पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BSA धारा 127 अब IEA धारा 121 है
न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट।
पुराना कानून
BSA §127
न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट।
किसी भी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को, जब तक कि वह किसी ऐसे न्यायालय के विशेष आदेश पर न हो जिसके वह अधीनस्थ हो, न्यायालय में न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के रूप में अपने स्वयं के आचरण के संबंध में या न्यायालय में न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के रूप में रहते हुए उसके संज्ञान में आई किसी भी बात के संबंध में किसी भी प्रश्न का उत्तर देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा; परन्तु उससे उन अन्य मामलों के बारे में पूछताछ की जा सकती है जो उसके समक्ष उसके कार्य करते समय घटित हुए हों।
चित्र।
(क) सत्र न्यायालय के समक्ष मुकदमे के दौरान, ए का कहना है कि मजिस्ट्रेट बी द्वारा अनुचित तरीके से बयान दर्ज किया गया था। बी को इस संबंध में प्रश्नों का उत्तर देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, सिवाय उच्च न्यायालय के विशेष आदेश के।
(ख) सत्र न्यायालय के समक्ष ए पर मजिस्ट्रेट बी के समक्ष झूठी गवाही देने का आरोप है। उच्च न्यायालय के विशेष आदेश के बिना बी से यह नहीं पूछा जा सकता कि ए ने क्या कहा था।
(ग) सत्र न्यायालय के समक्ष ए पर बी (एक सत्र न्यायाधीश) के समक्ष चल रहे मुकदमे के दौरान एक पुलिस अधिकारी की हत्या का प्रयास करने का आरोप है। बी से पूछताछ की जा सकती है कि क्या हुआ था।
पूरा पढ़ें: BSA §127चित्र।
(क) सत्र न्यायालय के समक्ष मुकदमे के दौरान, ए का कहना है कि मजिस्ट्रेट बी द्वारा अनुचित तरीके से बयान दर्ज किया गया था। बी को इस संबंध में प्रश्नों का उत्तर देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, सिवाय उच्च न्यायालय के विशेष आदेश के।
(ख) सत्र न्यायालय के समक्ष ए पर मजिस्ट्रेट बी के समक्ष झूठी गवाही देने का आरोप है। उच्च न्यायालय के विशेष आदेश के बिना बी से यह नहीं पूछा जा सकता कि ए ने क्या कहा था।
(ग) सत्र न्यायालय के समक्ष ए पर बी (एक सत्र न्यायाधीश) के समक्ष चल रहे मुकदमे के दौरान एक पुलिस अधिकारी की हत्या का प्रयास करने का आरोप है। बी से पूछताछ की जा सकती है कि क्या हुआ था।
नया कानून
IEA §121
न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट
कोई भी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट, ऐसे किसी न्यायालय के, जिसके वह अधीनस्थ है, विशेष आदेश के सिवाय, न्यायालय में ऐसे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के नाते अपने स्वयं के आचरण के बारे में, या ऐसी किसी बात के बारे में जिसका ज्ञान उसे ऐसे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के नाते न्यायालय में हुआ, किन्हीं प्रश्नों का उत्तर देने के लिए विवश नहीं किया जाएगा; किन्तु अन्य उन बातों के बारे में, जो उसकी उपस्थिति में उस समय घटित हुईं जब वह ऐसे कार्य कर रहा था, उसकी परीक्षा की जा सकेगी ।
दृष्टांत :
क)सेशन न्यायालय के समक्ष अपने विचारण में ऐ यह कहता है कि अभिसाक्ष्य मजिस्ट्रेट बी द्वारा अनुचित रूप से लिया गया था । बी को, किसी वरिष्ठ न्यायालय के विशेष आदेश के सिवाय, इस बारे में प्रश्नों का उत्तर देने के लिए विवश नहीं किया जा सकता ।
ख)मजिस्ट्रेट बी के समक्ष मिथ्या साक्ष्य देने का ऐ सेशन न्यायालय के समक्ष अभियुक्त है । वरिष्ठ न्यायालय के विशेष आदेश के सिवाय बी से यह नहीं पूछा जा सकता कि ऐ ने क्या कहा था ।
ग)ऐ सेशन न्यायालय के समक्ष इस बात के लिए अभियुक्त है कि उसने सेशन न्यायाधीश बी के समक्ष अपने विचारण के दौरान किसी पुलिस ऑफिसर की हत्या करने का प्रयत्न किया । बी की इस बारे में परीक्षा की जा सकेगी कि क्या घटित हुआ था ।
पूरा पढ़ें: IEA §121दृष्टांत :
क)सेशन न्यायालय के समक्ष अपने विचारण में ऐ यह कहता है कि अभिसाक्ष्य मजिस्ट्रेट बी द्वारा अनुचित रूप से लिया गया था । बी को, किसी वरिष्ठ न्यायालय के विशेष आदेश के सिवाय, इस बारे में प्रश्नों का उत्तर देने के लिए विवश नहीं किया जा सकता ।
ख)मजिस्ट्रेट बी के समक्ष मिथ्या साक्ष्य देने का ऐ सेशन न्यायालय के समक्ष अभियुक्त है । वरिष्ठ न्यायालय के विशेष आदेश के सिवाय बी से यह नहीं पूछा जा सकता कि ऐ ने क्या कहा था ।
ग)ऐ सेशन न्यायालय के समक्ष इस बात के लिए अभियुक्त है कि उसने सेशन न्यायाधीश बी के समक्ष अपने विचारण के दौरान किसी पुलिस ऑफिसर की हत्या करने का प्रयत्न किया । बी की इस बारे में परीक्षा की जा सकेगी कि क्या घटित हुआ था ।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
