पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 100 अब BNS धारा 38 है
धारा 100 - शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने पर कब होता है
पुराना कानून
IPC §100
धारा 100 - शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने पर कब होता है
शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने पर कब होता है
शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, पूर्वतित अंतिम धारा में वर्णित निर्बन्धनो के अधीन रहते हुए, हमलावर की स्वेच्छाया मृत्यु कारित करने या कोई अन्य अपहानि कारित करने तक है, यदि वह अपराध, जिसके कारण उस अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, एतस्मिनपश्चात प्रगणित भांतियों में से किसी भी भांति का है, अर्थात : -
पहला - ऐसा हमला जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम मृत्यु होगा ।
दूसरा - ऐसा हमला जिससे युक्तियुक्त रूप से आशंका कारित हो कि अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम घोर उपहति होगा ;
तीसरा - बलात्संग करने के आशय से किया गया हमला ;
चौथा - प्रकृति-विरुद्ध काम-तॄषणा की तृप्ति के आशय से किया गया हमला ;
पांचवां - व्यपहरण या अपहरण करने के आशय से किया गया हमला ;
छठा - इस आशय से किया गया हमला कि किसी व्यक्ति का ऐसी परिस्थितियों में सदोष परिरोध किया जाए, जिनसे उसे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि वह अपने को छुड़वाने के लिए लोक प्राधिकार्यो की सहायता प्राप्त नहीं कर सकेगा ।
पूरा पढ़ें: IPC §100शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, पूर्वतित अंतिम धारा में वर्णित निर्बन्धनो के अधीन रहते हुए, हमलावर की स्वेच्छाया मृत्यु कारित करने या कोई अन्य अपहानि कारित करने तक है, यदि वह अपराध, जिसके कारण उस अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, एतस्मिनपश्चात प्रगणित भांतियों में से किसी भी भांति का है, अर्थात : -
पहला - ऐसा हमला जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम मृत्यु होगा ।
दूसरा - ऐसा हमला जिससे युक्तियुक्त रूप से आशंका कारित हो कि अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम घोर उपहति होगा ;
तीसरा - बलात्संग करने के आशय से किया गया हमला ;
चौथा - प्रकृति-विरुद्ध काम-तॄषणा की तृप्ति के आशय से किया गया हमला ;
पांचवां - व्यपहरण या अपहरण करने के आशय से किया गया हमला ;
छठा - इस आशय से किया गया हमला कि किसी व्यक्ति का ऐसी परिस्थितियों में सदोष परिरोध किया जाए, जिनसे उसे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि वह अपने को छुड़वाने के लिए लोक प्राधिकार्यो की सहायता प्राप्त नहीं कर सकेगा ।
नया कानून
BNS §38
जब शरीर की रक्षा का निजी अधिकार मृत्यु का कारण बनने तक विस्तारित हो जाता है।
शरीर की आत्मरक्षा का अधिकार, धारा 37 में निर्दिष्ट प्रतिबंधों के अधीन, हमलावर की स्वेच्छा से मृत्यु या किसी अन्य प्रकार की हानि पहुँचाने तक विस्तारित है, यदि वह अपराध जिसके कारण इस अधिकार का प्रयोग किया जा रहा है, निम्नलिखित में से किसी भी प्रकार का हो, अर्थात्:—
(क) ऐसा हमला जिससे यह आशंका उत्पन्न हो सकती है कि अन्यथा ऐसे हमले के परिणामस्वरूप मृत्यु हो जाएगी;
(ख) ऐसा हमला जिससे यह आशंका उत्पन्न हो सकती है कि अन्यथा ऐसे हमले के परिणामस्वरूप गंभीर चोट लगेगी;
(ग) बलात्कार करने के इरादे से किया गया हमला;
(घ) अप्राकृतिक वासना को संतुष्ट करने के इरादे से किया गया हमला;
(ई) अपहरण या अगवा करने के इरादे से किया गया हमला;
(f) किसी व्यक्ति को गलत तरीके से कैद करने के इरादे से किया गया हमला, ऐसी परिस्थितियों में जिससे उसे यह आशंका हो सकती है कि वह अपनी रिहाई के लिए सार्वजनिक अधिकारियों से सहायता नहीं ले पाएगा;
(जी) तेजाब फेंकने या पिलाने का कार्य या तेजाब फेंकने या पिलाने का प्रयास जिससे यह आशंका उत्पन्न हो सकती है कि अन्यथा ऐसे कार्य के परिणामस्वरूप गंभीर चोट लगेगी।
पूरा पढ़ें: BNS §38(क) ऐसा हमला जिससे यह आशंका उत्पन्न हो सकती है कि अन्यथा ऐसे हमले के परिणामस्वरूप मृत्यु हो जाएगी;
(ख) ऐसा हमला जिससे यह आशंका उत्पन्न हो सकती है कि अन्यथा ऐसे हमले के परिणामस्वरूप गंभीर चोट लगेगी;
(ग) बलात्कार करने के इरादे से किया गया हमला;
(घ) अप्राकृतिक वासना को संतुष्ट करने के इरादे से किया गया हमला;
(ई) अपहरण या अगवा करने के इरादे से किया गया हमला;
(f) किसी व्यक्ति को गलत तरीके से कैद करने के इरादे से किया गया हमला, ऐसी परिस्थितियों में जिससे उसे यह आशंका हो सकती है कि वह अपनी रिहाई के लिए सार्वजनिक अधिकारियों से सहायता नहीं ले पाएगा;
(जी) तेजाब फेंकने या पिलाने का कार्य या तेजाब फेंकने या पिलाने का प्रयास जिससे यह आशंका उत्पन्न हो सकती है कि अन्यथा ऐसे कार्य के परिणामस्वरूप गंभीर चोट लगेगी।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
