पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 425 अब CrPC धारा 384 है
अपील को संक्षिप्त रूप से खारिज कर दिया गया।
पुराना कानून
BNSS §425
अपील को संक्षिप्त रूप से खारिज कर दिया गया।
(1) यदि अपील याचिका और धारा 423 या धारा 424 के तहत प्राप्त निर्णय की प्रति की जांच करने पर अपीलीय न्यायालय को हस्तक्षेप करने का पर्याप्त आधार न मिले, तो वह अपील को संक्षेप में खारिज कर सकता है:
उसे उपलब्ध कराया---
(क) धारा 423 के तहत प्रस्तुत कोई भी अपील तब तक खारिज नहीं की जाएगी जब तक कि अपीलकर्ता या उसके अधिवक्ता को उसके समर्थन में सुनवाई का उचित अवसर न मिल जाए;
(ख) धारा 424 के तहत प्रस्तुत किसी भी अपील को अपीलकर्ता को उसके समर्थन में सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना खारिज नहीं किया जाएगा, जब तक कि अपीलीय न्यायालय यह न समझे कि अपील तुच्छ है या न्यायालय के समक्ष हिरासत में आरोपी को पेश करने से ऐसी असुविधा होगी जो मामले की परिस्थितियों में अनुपातहीन होगी;
(ग) धारा 424 के तहत प्रस्तुत कोई भी अपील, ऐसी अपील प्रस्तुत करने के लिए अनुमत अवधि समाप्त होने तक संक्षिप्त रूप से खारिज नहीं की जाएगी।
(2) इस धारा के तहत अपील खारिज करने से पहले न्यायालय मामले का अभिलेख मंगवा सकता है।
(3) जहां इस धारा के तहत अपील खारिज करने वाला अपीलीय न्यायालय सत्र न्यायालय या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय हो, तो वह ऐसा करने के कारण दर्ज करेगा।
(4) जहाँ धारा 424 के तहत प्रस्तुत अपील को इस धारा के तहत संक्षेप में खारिज कर दिया गया है और अपीलीय न्यायालय पाता है कि उसी अपीलकर्ता की ओर से धारा 423 के तहत विधिवत प्रस्तुत की गई दूसरी अपील याचिका पर उसने विचार नहीं किया है, तो वह न्यायालय, धारा 434 में निहित किसी बात के बावजूद, यदि संतुष्ट है कि न्याय के हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो ऐसी अपील की सुनवाई कर विधि के अनुसार उसका निपटारा कर सकता है।
पूरा पढ़ें: BNSS §425उसे उपलब्ध कराया---
(क) धारा 423 के तहत प्रस्तुत कोई भी अपील तब तक खारिज नहीं की जाएगी जब तक कि अपीलकर्ता या उसके अधिवक्ता को उसके समर्थन में सुनवाई का उचित अवसर न मिल जाए;
(ख) धारा 424 के तहत प्रस्तुत किसी भी अपील को अपीलकर्ता को उसके समर्थन में सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना खारिज नहीं किया जाएगा, जब तक कि अपीलीय न्यायालय यह न समझे कि अपील तुच्छ है या न्यायालय के समक्ष हिरासत में आरोपी को पेश करने से ऐसी असुविधा होगी जो मामले की परिस्थितियों में अनुपातहीन होगी;
(ग) धारा 424 के तहत प्रस्तुत कोई भी अपील, ऐसी अपील प्रस्तुत करने के लिए अनुमत अवधि समाप्त होने तक संक्षिप्त रूप से खारिज नहीं की जाएगी।
(2) इस धारा के तहत अपील खारिज करने से पहले न्यायालय मामले का अभिलेख मंगवा सकता है।
(3) जहां इस धारा के तहत अपील खारिज करने वाला अपीलीय न्यायालय सत्र न्यायालय या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय हो, तो वह ऐसा करने के कारण दर्ज करेगा।
(4) जहाँ धारा 424 के तहत प्रस्तुत अपील को इस धारा के तहत संक्षेप में खारिज कर दिया गया है और अपीलीय न्यायालय पाता है कि उसी अपीलकर्ता की ओर से धारा 423 के तहत विधिवत प्रस्तुत की गई दूसरी अपील याचिका पर उसने विचार नहीं किया है, तो वह न्यायालय, धारा 434 में निहित किसी बात के बावजूद, यदि संतुष्ट है कि न्याय के हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो ऐसी अपील की सुनवाई कर विधि के अनुसार उसका निपटारा कर सकता है।
नया कानून
CrPC §384
धारा 384. अपील का संक्षेपतः खारिज किया जाना
384. अपील का संक्षेपतः खारिज किया जाना
