन से आरंभ हुआ गॄह-अतिचार होता रहता है ।
नया कानून
BNS §43
संपत्ति की निजी रक्षा के अधिकार का प्रारंभ और निरंतरता।
संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार,—
(क) संपत्ति को खतरे की उचित आशंका उत्पन्न होने पर प्रारंभ होता है;
(ख) चोरी के विरुद्ध कार्रवाई तब तक जारी रहती है जब तक अपराधी संपत्ति लेकर भाग न जाए या सार्वजनिक अधिकारियों की सहायता प्राप्त न हो जाए या संपत्ति बरामद न हो जाए;
(ग) डकैती के विरुद्ध अपराध तब तक जारी रहता है जब तक अपराधी किसी व्यक्ति की मृत्यु, चोट या अनुचित रूप से उसे बंधक बनाता है या ऐसा करने का प्रयास करता है, या जब तक तत्काल मृत्यु, तत्काल चोट या तत्काल व्यक्तिगत रूप से बंधक बनाए जाने का भय बना रहता है;
(घ) आपराधिक अतिक्रमण या उपद्रव के विरुद्ध कार्रवाई तब तक जारी रहती है जब तक अपराधी आपराधिक अतिक्रमण या उपद्रव करता रहता है;
(ई) सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले घर तोड़ने के खिलाफ तब तक कार्रवाई जारी रहेगी जब तक कि घर तोड़ने से शुरू हुआ घर में घुसपैठ जारी रहता है।
पूरा पढ़ें: BNS §43(क) संपत्ति को खतरे की उचित आशंका उत्पन्न होने पर प्रारंभ होता है;
(ख) चोरी के विरुद्ध कार्रवाई तब तक जारी रहती है जब तक अपराधी संपत्ति लेकर भाग न जाए या सार्वजनिक अधिकारियों की सहायता प्राप्त न हो जाए या संपत्ति बरामद न हो जाए;
(ग) डकैती के विरुद्ध अपराध तब तक जारी रहता है जब तक अपराधी किसी व्यक्ति की मृत्यु, चोट या अनुचित रूप से उसे बंधक बनाता है या ऐसा करने का प्रयास करता है, या जब तक तत्काल मृत्यु, तत्काल चोट या तत्काल व्यक्तिगत रूप से बंधक बनाए जाने का भय बना रहता है;
(घ) आपराधिक अतिक्रमण या उपद्रव के विरुद्ध कार्रवाई तब तक जारी रहती है जब तक अपराधी आपराधिक अतिक्रमण या उपद्रव करता रहता है;
(ई) सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले घर तोड़ने के खिलाफ तब तक कार्रवाई जारी रहेगी जब तक कि घर तोड़ने से शुरू हुआ घर में घुसपैठ जारी रहता है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
