पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 458 अब CrPC धारा 418 है
कारावास की सजा का निष्पादन।
पुराना कानून
BNSS §458
कारावास की सजा का निष्पादन।
(1) जहाँ अभियुक्त को आजीवन कारावास या धारा 453 में निर्धारित मामलों के अतिरिक्त किसी अन्य मामले में एक निश्चित अवधि के कारावास की सजा सुनाई जाती है, तो सजा सुनाने वाला न्यायालय उस कारागार या अन्य स्थान पर, जहाँ वह बंद है या बंद किया जाना है, तुरंत वारंट भेजेगा, और यदि अभियुक्त पहले से ही ऐसे कारागार या अन्य स्थान पर बंद नहीं है, तो उसे वारंट के साथ ऐसे कारागार या अन्य स्थान पर भेजेगा:
बशर्ते कि यदि अभियुक्त को न्यायालय के उठने तक कारावास की सजा सुनाई जाती है, तो किसी कारागार के लिए वारंट तैयार करना या भेजना आवश्यक नहीं होगा, और अभियुक्त को न्यायालय द्वारा निर्देशित स्थान पर ही रखा जा सकता है।
(2) यदि उपधारा (1) में उल्लिखित कारावास की सजा सुनाए जाने के समय अभियुक्त न्यायालय में उपस्थित न हो, तो न्यायालय उसे कारागार या अन्य स्थान पर भेजने के उद्देश्य से उसकी गिरफ्तारी का वारंट जारी करेगा; और ऐसे मामले में, सजा उसकी गिरफ्तारी की तारीख से प्रारंभ होगी।
पूरा पढ़ें: BNSS §458बशर्ते कि यदि अभियुक्त को न्यायालय के उठने तक कारावास की सजा सुनाई जाती है, तो किसी कारागार के लिए वारंट तैयार करना या भेजना आवश्यक नहीं होगा, और अभियुक्त को न्यायालय द्वारा निर्देशित स्थान पर ही रखा जा सकता है।
(2) यदि उपधारा (1) में उल्लिखित कारावास की सजा सुनाए जाने के समय अभियुक्त न्यायालय में उपस्थित न हो, तो न्यायालय उसे कारागार या अन्य स्थान पर भेजने के उद्देश्य से उसकी गिरफ्तारी का वारंट जारी करेगा; और ऐसे मामले में, सजा उसकी गिरफ्तारी की तारीख से प्रारंभ होगी।
नया कानून
CrPC §418
धारा 418. कारावास के दंडादेश का निष्पादन
418. कारावास के दंडादेश का निष्पादन
(1) जहां अभियुक्त को आजीवन कारावास का, या धारा 413 द्वारा उपबंधित दशाओं से भिन्न दशाओं में किसी अवधि के कारावास का, दंडादेश दिया जाता है, वहां दंडादेश देने वाला न्यायालय तुरंत उस जेल या अन्य स्थान को, जिसमें वह परिरुद्ध है या परिरुद्ध किया जाना है, वारंट भेजेगा, और जब तक अभियुक्त ऐसी जेल या अन्य स्थान में पहले से ही परिरुद्ध न हो, उसे वारंट सहित ऐसी जेल या अन्य स्थान को भेजेगा:
परन्तु जहां अभियुक्त को न्यायालय के उठने तक के कारावास का दंडादेश दिया जाता है, वहां जेल को वारंट तैयार करना या भेजना आवश्यक न होगा और अभियुक्त ऐसे स्थान में परिरुद्ध किया जा सकेगा जैसा न्यायालय निदेश दे।
(2) जहां अभियुक्त, जब उसे उपधारा (1) में उल्लिखित कारावास का दंडादेश दिया जाता है, न्यायालय में उपस्थित नहीं है, वहां न्यायालय उसे उस जेल या अन्य स्थान को, जिसमें वह परिरुद्ध किया जाना है, भेजने के प्रयोजन के लिए उसकी गिरफ्तारी का वारंट जारी करेगा; और ऐसी दशा में दंडादेश उसकी गिरफ्तारी की तारीख को प्रारंभ होगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §418(1) जहां अभियुक्त को आजीवन कारावास का, या धारा 413 द्वारा उपबंधित दशाओं से भिन्न दशाओं में किसी अवधि के कारावास का, दंडादेश दिया जाता है, वहां दंडादेश देने वाला न्यायालय तुरंत उस जेल या अन्य स्थान को, जिसमें वह परिरुद्ध है या परिरुद्ध किया जाना है, वारंट भेजेगा, और जब तक अभियुक्त ऐसी जेल या अन्य स्थान में पहले से ही परिरुद्ध न हो, उसे वारंट सहित ऐसी जेल या अन्य स्थान को भेजेगा:
परन्तु जहां अभियुक्त को न्यायालय के उठने तक के कारावास का दंडादेश दिया जाता है, वहां जेल को वारंट तैयार करना या भेजना आवश्यक न होगा और अभियुक्त ऐसे स्थान में परिरुद्ध किया जा सकेगा जैसा न्यायालय निदेश दे।
(2) जहां अभियुक्त, जब उसे उपधारा (1) में उल्लिखित कारावास का दंडादेश दिया जाता है, न्यायालय में उपस्थित नहीं है, वहां न्यायालय उसे उस जेल या अन्य स्थान को, जिसमें वह परिरुद्ध किया जाना है, भेजने के प्रयोजन के लिए उसकी गिरफ्तारी का वारंट जारी करेगा; और ऐसी दशा में दंडादेश उसकी गिरफ्तारी की तारीख को प्रारंभ होगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
