पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 516 अब CrPC धारा 470 है
कुछ मामलों में समय का अपवर्जन।
पुराना कानून
BNSS §516
कुछ मामलों में समय का अपवर्जन।
(1) परिसीमा अवधि की गणना करते समय, वह समय जिसके दौरान किसी व्यक्ति ने अपराधी के विरुद्ध प्रथम न्यायालय या अपील न्यायालय या पुनरीक्षण न्यायालय में किसी अन्य अभियोग को उचित तत्परता से चलाया हो, उसे बाहर रखा जाएगा:
बशर्ते कि ऐसा कोई अपवर्जन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि अभियोग समान तथ्यों से संबंधित न हो और किसी ऐसे न्यायालय में सद्भावपूर्वक अभियोजित न किया गया हो जो क्षेत्राधिकार की कमी या इसी तरह के अन्य कारण से उस पर विचार करने में असमर्थ हो।
(2) जहाँ किसी अपराध के संबंध में अभियोग की शुरुआत किसी निषेधाज्ञा या आदेश द्वारा स्थगित कर दी गई हो, तो परिसीमा अवधि की गणना करते समय, निषेधाज्ञा या आदेश के जारी रहने की अवधि, जिस दिन वह जारी या बनाया गया था, और जिस दिन उसे वापस लिया गया था, उसे शामिल नहीं किया जाएगा।
(3) जहाँ किसी अपराध के लिए अभियोग का नोटिस दिया गया हो, या जहाँ किसी कानून के तहत किसी अपराध के लिए अभियोग शुरू करने हेतु सरकार या किसी अन्य प्राधिकरण की पूर्व सहमति या स्वीकृति आवश्यक हो, तो परिसीमा अवधि की गणना करते समय, ऐसे नोटिस की अवधि या, जैसा भी मामला हो, ऐसी सहमति या स्वीकृति प्राप्त करने के लिए आवश्यक समय को बाहर रखा जाएगा।
स्पष्टीकरण। --- सरकार या किसी अन्य प्राधिकरण की सहमति या स्वीकृति प्राप्त करने के लिए आवश्यक समय की गणना करते समय, सहमति या स्वीकृति प्राप्त करने के लिए आवेदन करने की तिथि और सरकार या अन्य प्राधिकरण के आदेश की प्राप्ति की तिथि, दोनों को शामिल नहीं किया जाएगा।
(4) परिसीमा अवधि की गणना करते समय, वह समय जिसके दौरान अपराधी---
(क) भारत से या भारत के बाहर किसी ऐसे क्षेत्र से अनुपस्थित रहा हो जो केंद्र सरकार के प्रशासन के अधीन हो; या
(ख) फरार होकर या छिपकर गिरफ्तारी से बच गया हो,
इसे बाहर रखा जाएगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §516बशर्ते कि ऐसा कोई अपवर्जन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि अभियोग समान तथ्यों से संबंधित न हो और किसी ऐसे न्यायालय में सद्भावपूर्वक अभियोजित न किया गया हो जो क्षेत्राधिकार की कमी या इसी तरह के अन्य कारण से उस पर विचार करने में असमर्थ हो।
(2) जहाँ किसी अपराध के संबंध में अभियोग की शुरुआत किसी निषेधाज्ञा या आदेश द्वारा स्थगित कर दी गई हो, तो परिसीमा अवधि की गणना करते समय, निषेधाज्ञा या आदेश के जारी रहने की अवधि, जिस दिन वह जारी या बनाया गया था, और जिस दिन उसे वापस लिया गया था, उसे शामिल नहीं किया जाएगा।
(3) जहाँ किसी अपराध के लिए अभियोग का नोटिस दिया गया हो, या जहाँ किसी कानून के तहत किसी अपराध के लिए अभियोग शुरू करने हेतु सरकार या किसी अन्य प्राधिकरण की पूर्व सहमति या स्वीकृति आवश्यक हो, तो परिसीमा अवधि की गणना करते समय, ऐसे नोटिस की अवधि या, जैसा भी मामला हो, ऐसी सहमति या स्वीकृति प्राप्त करने के लिए आवश्यक समय को बाहर रखा जाएगा।
स्पष्टीकरण। --- सरकार या किसी अन्य प्राधिकरण की सहमति या स्वीकृति प्राप्त करने के लिए आवश्यक समय की गणना करते समय, सहमति या स्वीकृति प्राप्त करने के लिए आवेदन करने की तिथि और सरकार या अन्य प्राधिकरण के आदेश की प्राप्ति की तिथि, दोनों को शामिल नहीं किया जाएगा।
(4) परिसीमा अवधि की गणना करते समय, वह समय जिसके दौरान अपराधी---
(क) भारत से या भारत के बाहर किसी ऐसे क्षेत्र से अनुपस्थित रहा हो जो केंद्र सरकार के प्रशासन के अधीन हो; या
(ख) फरार होकर या छिपकर गिरफ्तारी से बच गया हो,
इसे बाहर रखा जाएगा।
नया कानून
CrPC §470
धारा 470. कतिपय दशाओं में समय का अपवर्जन
470. कतिपय दशाओं में समय का अपवर्जन
(1) परिसीमा-काल की संगणना करने में, वह समय अपवर्जित किया जाएगा जिसके दौरान कोई व्यक्ति अपराधी के विरुद्ध अन्य अभियोजन का, चाहे प्रथम बार के न्यायालय में या अपील या पुनरीक्षण न्यायालय में, सम्यक् तत्परता से संचालन करता रहा है:
