पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 251 अब BNSS धारा 274 है
धारा 251. अभियोग का सार बताया जाना
पुराना कानून
CrPC §251
धारा 251. अभियोग का सार बताया जाना
251. अभियोग का सार बताया जाना
जब किसी समन-मामले में अभियुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होता है या लाया जाता है, तब उस अपराध की विशिष्टियां, जिसका वह अभियुक्त है, उसे बताई जाएंगी और उससे पूछा जाएगा कि क्या वह दोषी होने का अभिवाक् करता है या उसे कोई प्रतिरक्षा करनी है, किंतु औपचारिक आरोप विरचित करना आवश्यक न होगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §251जब किसी समन-मामले में अभियुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होता है या लाया जाता है, तब उस अपराध की विशिष्टियां, जिसका वह अभियुक्त है, उसे बताई जाएंगी और उससे पूछा जाएगा कि क्या वह दोषी होने का अभिवाक् करता है या उसे कोई प्रतिरक्षा करनी है, किंतु औपचारिक आरोप विरचित करना आवश्यक न होगा।
नया कानून
BNSS §274
आरोप का सार बताया जाना चाहिए।
जब किसी समन मामले में आरोपी मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होता है या उसे लाया जाता है, तो उसे उस अपराध का विवरण बताया जाएगा जिसका उस पर आरोप है, और उससे पूछा जाएगा कि क्या वह दोषी होने की बात स्वीकार करता है या उसके पास बचाव में कुछ कहना है, लेकिन औपचारिक आरोप तय करना आवश्यक नहीं होगा।
बशर्ते कि यदि मजिस्ट्रेट आरोप को निराधार मानता है, तो वह लिखित में कारण दर्ज करने के बाद आरोपी को रिहा कर देगा और ऐसी रिहाई को बरी करने के समान माना जाएगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §274बशर्ते कि यदि मजिस्ट्रेट आरोप को निराधार मानता है, तो वह लिखित में कारण दर्ज करने के बाद आरोपी को रिहा कर देगा और ऐसी रिहाई को बरी करने के समान माना जाएगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
