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CrPC धारा 386 अब BNSS धारा 427 है
धारा 386. अपील न्यायालय की शक्तियां
पुराना कानून
CrPC §386
धारा 386. अपील न्यायालय की शक्तियां
386. अपील न्यायालय की शक्तियां
ऐसे अभिलेख के परिशीलन के पश्चात् और अपीलार्थी या उसके प्लीडर को, यदि वह हाजिर हो, तथा लोक अभियोजक को, यदि वह हाजिर हो, तथा धारा 377 या धारा 378 के अधीन अपील की दशा में अभियुक्त को, यदि वह हाजिर हो, सुनने के पश्चात्, अपील न्यायालय, यदि वह यह समझता है कि हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त आधार नहीं है तो, अपील को खारिज कर सकेगा, अथवा—
(क) दोषमुक्ति के आदेश से अपील में, ऐसे आदेश को उलट सकेगा और यह निदेश दे सकेगा कि आगे जांच की जाए, अथवा यह कि अभियुक्त का पुनर्विचारण किया जाए या उसे विचारण के लिए सुपुर्द किया जाए, जैसी भी स्थिति हो, अथवा उसे दोषी पा सकेगा और उसे विधि के अनुसार दंडादेश दे सकेगा;
(ख) दोषसिद्धि से अपील में—
(i) निष्कर्ष और दंडादेश को उलट सकेगा और अभियुक्त को दोषमुक्त या उन्मोचित कर सकेगा, अथवा यह आदेश दे सकेगा कि ऐसे अपील न्यायालय के अधीनस्थ सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा उसका पुनर्विचारण किया जाए या उसे विचारण के लिए सुपुर्द किया जाए; अथवा
(ii) दंडादेश को कायम रखते हुए निष्कर्ष में परिवर्तन कर सकेगा; अथवा
(iii) निष्कर्ष में परिवर्तन करते हुए या उसमें परिवर्तन किए बिना, दंडादेश की प्रकृति में या मात्रा में, अथवा प्रकृति और मात्रा दोनों में, परिवर्तन कर सकेगा, किन्तु ऐसे नहीं कि उसमें वृद्धि हो जाए;
(ग) दंडादेश में वृद्धि के लिए अपील में—
(i) निष्कर्ष और दंडादेश को उलट सकेगा और अभियुक्त को दोषमुक्त या उन्मोचित कर सकेगा, अथवा यह आदेश दे सकेगा कि अपराध का विचारण करने के लिए सक्षम न्यायालय द्वारा उसका पुनर्विचारण किया जाए; अथवा
(ii) दंडादेश को कायम रखते हुए निष्कर्ष में परिवर्तन कर सकेगा; अथवा
(iii) निष्कर्ष में परिवर्तन करते हुए या उसमें परिवर्तन किए बिना, दंडादेश की प्रकृति में या मात्रा में, अथवा प्रकृति और मात्रा दोनों में, ऐसा परिवर्तन कर सकेगा कि उसमें वृद्धि या कमी हो जाए;
(घ) किसी अन्य आदेश से अपील में, ऐसे आदेश में परिवर्तन कर सकेगा या उसे उलट सकेगा;
(ङ) ऐसा कोई संशोधन या ऐसा कोई पारिणामिक या आनुषंगिक आदेश कर सकेगा जो न्यायसंगत या उचित हो:
परन्तु दंडादेश में वृद्धि तब तक नहीं की जाएगी जब तक अभियुक्त को ऐसी वृद्धि के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का अवसर न मिल गया हो:
परन्तु यह और कि अपील न्यायालय उस अपराध के लिए, जो उसकी राय में अभियुक्त ने किया है, उससे अधिक दंड अधिरोपित नहीं करेगा जो उस अपराध के लिए उस न्यायालय द्वारा अधिरोपित किया जा सकता था जिसने वह आदेश या दंडादेश दिया था जिसकी अपील की गई है।
पूरा पढ़ें: CrPC §386ऐसे अभिलेख के परिशीलन के पश्चात् और अपीलार्थी या उसके प्लीडर को, यदि वह हाजिर हो, तथा लोक अभियोजक को, यदि वह हाजिर हो, तथा धारा 377 या धारा 378 के अधीन अपील की दशा में अभियुक्त को, यदि वह हाजिर हो, सुनने के पश्चात्, अपील न्यायालय, यदि वह यह समझता है कि हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त आधार नहीं है तो, अपील को खारिज कर सकेगा, अथवा—
