पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 156(3) अब BNSS धारा 175(3) है
धारा 156. संज्ञेय मामलों का अन्वेषण करने की पुलिस अधिकारी की शक्ति
पुराना कानून
CrPC §156(3)
धारा 156. संज्ञेय मामलों का अन्वेषण करने की पुलिस अधिकारी की शक्ति
156. संज्ञेय मामलों का अन्वेषण करने की पुलिस अधिकारी की शक्ति
(1) पुलिस थाने का कोई भारसाधक अधिकारी, किसी मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना, ऐसे किसी संज्ञेय मामले का अन्वेषण कर सकेगा, जिसका जांच या विचारण करने की शक्ति ऐसे थाने की सीमाओं के भीतर के स्थानीय क्षेत्र पर अधिकारिता रखने वाले न्यायालय को अध्याय 13 के उपबंधों के अधीन होती।
(2) किसी ऐसे मामले में पुलिस अधिकारी की कोई कार्यवाही किसी भी प्रक्रम पर इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि वह मामला ऐसा था, जिसका अन्वेषण करने के लिए ऐसा अधिकारी इस धारा के अधीन सशक्त नहीं था।
(3) धारा 190 के अधीन सशक्त कोई मजिस्ट्रेट ऐसे अन्वेषण का, जैसा ऊपर वर्णित है, आदेश दे सकेगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §156(3)(1) पुलिस थाने का कोई भारसाधक अधिकारी, किसी मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना, ऐसे किसी संज्ञेय मामले का अन्वेषण कर सकेगा, जिसका जांच या विचारण करने की शक्ति ऐसे थाने की सीमाओं के भीतर के स्थानीय क्षेत्र पर अधिकारिता रखने वाले न्यायालय को अध्याय 13 के उपबंधों के अधीन होती।
(2) किसी ऐसे मामले में पुलिस अधिकारी की कोई कार्यवाही किसी भी प्रक्रम पर इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि वह मामला ऐसा था, जिसका अन्वेषण करने के लिए ऐसा अधिकारी इस धारा के अधीन सशक्त नहीं था।
(3) धारा 190 के अधीन सशक्त कोई मजिस्ट्रेट ऐसे अन्वेषण का, जैसा ऊपर वर्णित है, आदेश दे सकेगा।
नया कानून
BNSS §175(3)
संज्ञेय मामले की जांच करने के लिए पुलिस अधिकारी की शक्ति।
(1) किसी पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी, मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना, किसी संज्ञेय मामले की जांच कर सकता है, जिसकी जांच या सुनवाई अध्याय XIV के प्रावधानों के तहत उस स्थानीय क्षेत्र पर अधिकार क्षेत्र रखने वाले न्यायालय को करने का अधिकार होगा।
बशर्ते कि अपराध की प्रकृति और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, पुलिस अधीक्षक मामले की जांच करने के लिए पुलिस उप अधीक्षक को निर्देश दे सकते हैं।
(2) किसी भी पुलिस अधिकारी की कार्यवाही को किसी भी स्तर पर इस आधार पर प्रश्न में नहीं उठाया जाएगा कि मामला ऐसा था जिसकी जांच करने के लिए उस अधिकारी को इस धारा के तहत अधिकार प्राप्त नहीं था।
(3) धारा 210 के अधीन सशक्त कोई मजिस्ट्रेट, धारा 173 की उपधारा (4) के अधीन दिए गए हलफनामे के साथ दिए गए आवेदन पर विचार करने के बाद, और पुलिस अधिकारी द्वारा इस संबंध में की गई आवश्यक जाँच और निवेदन करने के बाद, उपर्युक्त प्रकार की जाँच का आदेश दे सकता है।
(4) धारा 210 के अधीन सशक्त कोई मजिस्ट्रेट, किसी लोक सेवक के विरुद्ध उसके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान उत्पन्न हुई शिकायत प्राप्त होने पर, निम्नलिखित शर्तों के अधीन रहते हुए जांच का आदेश दे सकता है—
(क) अपने से वरिष्ठ अधिकारी से घटना के तथ्यों और परिस्थितियों से संबंधित रिपोर्ट प्राप्त करना; और
(ख) लोक सेवक द्वारा घटना के कारण उत्पन्न हुई स्थिति के संबंध में दिए गए कथनों पर विचार करने के बाद।
पूरा पढ़ें: BNSS §175(3)बशर्ते कि अपराध की प्रकृति और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, पुलिस अधीक्षक मामले की जांच करने के लिए पुलिस उप अधीक्षक को निर्देश दे सकते हैं।
(2) किसी भी पुलिस अधिकारी की कार्यवाही को किसी भी स्तर पर इस आधार पर प्रश्न में नहीं उठाया जाएगा कि मामला ऐसा था जिसकी जांच करने के लिए उस अधिकारी को इस धारा के तहत अधिकार प्राप्त नहीं था।
(3) धारा 210 के अधीन सशक्त कोई मजिस्ट्रेट, धारा 173 की उपधारा (4) के अधीन दिए गए हलफनामे के साथ दिए गए आवेदन पर विचार करने के बाद, और पुलिस अधिकारी द्वारा इस संबंध में की गई आवश्यक जाँच और निवेदन करने के बाद, उपर्युक्त प्रकार की जाँच का आदेश दे सकता है।
(4) धारा 210 के अधीन सशक्त कोई मजिस्ट्रेट, किसी लोक सेवक के विरुद्ध उसके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान उत्पन्न हुई शिकायत प्राप्त होने पर, निम्नलिखित शर्तों के अधीन रहते हुए जांच का आदेश दे सकता है—
(क) अपने से वरिष्ठ अधिकारी से घटना के तथ्यों और परिस्थितियों से संबंधित रिपोर्ट प्राप्त करना; और
(ख) लोक सेवक द्वारा घटना के कारण उत्पन्न हुई स्थिति के संबंध में दिए गए कथनों पर विचार करने के बाद।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