(1) यदि अपील की अर्जी और धारा 382 या धारा 383 के अधीन प्राप्त निर्णय की प्रति की परीक्षा करने पर अपील न्यायालय यह समझता है कि हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, तो वह अपील को संक्षेपतः खारिज कर सकेगा:
परन्तु—
(क) धारा 382 के अधीन प्रस्तुत कोई अपील तब तक खारिज न की जाएगी जब तक अपीलार्थी या उसके प्लीडर को उसके समर्थन में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर न मिल गया हो;
(ख) धारा 383 के अधीन प्रस्तुत कोई अपील अपीलार्थी को उसके समर्थन में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना खारिज न की जाएगी, जब तक कि अपील न्यायालय यह न समझे कि अपील तुच्छ है या यह कि अभिरक्षा में के अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष पेश करने में ऐसी असुविधा अंतर्वलित होगी जो मामले की परिस्थितियों में अननुपाती होगी;
(ग) धारा 383 के अधीन प्रस्तुत कोई अपील तब तक संक्षेपतः खारिज न की जाएगी जब तक ऐसी अपील करने के लिए अनुज्ञात अवधि समाप्त न हो गई हो।
(2) इस धारा के अधीन अपील खारिज करने से पूर्व न्यायालय मामले का अभिलेख मंगा सकेगा।
(3) जहां इस धारा के अधीन अपील खारिज करने वाला अपील न्यायालय सेशन न्यायालय या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय है, वहां वह ऐसा करने के अपने कारण अभिलिखित करेगा।
(4) जहां धारा 383 के अधीन प्रस्तुत अपील इस धारा के अधीन संक्षेपतः खारिज कर दी गई है और अपील न्यायालय यह पाता है कि उसी अपीलार्थी की ओर से धारा 382 के अधीन सम्यक् रूप से प्रस्तुत की गई अपील की कोई अन्य अर्जी उसके द्वारा विचार में नहीं ली गई है, वहां वह न्यायालय, धारा 393 में किसी बात के होते हुए भी, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि न्याय के हित में ऐसा करना आवश्यक है, ऐसी अपील को विधि के अनुसार सुन सकेगा और उसका निपटारा कर सकेगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §384(1) यदि अपील की अर्जी और धारा 382 या धारा 383 के अधीन प्राप्त निर्णय की प्रति की परीक्षा करने पर अपील न्यायालय यह समझता है कि हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, तो वह अपील को संक्षेपतः खारिज कर सकेगा:
परन्तु—
(क) धारा 382 के अधीन प्रस्तुत कोई अपील तब तक खारिज न की जाएगी जब तक अपीलार्थी या उसके प्लीडर को उसके समर्थन में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर न मिल गया हो;
(ख) धारा 383 के अधीन प्रस्तुत कोई अपील अपीलार्थी को उसके समर्थन में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना खारिज न की जाएगी, जब तक कि अपील न्यायालय यह न समझे कि अपील तुच्छ है या यह कि अभिरक्षा में के अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष पेश करने में ऐसी असुविधा अंतर्वलित होगी जो मामले की परिस्थितियों में अननुपाती होगी;
(ग) धारा 383 के अधीन प्रस्तुत कोई अपील तब तक संक्षेपतः खारिज न की जाएगी जब तक ऐसी अपील करने के लिए अनुज्ञात अवधि समाप्त न हो गई हो।
(2) इस धारा के अधीन अपील खारिज करने से पूर्व न्यायालय मामले का अभिलेख मंगा सकेगा।
(3) जहां इस धारा के अधीन अपील खारिज करने वाला अपील न्यायालय सेशन न्यायालय या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय है, वहां वह ऐसा करने के अपने कारण अभिलिखित करेगा।
(4) जहां धारा 383 के अधीन प्रस्तुत अपील इस धारा के अधीन संक्षेपतः खारिज कर दी गई है और अपील न्यायालय यह पाता है कि उसी अपीलार्थी की ओर से धारा 382 के अधीन सम्यक् रूप से प्रस्तुत की गई अपील की कोई अन्य अर्जी उसके द्वारा विचार में नहीं ली गई है, वहां वह न्यायालय, धारा 393 में किसी बात के होते हुए भी, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि न्याय के हित में ऐसा करना आवश्यक है, ऐसी अपील को विधि के अनुसार सुन सकेगा और उसका निपटारा कर सकेगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