(क) दोषमुक्ति के आदेश से अपील में, ऐसे आदेश को उलट सकेगा और यह निदेश दे सकेगा कि आगे जांच की जाए, अथवा यह कि अभियुक्त का पुनर्विचारण किया जाए या उसे विचारण के लिए सुपुर्द किया जाए, जैसी भी स्थिति हो, अथवा उसे दोषी पा सकेगा और उसे विधि के अनुसार दंडादेश दे सकेगा;
(ख) दोषसिद्धि से अपील में—
(i) निष्कर्ष और दंडादेश को उलट सकेगा और अभियुक्त को दोषमुक्त या उन्मोचित कर सकेगा, अथवा यह आदेश दे सकेगा कि ऐसे अपील न्यायालय के अधीनस्थ सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा उसका पुनर्विचारण किया जाए या उसे विचारण के लिए सुपुर्द किया जाए; अथवा
(ii) दंडादेश को कायम रखते हुए निष्कर्ष में परिवर्तन कर सकेगा; अथवा
(iii) निष्कर्ष में परिवर्तन करते हुए या उसमें परिवर्तन किए बिना, दंडादेश की प्रकृति में या मात्रा में, अथवा प्रकृति और मात्रा दोनों में, परिवर्तन कर सकेगा, किन्तु ऐसे नहीं कि उसमें वृद्धि हो जाए;
(ग) दंडादेश में वृद्धि के लिए अपील में—
(i) निष्कर्ष और दंडादेश को उलट सकेगा और अभियुक्त को दोषमुक्त या उन्मोचित कर सकेगा, अथवा यह आदेश दे सकेगा कि अपराध का विचारण करने के लिए सक्षम न्यायालय द्वारा उसका पुनर्विचारण किया जाए; अथवा
(ii) दंडादेश को कायम रखते हुए निष्कर्ष में परिवर्तन कर सकेगा; अथवा
(iii) निष्कर्ष में परिवर्तन करते हुए या उसमें परिवर्तन किए बिना, दंडादेश की प्रकृति में या मात्रा में, अथवा प्रकृति और मात्रा दोनों में, ऐसा परिवर्तन कर सकेगा कि उसमें वृद्धि या कमी हो जाए;
(घ) किसी अन्य आदेश से अपील में, ऐसे आदेश में परिवर्तन कर सकेगा या उसे उलट सकेगा;
(ङ) ऐसा कोई संशोधन या ऐसा कोई पारिणामिक या आनुषंगिक आदेश कर सकेगा जो न्यायसंगत या उचित हो:
परन्तु दंडादेश में वृद्धि तब तक नहीं की जाएगी जब तक अभियुक्त को ऐसी वृद्धि के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का अवसर न मिल गया हो:
परन्तु यह और कि अपील न्यायालय उस अपराध के लिए, जो उसकी राय में अभियुक्त ने किया है, उससे अधिक दंड अधिरोपित नहीं करेगा जो उस अपराध के लिए उस न्यायालय द्वारा अधिरोपित किया जा सकता था जिसने वह आदेश या दंडादेश दिया था जिसकी अपील की गई है।
नया कानून
BNSS §427
अपीलीय न्यायालय की शक्तियाँ।
ऐसे अभिलेखों का अवलोकन करने और अपीलकर्ता या उसके अधिवक्ता (यदि वह उपस्थित हो) तथा लोक अभियोजक (यदि वह उपस्थित हो) तथा धारा 418 या धारा 419 के अंतर्गत अपील के मामले में अभियुक्त (यदि वह उपस्थित हो) की सुनवाई करने के बाद, अपीलीय न्यायालय, यदि वह हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त आधार न समझे, तो अपील को खारिज कर सकता है, या—
(क) दोषमुक्ति के आदेश के विरुद्ध अपील में, ऐसे आदेश को उलट दे और निर्देश दे कि आगे की जाँच की जाए, या अभियुक्त पर पुनः मुकदमा चलाया जाए या उसे मुकदमे के लिए भेजा जाए, जैसा भी मामला हो, या उसे दोषी पाए और कानून के अनुसार उस पर सजा सुनाए;
(ख) दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील में---
(i) निर्णय और सजा को उलट कर अभियुक्त को बरी या रिहा कर दे, या उसे अपीलीय न्यायालय के अधीनस्थ सक्षम क्षेत्राधिकार वाले न्यायालय द्वारा पुनर्विचार के लिए आदेश दे, या उसे मुकदमे के लिए भेज दे; या
