पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IEA धारा 23 अब BSA धारा 21 है
सिविल मामलों में स्वीकृतियाँ कब सुसंगत होती है
पुराना कानून
IEA §23
सिविल मामलों में स्वीकृतियाँ कब सुसंगत होती है
सिविल मामलों में कोई भी स्वीकृति सुसंगत नहीं है, यदि वह या तो इस अभिव्यक्त शर्त पर की गई हो कि उसका साक्ष्य नहीं दिया जाएगा या ऐसी परिस्थितियाँ के अधीन दी गई हो जिनसे न्यायालय यह अनुमान कर सके कि पक्षकार इस बात पर परस्पर समहत हो गए थे कि उसका साक्ष्य नहीं दिया जाना चाहिए ।
स्पष्टीकरण :
इस धारा की कोई भी बात किसी बैरिस्टर, प्लीडर, अटर्नी या वकिल को किसी ऐसी बात का साक्ष्य देने से छूट देने वाली नहीं मानी जाएगी जिसका साक्ष्य देने के लिए धारा १२६ के अधीन उसे विवश किया जा सकता है ।
पूरा पढ़ें: IEA §23स्पष्टीकरण :
इस धारा की कोई भी बात किसी बैरिस्टर, प्लीडर, अटर्नी या वकिल को किसी ऐसी बात का साक्ष्य देने से छूट देने वाली नहीं मानी जाएगी जिसका साक्ष्य देने के लिए धारा १२६ के अधीन उसे विवश किया जा सकता है ।
नया कानून
BSA §21
प्रासंगिक होने पर दीवानी मामलों में स्वीकारोक्ति।
दीवानी मामलों में कोई भी स्वीकारोक्ति प्रासंगिक नहीं होती है, यदि वह इस स्पष्ट शर्त पर की गई हो कि उसका साक्ष्य नहीं दिया जाना चाहिए, या ऐसी परिस्थितियों में की गई हो जिससे न्यायालय यह अनुमान लगा सके कि पक्षकारों ने आपस में सहमति व्यक्त की थी कि उसका साक्ष्य नहीं दिया जाना चाहिए।
स्पष्टीकरण। -इस धारा में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे किसी अधिवक्ता को किसी ऐसे मामले के साक्ष्य देने से छूट मिले जिसके लिए उसे धारा 132 की उपधारा (1) और (2) के तहत साक्ष्य देने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
पूरा पढ़ें: BSA §21स्पष्टीकरण। -इस धारा में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे किसी अधिवक्ता को किसी ऐसे मामले के साक्ष्य देने से छूट मिले जिसके लिए उसे धारा 132 की उपधारा (1) और (2) के तहत साक्ष्य देने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
