पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 269 अब BNSS धारा 304 है
धारा 269. कुछ आकस्मिकताओं में कारागार के भारसाधक अधिकारी द्वारा आदेश का पालन करने से विरत रहना
पुराना कानून
CrPC §269
धारा 269. कुछ आकस्मिकताओं में कारागार के भारसाधक अधिकारी द्वारा आदेश का पालन करने से विरत रहना
269. कुछ आकस्मिकताओं में कारागार के भारसाधक अधिकारी द्वारा आदेश का पालन करने से विरत रहना
जहां वह व्यक्ति, जिसके बारे में धारा 267 के अधीन आदेश दिया गया है,—
(क) रुग्णता या अंगशैथिल्य के कारण कारागार से हटाए जाने के लिए अयोग्य है; या
(ख) विचारण के लिए सुपुर्दगी के अधीन है या विचारण लंबित रहने तक अथवा प्रारंभिक अन्वेषण लंबित रहने तक प्रतिप्रेषण के अधीन है; या
(ग) ऐसी कालावधि के लिए अभिरक्षा में है जो उस समय के अवसान से पूर्व समाप्त हो जाएगी जो आदेश का अनुपालन करने के लिए और उसे उस कारागार में वापस ले जाने के लिए, जिसमें वह परिरुद्ध या निरुद्ध है, अपेक्षित है; या
(घ) ऐसा व्यक्ति है जिसे धारा 268 के अधीन राज्य सरकार द्वारा किया गया आदेश लागू होता है,
वहां कारागार का भारसाधक अधिकारी न्यायालय के आदेश का पालन करने से विरत रहेगा और न्यायालय को इस प्रकार विरत रहने के कारणों का कथन भेजेगा :
परन्तु जहां ऐसे व्यक्ति की उपस्थिति कारागार से पच्चीस किलोमीटर से अनधिक दूरी पर के किसी स्थान पर साक्ष्य देने के लिए अपेक्षित है, वहां कारागार का भारसाधक अधिकारी खंड (ख) में वर्णित कारण से इस प्रकार विरत नहीं रहेगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §269जहां वह व्यक्ति, जिसके बारे में धारा 267 के अधीन आदेश दिया गया है,—
(क) रुग्णता या अंगशैथिल्य के कारण कारागार से हटाए जाने के लिए अयोग्य है; या
(ख) विचारण के लिए सुपुर्दगी के अधीन है या विचारण लंबित रहने तक अथवा प्रारंभिक अन्वेषण लंबित रहने तक प्रतिप्रेषण के अधीन है; या
(ग) ऐसी कालावधि के लिए अभिरक्षा में है जो उस समय के अवसान से पूर्व समाप्त हो जाएगी जो आदेश का अनुपालन करने के लिए और उसे उस कारागार में वापस ले जाने के लिए, जिसमें वह परिरुद्ध या निरुद्ध है, अपेक्षित है; या
(घ) ऐसा व्यक्ति है जिसे धारा 268 के अधीन राज्य सरकार द्वारा किया गया आदेश लागू होता है,
वहां कारागार का भारसाधक अधिकारी न्यायालय के आदेश का पालन करने से विरत रहेगा और न्यायालय को इस प्रकार विरत रहने के कारणों का कथन भेजेगा :
परन्तु जहां ऐसे व्यक्ति की उपस्थिति कारागार से पच्चीस किलोमीटर से अनधिक दूरी पर के किसी स्थान पर साक्ष्य देने के लिए अपेक्षित है, वहां कारागार का भारसाधक अधिकारी खंड (ख) में वर्णित कारण से इस प्रकार विरत नहीं रहेगा।
नया कानून
BNSS §304
कुछ विशेष परिस्थितियों में कारागार प्रभारी अधिकारी को आदेश का पालन करने से परहेज करने का अधिकार है।
जहां वह व्यक्ति जिसके संबंध में धारा 302 के तहत आदेश दिया गया है---
(क) बीमारी या दुर्बलता के कारण कारागार से निकाले जाने के लिए अयोग्य है; या
(ख) मुकदमे की सुनवाई के लिए हिरासत में है या मुकदमे की सुनवाई लंबित रहने तक या प्रारंभिक जांच लंबित रहने तक हिरासत में है; या
(ग) वह ऐसी अवधि के लिए हिरासत में है जो आदेश का पालन करने और उसे उस कारागार में वापस ले जाने के लिए आवश्यक समय की समाप्ति से पहले समाप्त हो जाएगी जिसमें वह बंद या हिरासत में है; या
(घ) वह व्यक्ति जिस पर धारा 303 के अंतर्गत राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा पारित आदेश लागू होता है।
कारागार प्रभारी अधिकारी न्यायालय के आदेश का पालन करने से परहेज करेगा और परहेज करने के कारणों का विवरण न्यायालय को भेजेगा।
बशर्ते कि जहां किसी व्यक्ति की उपस्थिति कारागार से पच्चीस किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित स्थान पर साक्ष्य देने के लिए आवश्यक हो, तो कारागार का प्रभारी अधिकारी खंड (ख) में उल्लिखित कारण से उपस्थित होने से परहेज नहीं करेगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §304(क) बीमारी या दुर्बलता के कारण कारागार से निकाले जाने के लिए अयोग्य है; या
(ख) मुकदमे की सुनवाई के लिए हिरासत में है या मुकदमे की सुनवाई लंबित रहने तक या प्रारंभिक जांच लंबित रहने तक हिरासत में है; या
(ग) वह ऐसी अवधि के लिए हिरासत में है जो आदेश का पालन करने और उसे उस कारागार में वापस ले जाने के लिए आवश्यक समय की समाप्ति से पहले समाप्त हो जाएगी जिसमें वह बंद या हिरासत में है; या
(घ) वह व्यक्ति जिस पर धारा 303 के अंतर्गत राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा पारित आदेश लागू होता है।
कारागार प्रभारी अधिकारी न्यायालय के आदेश का पालन करने से परहेज करेगा और परहेज करने के कारणों का विवरण न्यायालय को भेजेगा।
बशर्ते कि जहां किसी व्यक्ति की उपस्थिति कारागार से पच्चीस किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित स्थान पर साक्ष्य देने के लिए आवश्यक हो, तो कारागार का प्रभारी अधिकारी खंड (ख) में उल्लिखित कारण से उपस्थित होने से परहेज नहीं करेगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
