पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 343 अब BNSS धारा 382 है
धारा 343. संज्ञान करने वाले मजिस्ट्रेट की प्रक्रिया
पुराना कानून
CrPC §343
धारा 343. संज्ञान करने वाले मजिस्ट्रेट की प्रक्रिया
343. संज्ञान करने वाले मजिस्ट्रेट की प्रक्रिया
(1) वह मजिस्ट्रेट, जिससे धारा 340 या धारा 341 के अधीन परिवाद किया जाता है, अध्याय 15 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, मामले में इस प्रकार, जहां तक हो सके, कार्रवाई करेगा मानो वह पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित किया गया हो।
(2) जहां ऐसे मजिस्ट्रेट को, अथवा किसी अन्य मजिस्ट्रेट को, जिसे मामला अंतरित किया गया हो, यह जानकारी दी जाती है कि उस न्यायिक कार्यवाही में, जिससे यह विषय उद्भूत हुआ है, पहुंचे गए विनिश्चय के विरुद्ध अपील लंबित है, वहां वह, यदि ठीक समझे तो, किसी भी प्रक्रम पर, मामले की सुनवाई ऐसी अपील के विनिश्चित हो जाने तक स्थगित कर सकेगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §343(1) वह मजिस्ट्रेट, जिससे धारा 340 या धारा 341 के अधीन परिवाद किया जाता है, अध्याय 15 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, मामले में इस प्रकार, जहां तक हो सके, कार्रवाई करेगा मानो वह पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित किया गया हो।
(2) जहां ऐसे मजिस्ट्रेट को, अथवा किसी अन्य मजिस्ट्रेट को, जिसे मामला अंतरित किया गया हो, यह जानकारी दी जाती है कि उस न्यायिक कार्यवाही में, जिससे यह विषय उद्भूत हुआ है, पहुंचे गए विनिश्चय के विरुद्ध अपील लंबित है, वहां वह, यदि ठीक समझे तो, किसी भी प्रक्रम पर, मामले की सुनवाई ऐसी अपील के विनिश्चित हो जाने तक स्थगित कर सकेगा।
नया कानून
BNSS §382
मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने की प्रक्रिया।
(1) जिस मजिस्ट्रेट को धारा 379 या धारा 380 के तहत शिकायत की जाती है, वह अध्याय सोलह में किसी बात के होते हुए भी, मामले से यथासंभव इस प्रकार निपटेगा मानो वह पुलिस रिपोर्ट पर दर्ज किया गया हो।
(2) यदि ऐसे मजिस्ट्रेट या किसी अन्य मजिस्ट्रेट, जिसे मामला स्थानांतरित किया गया हो, के संज्ञान में यह लाया जाता है कि उस न्यायिक कार्यवाही में लिए गए निर्णय के विरुद्ध अपील लंबित है जिससे मामला उत्पन्न हुआ है, तो वह उचित समझे तो किसी भी स्तर पर मामले की सुनवाई को तब तक स्थगित कर सकता है जब तक कि ऐसी अपील का निर्णय न हो जाए।
पूरा पढ़ें: BNSS §382(2) यदि ऐसे मजिस्ट्रेट या किसी अन्य मजिस्ट्रेट, जिसे मामला स्थानांतरित किया गया हो, के संज्ञान में यह लाया जाता है कि उस न्यायिक कार्यवाही में लिए गए निर्णय के विरुद्ध अपील लंबित है जिससे मामला उत्पन्न हुआ है, तो वह उचित समझे तो किसी भी स्तर पर मामले की सुनवाई को तब तक स्थगित कर सकता है जब तक कि ऐसी अपील का निर्णय न हो जाए।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