(ii) निर्णय में परिवर्तन करना, सजा को बरकरार रखना; या
(iii) निष्कर्ष में परिवर्तन करते हुए या उसके बिना, सजा की प्रकृति या सीमा, या प्रकृति और सीमा दोनों में परिवर्तन करना, लेकिन इस प्रकार नहीं कि सजा बढ़ जाए;
(ग) सजा बढ़ाने की अपील में---
(i) निर्णय और सजा को उलट कर अभियुक्त को बरी या रिहा कर दे या उसे अपराध की सुनवाई के लिए सक्षम न्यायालय द्वारा पुनः विचारण का आदेश दे; या
(ii) सजा को बरकरार रखते हुए निष्कर्ष को बदलना; या
(iii) निष्कर्ष में परिवर्तन करते हुए या उसके बिना, सजा की प्रकृति या सीमा को, या सजा की प्रकृति और सीमा को, इस प्रकार परिवर्तित करना जिससे वह बढ़ जाए या घट जाए;
(घ) किसी अन्य आदेश के विरुद्ध अपील में, ऐसे आदेश को परिवर्तित या रद्द करना;
(ई) कोई संशोधन या कोई परिणामी या आकस्मिक आदेश देना जो न्यायसंगत या उचित हो:
बशर्ते कि सजा में वृद्धि तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि आरोपी को ऐसी वृद्धि के खिलाफ कारण बताने का अवसर न दिया गया हो:
इसके अलावा, अपीलीय न्यायालय उस अपराध के लिए, जिसे उसकी राय में अभियुक्त ने किया है, उस न्यायालय द्वारा दी जाने वाली सजा से अधिक सजा नहीं देगा, जिसने अपील के तहत आदेश या सजा सुनाई है।
पूरा पढ़ें: BNSS §427(क) दोषमुक्ति के आदेश के विरुद्ध अपील में, ऐसे आदेश को उलट दे और निर्देश दे कि आगे की जाँच की जाए, या अभियुक्त पर पुनः मुकदमा चलाया जाए या उसे मुकदमे के लिए भेजा जाए, जैसा भी मामला हो, या उसे दोषी पाए और कानून के अनुसार उस पर सजा सुनाए;
(ख) दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील में---
(i) निर्णय और सजा को उलट कर अभियुक्त को बरी या रिहा कर दे, या उसे अपीलीय न्यायालय के अधीनस्थ सक्षम क्षेत्राधिकार वाले न्यायालय द्वारा पुनर्विचार के लिए आदेश दे, या उसे मुकदमे के लिए भेज दे; या
(ii) निर्णय में परिवर्तन करना, सजा को बरकरार रखना; या
(iii) निष्कर्ष में परिवर्तन करते हुए या उसके बिना, सजा की प्रकृति या सीमा, या प्रकृति और सीमा दोनों में परिवर्तन करना, लेकिन इस प्रकार नहीं कि सजा बढ़ जाए;
(ग) सजा बढ़ाने की अपील में---
(i) निर्णय और सजा को उलट कर अभियुक्त को बरी या रिहा कर दे या उसे अपराध की सुनवाई के लिए सक्षम न्यायालय द्वारा पुनः विचारण का आदेश दे; या
(ii) सजा को बरकरार रखते हुए निष्कर्ष को बदलना; या
(iii) निष्कर्ष में परिवर्तन करते हुए या उसके बिना, सजा की प्रकृति या सीमा को, या सजा की प्रकृति और सीमा को, इस प्रकार परिवर्तित करना जिससे वह बढ़ जाए या घट जाए;
(घ) किसी अन्य आदेश के विरुद्ध अपील में, ऐसे आदेश को परिवर्तित या रद्द करना;
(ई) कोई संशोधन या कोई परिणामी या आकस्मिक आदेश देना जो न्यायसंगत या उचित हो:
बशर्ते कि सजा में वृद्धि तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि आरोपी को ऐसी वृद्धि के खिलाफ कारण बताने का अवसर न दिया गया हो:
इसके अलावा, अपीलीय न्यायालय उस अपराध के लिए, जिसे उसकी राय में अभियुक्त ने किया है, उस न्यायालय द्वारा दी जाने वाली सजा से अधिक सजा नहीं देगा, जिसने अपील के तहत आदेश या सजा सुनाई है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
