पुराना कानून
BSA §104
सबूत का बोझ।
जो कोई भी किसी न्यायालय से किसी कानूनी अधिकार या दायित्व के संबंध में निर्णय चाहता है जो उसके द्वारा बताए गए तथ्यों के अस्तित्व पर निर्भर करता है, उसे यह साबित करना होगा कि वे तथ्य मौजूद हैं, और जब किसी व्यक्ति को किसी तथ्य के अस्तित्व को साबित करना होता है, तो कहा जाता है कि सबूत का बोझ उस व्यक्ति पर है।
चित्र।
(क) ए चाहता है कि न्यायालय यह निर्णय दे कि बी को उस अपराध के लिए दंडित किया जाए जिसे ए का कहना है कि बी ने किया है। ए को यह सिद्ध करना होगा कि बी ने अपराध किया है।
(ख) ए चाहता है कि न्यायालय यह निर्णय दे कि वह बी के कब्जे वाली किसी भूमि का हकदार है, उन तथ्यों के आधार पर जिन्हें वह सत्य मानता है और जिन्हें बी सत्य नहीं मानता। ए को उन तथ्यों के अस्तित्व को सिद्ध करना होगा।
पूरा पढ़ें: BSA §104चित्र।
(क) ए चाहता है कि न्यायालय यह निर्णय दे कि बी को उस अपराध के लिए दंडित किया जाए जिसे ए का कहना है कि बी ने किया है। ए को यह सिद्ध करना होगा कि बी ने अपराध किया है।
(ख) ए चाहता है कि न्यायालय यह निर्णय दे कि वह बी के कब्जे वाली किसी भूमि का हकदार है, उन तथ्यों के आधार पर जिन्हें वह सत्य मानता है और जिन्हें बी सत्य नहीं मानता। ए को उन तथ्यों के अस्तित्व को सिद्ध करना होगा।
नया कानून
IEA §101
सबूत का भार
जो कोई न्यायालय से यह चाहता है कि वह ऐसे किसी विधिक अधिकार या दायित्व के बारे में निर्णय दे जो उन तथ्यों के अस्तित्व पर निर्भर है, जिन्हें वह प्राख्यात करता है, उसे साबित करना होगा कि उन तथ्यों का अस्तित्व है ।
जब कोई व्यक्ति किसी तथ्य का अस्तित्व साबित करने के लिए आबद्ध है, तब यह कहा जाता है कि उस व्यकि पर सबूत का भार है ।
दृष्टांत :
क)ऐ न्यायालय से चाहता है कि वह बी को उस अपराध के लिए दण्डित करने का निर्णय दे जिसके बारे में ऐ कहता है कि वह बी ने किया है ।
ऐ को यह साबित करना होगा कि बी ने वह अपराध किया है ।
ख)ऐ न्यायालय से चाहता है कि न्यायालय उन तथ्यों के कारण जिनके सत्य होने को वह प्राख्यान और बी प्रत्याख्यान (इन्कार / अस्वीकार ) करता है, यह निर्णय दे कि वह बी के कब्जे में कि अमुक भूमि का हकदार है ।
ऐ को उन तथ्यों का अस्तित्व साबित करना होगा ।
पूरा पढ़ें: IEA §101जब कोई व्यक्ति किसी तथ्य का अस्तित्व साबित करने के लिए आबद्ध है, तब यह कहा जाता है कि उस व्यकि पर सबूत का भार है ।
दृष्टांत :
क)ऐ न्यायालय से चाहता है कि वह बी को उस अपराध के लिए दण्डित करने का निर्णय दे जिसके बारे में ऐ कहता है कि वह बी ने किया है ।
ऐ को यह साबित करना होगा कि बी ने वह अपराध किया है ।
ख)ऐ न्यायालय से चाहता है कि न्यायालय उन तथ्यों के कारण जिनके सत्य होने को वह प्राख्यान और बी प्रत्याख्यान (इन्कार / अस्वीकार ) करता है, यह निर्णय दे कि वह बी के कब्जे में कि अमुक भूमि का हकदार है ।
ऐ को उन तथ्यों का अस्तित्व साबित करना होगा ।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
