पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 103 अब BNS धारा 41 है
धारा 103 - कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है
पुराना कानून
IPC §103
धारा 103 - कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है
कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है
संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, धारा 99 में वर्णित निर्बन्धनो के अध्यधीन दोषकर्ता की मृत्यु या अन्य अपहानि स्वेच्छाया कारित करने तक का है, यदि वह अपराध जिसके किए जाने के, या किए जाने के प्रयत्न के कारण उस अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, एतस्मिनपश्चात प्रगणित भांतियों में से किसी भी भांति का है, अर्थात: -
पहला - लूट ;
दूसरा - रात्रो गॄह-भेदन ;
तीसरा - अग्नि द्वारा रिष्टि, जो किसी ऐसे निर्माण, तंबू या जलयान को की गई है, जो मानव आवास के रूप में या संपत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में लाया जाता है ;
चौथा - चोरी, रिष्टि, या गॄह-अतिचार, जो ऐसी परिस्थितियों में किया गया है, जिनसे युक्तियुक्ति रूप से यह आशंका कारित हो कि यदि प्राइवेट प्रतिरक्षा के ऐसे अधिकार का प्रयोग न किया गया तो परिणाम मृत्यु या घोर उपहति होगा ।
पूरा पढ़ें: IPC §103संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, धारा 99 में वर्णित निर्बन्धनो के अध्यधीन दोषकर्ता की मृत्यु या अन्य अपहानि स्वेच्छाया कारित करने तक का है, यदि वह अपराध जिसके किए जाने के, या किए जाने के प्रयत्न के कारण उस अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, एतस्मिनपश्चात प्रगणित भांतियों में से किसी भी भांति का है, अर्थात: -
पहला - लूट ;
दूसरा - रात्रो गॄह-भेदन ;
तीसरा - अग्नि द्वारा रिष्टि, जो किसी ऐसे निर्माण, तंबू या जलयान को की गई है, जो मानव आवास के रूप में या संपत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में लाया जाता है ;
चौथा - चोरी, रिष्टि, या गॄह-अतिचार, जो ऐसी परिस्थितियों में किया गया है, जिनसे युक्तियुक्ति रूप से यह आशंका कारित हो कि यदि प्राइवेट प्रतिरक्षा के ऐसे अधिकार का प्रयोग न किया गया तो परिणाम मृत्यु या घोर उपहति होगा ।
नया कानून
BNS §41
जब संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार मृत्यु का कारण बनने तक विस्तारित हो जाता है।
धारा 37 में निर्दिष्ट प्रतिबंधों के अधीन, संपत्ति की आत्मरक्षा का अधिकार अपराधी की स्वेच्छा से मृत्यु या किसी अन्य हानि पहुँचाने तक विस्तारित है, यदि वह अपराध, जिसके घटित होने या घटित होने के प्रयास के कारण इस अधिकार का प्रयोग किया जाता है, निम्नलिखित में से किसी भी प्रकार का अपराध हो, अर्थात्: —
(क) डकैती;
(ख) सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले सेंधमारी करना;
(ग) किसी भवन, तम्बू या पोत पर आग या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा किया गया नुकसान, जिसका उपयोग मानव निवास के रूप में या संपत्ति की सुरक्षा के स्थान के रूप में किया जाता है;
(घ) चोरी, तोड़फोड़ या घर में घुसपैठ, ऐसी परिस्थितियों में जिससे यह आशंका हो सकती है कि यदि आत्मरक्षा के ऐसे अधिकार का प्रयोग नहीं किया जाता है तो मृत्यु या गंभीर चोट परिणाम होगी।
पूरा पढ़ें: BNS §41(क) डकैती;
(ख) सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले सेंधमारी करना;
(ग) किसी भवन, तम्बू या पोत पर आग या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा किया गया नुकसान, जिसका उपयोग मानव निवास के रूप में या संपत्ति की सुरक्षा के स्थान के रूप में किया जाता है;
(घ) चोरी, तोड़फोड़ या घर में घुसपैठ, ऐसी परिस्थितियों में जिससे यह आशंका हो सकती है कि यदि आत्मरक्षा के ऐसे अधिकार का प्रयोग नहीं किया जाता है तो मृत्यु या गंभीर चोट परिणाम होगी।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