परन्तु ऐसा कोई अपवर्जन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि वह अभियोजन उन्हीं तथ्यों से संबंधित न हो और सद्भावपूर्वक ऐसे न्यायालय में न चलाया गया हो जो अधिकारिता के अभाव या उसी प्रकार के अन्य कारण से उसे ग्रहण करने में असमर्थ है।
(2) जहां किसी अपराध के बारे में अभियोजन का संस्थित किया जाना किसी व्यादेश या आदेश द्वारा रोक दिया गया है, वहां परिसीमा-काल की संगणना करने में, ऐसे व्यादेश या आदेश के चालू रहने की अवधि, वह दिन जिसको वह जारी किया गया या किया गया था, और वह दिन जिसको वह वापस लिया गया, अपवर्जित किए जाएंगे।
(3) जहां किसी अपराध के लिए अभियोजन की सूचना दी गई है, अथवा जहां तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी अपराध के लिए कोई अभियोजन संस्थित करने के लिए सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी की पूर्व सम्मति या मंजूरी अपेक्षित है, वहां परिसीमा-काल की संगणना करने में ऐसी सूचना की अवधि, अथवा यथास्थिति, ऐसी सम्मति या मंजूरी अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय, अपवर्जित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण—सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी की सम्मति या मंजूरी अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय की संगणना करने में, वह तारीख, जिसको सम्मति या मंजूरी अभिप्राप्त करने के लिए आवेदन किया गया था, और सरकार या अन्य प्राधिकारी के आदेश की प्राप्ति की तारीख, दोनों अपवर्जित की जाएंगी।
(4) परिसीमा-काल की संगणना करने में, वह समय अपवर्जित किया जाएगा जिसके दौरान अपराधी—
(क) भारत से, अथवा भारत के बाहर के ऐसे किसी राज्यक्षेत्र से, जो केंद्रीय सरकार के प्रशासन के अधीन है, अनुपस्थित रहा है, या
(ख) फरार होकर या अपने को छिपाकर गिरफ्तारी से बचता रहा है।
पूरा पढ़ें: CrPC §470(1) परिसीमा-काल की संगणना करने में, वह समय अपवर्जित किया जाएगा जिसके दौरान कोई व्यक्ति अपराधी के विरुद्ध अन्य अभियोजन का, चाहे प्रथम बार के न्यायालय में या अपील या पुनरीक्षण न्यायालय में, सम्यक् तत्परता से संचालन करता रहा है:
परन्तु ऐसा कोई अपवर्जन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि वह अभियोजन उन्हीं तथ्यों से संबंधित न हो और सद्भावपूर्वक ऐसे न्यायालय में न चलाया गया हो जो अधिकारिता के अभाव या उसी प्रकार के अन्य कारण से उसे ग्रहण करने में असमर्थ है।
(2) जहां किसी अपराध के बारे में अभियोजन का संस्थित किया जाना किसी व्यादेश या आदेश द्वारा रोक दिया गया है, वहां परिसीमा-काल की संगणना करने में, ऐसे व्यादेश या आदेश के चालू रहने की अवधि, वह दिन जिसको वह जारी किया गया या किया गया था, और वह दिन जिसको वह वापस लिया गया, अपवर्जित किए जाएंगे।
(3) जहां किसी अपराध के लिए अभियोजन की सूचना दी गई है, अथवा जहां तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी अपराध के लिए कोई अभियोजन संस्थित करने के लिए सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी की पूर्व सम्मति या मंजूरी अपेक्षित है, वहां परिसीमा-काल की संगणना करने में ऐसी सूचना की अवधि, अथवा यथास्थिति, ऐसी सम्मति या मंजूरी अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय, अपवर्जित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण—सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी की सम्मति या मंजूरी अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय की संगणना करने में, वह तारीख, जिसको सम्मति या मंजूरी अभिप्राप्त करने के लिए आवेदन किया गया था, और सरकार या अन्य प्राधिकारी के आदेश की प्राप्ति की तारीख, दोनों अपवर्जित की जाएंगी।
(4) परिसीमा-काल की संगणना करने में, वह समय अपवर्जित किया जाएगा जिसके दौरान अपराधी—
(क) भारत से, अथवा भारत के बाहर के ऐसे किसी राज्यक्षेत्र से, जो केंद्रीय सरकार के प्रशासन के अधीन है, अनुपस्थित रहा है, या
(ख) फरार होकर या अपने को छिपाकर गिरफ्तारी से बचता रहा है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
