पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 166A अब BNSS धारा 112 है
धारा 166A. भारत से बाहर किसी देश या स्थान में अन्वेषण के लिए सक्षम प्राधिकारी को अनुरोध-पत्र
पुराना कानून
CrPC §166A
धारा 166A. भारत से बाहर किसी देश या स्थान में अन्वेषण के लिए सक्षम प्राधिकारी को अनुरोध-पत्र
166A. भारत से बाहर किसी देश या स्थान में अन्वेषण के लिए सक्षम प्राधिकारी को अनुरोध-पत्र
(1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी, यदि किसी अपराध के अन्वेषण के दौरान अन्वेषण अधिकारी द्वारा या अन्वेषण अधिकारी से वरिष्ठ पंक्ति के किसी अधिकारी द्वारा यह आवेदन किया जाता है कि साक्ष्य भारत से बाहर किसी देश या स्थान में उपलब्ध हो सकता है, तो कोई दंड न्यायालय उस देश या स्थान में ऐसे अनुरोध का निपटारा करने के लिए सक्षम किसी न्यायालय या प्राधिकारी को अनुरोध-पत्र जारी कर सकेगा कि वह किसी ऐसे व्यक्ति की, जिसके बारे में यह समझा जाता है कि वह मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित है, मौखिक रूप से परीक्षा करे और ऐसी परीक्षा के दौरान उसके द्वारा किए गए कथन को अभिलिखित करे तथा ऐसे व्यक्ति से या किसी अन्य व्यक्ति से यह भी अपेक्षा करे कि वह मामले से संबंधित ऐसा कोई दस्तावेज या वस्तु, जो उसके कब्जे में हो, पेश करे, और इस प्रकार लिए गए या एकत्र किए गए समस्त साक्ष्य को या उसकी अधिप्रमाणित प्रतियों को या इस प्रकार एकत्र की गई वस्तु को ऐसा पत्र जारी करने वाले न्यायालय को भेजे।
(2) अनुरोध-पत्र ऐसी रीति से पारेषित किया जाएगा, जो केंद्रीय सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।
(3) उपधारा (1) के अधीन अभिलिखित प्रत्येक कथन या प्राप्त दस्तावेज या वस्तु इस अध्याय के अधीन अन्वेषण के दौरान एकत्र किया गया साक्ष्य समझा जाएगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §166A(1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी, यदि किसी अपराध के अन्वेषण के दौरान अन्वेषण अधिकारी द्वारा या अन्वेषण अधिकारी से वरिष्ठ पंक्ति के किसी अधिकारी द्वारा यह आवेदन किया जाता है कि साक्ष्य भारत से बाहर किसी देश या स्थान में उपलब्ध हो सकता है, तो कोई दंड न्यायालय उस देश या स्थान में ऐसे अनुरोध का निपटारा करने के लिए सक्षम किसी न्यायालय या प्राधिकारी को अनुरोध-पत्र जारी कर सकेगा कि वह किसी ऐसे व्यक्ति की, जिसके बारे में यह समझा जाता है कि वह मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित है, मौखिक रूप से परीक्षा करे और ऐसी परीक्षा के दौरान उसके द्वारा किए गए कथन को अभिलिखित करे तथा ऐसे व्यक्ति से या किसी अन्य व्यक्ति से यह भी अपेक्षा करे कि वह मामले से संबंधित ऐसा कोई दस्तावेज या वस्तु, जो उसके कब्जे में हो, पेश करे, और इस प्रकार लिए गए या एकत्र किए गए समस्त साक्ष्य को या उसकी अधिप्रमाणित प्रतियों को या इस प्रकार एकत्र की गई वस्तु को ऐसा पत्र जारी करने वाले न्यायालय को भेजे।
(2) अनुरोध-पत्र ऐसी रीति से पारेषित किया जाएगा, जो केंद्रीय सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।
(3) उपधारा (1) के अधीन अभिलिखित प्रत्येक कथन या प्राप्त दस्तावेज या वस्तु इस अध्याय के अधीन अन्वेषण के दौरान एकत्र किया गया साक्ष्य समझा जाएगा।
नया कानून
BNSS §112
भारत से बाहर किसी देश या स्थान में जांच के लिए सक्षम प्राधिकारी को अनुरोध पत्र।
(1) यदि किसी अपराध की जांच के दौरान जांच अधिकारी या उससे उच्च पदस्थ किसी अधिकारी द्वारा यह आवेदन किया जाता है कि साक्ष्य भारत के बाहर किसी देश या स्थान में उपलब्ध हो सकता है, तो कोई आपराधिक न्यायालय उस देश या स्थान के किसी सक्षम न्यायालय या प्राधिकारी को अनुरोध पत्र जारी कर सकता है कि वह मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित माने जाने वाले किसी व्यक्ति से मौखिक पूछताछ करे और ऐसी पूछताछ के दौरान दिए गए उसके बयान को दर्ज करे, और साथ ही ऐसे व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति से मामले से संबंधित कोई दस्तावेज या वस्तु प्रस्तुत करने की मांग करे जो उसके कब्जे में हो, और इस प्रकार प्राप्त या एकत्रित किए गए सभी साक्ष्य या उनकी प्रमाणित प्रतियां या एकत्रित की गई वस्तु को पत्र जारी करने वाले न्यायालय को अग्रेषित करे।
(2) अनुरोध पत्र उस तरीके से भेजा जाएगा जैसा केंद्र सरकार इस संबंध में निर्दिष्ट करे।
(3) उपधारा (1) के अधीन दर्ज किया गया प्रत्येक कथन, या प्राप्त किया गया प्रत्येक दस्तावेज या वस्तु इस संहिता के अधीन जांच के दौरान एकत्रित साक्ष्य माना जाएगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §112(2) अनुरोध पत्र उस तरीके से भेजा जाएगा जैसा केंद्र सरकार इस संबंध में निर्दिष्ट करे।
(3) उपधारा (1) के अधीन दर्ज किया गया प्रत्येक कथन, या प्राप्त किया गया प्रत्येक दस्तावेज या वस्तु इस संहिता के अधीन जांच के दौरान एकत्रित साक्ष्य माना जाएगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
