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धारा 103 - कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है
कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, धारा 99 में वर्णित निर्बन्धनो के अध्यधीन दोषकर्ता की मृत्यु या अन्य अपहानि स्वेच्छाया कारित करने तक का है, यदि वह अपराध जिसके किए जाने के, या किए जाने के प्रयत्न के कारण उस अधिकार…
पूरा पढ़ेंजब संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार मृत्यु का कारण बनने तक विस्तारित हो जाता है।
धारा 37 में निर्दिष्ट प्रतिबंधों के अधीन, संपत्ति की आत्मरक्षा का अधिकार अपराधी की स्वेच्छा से मृत्यु या किसी अन्य हानि पहुँचाने तक विस्तारित है, यदि वह अपराध, जिसके घटित होने या घटित होने के प्रयास के कारण इस अधिकार का प्रयोग किया जाता है, निम्नलिखित में से किसी भी प्रकार का अपराध हो, अर्थात्: — (क) डकैती; (ख)…
पूरा पढ़ेंहत्या का दंड।
जो कोई भी हत्या करेगा उसे मृत्युदंड या 1 [आजीवन कारावास] से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ेंहत्या का दंड।
(1) जो कोई हत्या करेगा उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जब पाँच या दो से अधिक व्यक्तियों का कोई समूह जाति, समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या किसी अन्य समान आधार पर हत्या करता है, तो ऐसे समूह के प्रत्येक सदस्य को मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडित…
पूरा पढ़ें- IPC §103BNS §41
धारा 103 - कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है
जब संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार मृत्यु का कारण बनने तक विस्तारित हो जाता है।
- IPC §302BNS §103
हत्या का दंड।
