पाठ बदला गया है
BNSS धारा 378 अब CrPC धारा 339 है
मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को किसी रिश्तेदार या मित्र की देखरेख में सौंपना।
पुराना कानून
BNSS §378
मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को किसी रिश्तेदार या मित्र की देखरेख में सौंपना।
(1) जब भी धारा 369 या धारा 374 के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिए गए किसी व्यक्ति का कोई रिश्तेदार या मित्र यह चाहता है कि उसे उसकी देखरेख और हिरासत में सौंप दिया जाए, तो राज्य सरकार, ऐसे रिश्तेदार या मित्र के आवेदन पर और उसके द्वारा राज्य सरकार को संतोषजनक आश्वासन देने पर, कि सौंपे गए व्यक्ति को---
(क) उचित देखभाल की जाए और उसे स्वयं को या किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचाने से रोका जाए;
(ख) राज्य सरकार द्वारा निर्देशित किए गए ऐसे अधिकारी के निरीक्षण के लिए, और ऐसे समय और स्थानों पर प्रस्तुत किया जाएगा;
(ग) धारा 369 की उपधारा (2) के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति के मामले में, आवश्यकता पड़ने पर उसे ऐसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।
ऐसे व्यक्ति को ऐसे रिश्तेदार या मित्र को सौंपने का आदेश दें।
(2) यदि इस प्रकार सौंपे गए व्यक्ति पर किसी ऐसे अपराध का आरोप है, जिसका मुकदमा उसकी मानसिक अस्वस्थता और बचाव करने में असमर्थता के कारण स्थगित कर दिया गया है, और उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट निरीक्षण अधिकारी किसी भी समय मजिस्ट्रेट या न्यायालय को प्रमाणित करता है कि ऐसा व्यक्ति अपना बचाव करने में सक्षम है, तो ऐसा मजिस्ट्रेट या न्यायालय उस रिश्तेदार या मित्र को, जिसे ऐसे आरोपी को सौंपा गया था, मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश करने के लिए कहेगा; और, इस प्रकार पेश किए जाने पर मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 371 के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही करेगा, और निरीक्षण अधिकारी का प्रमाण पत्र साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य होगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §378(क) उचित देखभाल की जाए और उसे स्वयं को या किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचाने से रोका जाए;
(ख) राज्य सरकार द्वारा निर्देशित किए गए ऐसे अधिकारी के निरीक्षण के लिए, और ऐसे समय और स्थानों पर प्रस्तुत किया जाएगा;
(ग) धारा 369 की उपधारा (2) के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति के मामले में, आवश्यकता पड़ने पर उसे ऐसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।
ऐसे व्यक्ति को ऐसे रिश्तेदार या मित्र को सौंपने का आदेश दें।
(2) यदि इस प्रकार सौंपे गए व्यक्ति पर किसी ऐसे अपराध का आरोप है, जिसका मुकदमा उसकी मानसिक अस्वस्थता और बचाव करने में असमर्थता के कारण स्थगित कर दिया गया है, और उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट निरीक्षण अधिकारी किसी भी समय मजिस्ट्रेट या न्यायालय को प्रमाणित करता है कि ऐसा व्यक्ति अपना बचाव करने में सक्षम है, तो ऐसा मजिस्ट्रेट या न्यायालय उस रिश्तेदार या मित्र को, जिसे ऐसे आरोपी को सौंपा गया था, मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश करने के लिए कहेगा; और, इस प्रकार पेश किए जाने पर मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 371 के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही करेगा, और निरीक्षण अधिकारी का प्रमाण पत्र साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य होगा।
नया कानून
CrPC §339
धारा 339. पागल का नातेदार या मित्र की देखरेख में परिदान
339. पागल का नातेदार या मित्र की देखरेख में परिदान
(1) जब कभी धारा 330 या धारा 335 के उपबंधों के अधीन निरुद्ध किसी व्यक्ति का कोई नातेदार या मित्र यह चाहता है कि वह उसकी देखरेख और अभिरक्षा में परिदत्त किया जाए, तब राज्य सरकार, ऐसे नातेदार या मित्र के आवेदन पर और उसके द्वारा ऐसी राज्य सरकार के समाधानप्रद प्रतिभूति दिए जाने पर कि परिदत्त व्यक्ति—
(क) की समुचित देखरेख की जाएगी और उसे स्वयं को या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति करने से निवारित किया जाएगा;
(ख) ऐसे अधिकारी के निरीक्षण के लिए और ऐसे समयों तथा स्थानों पर पेश किया जाएगा, जिनका राज्य सरकार निदेश दे;
(ग) धारा 330 की उपधारा (2) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति की दशा में, अपेक्षा किए जाने पर ऐसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा,
यह आदेश दे सकेगी कि ऐसा व्यक्ति ऐसे नातेदार या मित्र को परिदत्त कर दिया जाए।
(2) यदि इस प्रकार परिदत्त व्यक्ति किसी ऐसे अपराध का अभियुक्त है जिसका विचारण उसके विकृतचित्त होने और अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ होने के कारण मुल्तवी कर दिया गया है, और उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट निरीक्षक अधिकारी किसी समय मजिस्ट्रेट या न्यायालय को यह प्रमाणित करता है कि ऐसा व्यक्ति अपनी प्रतिरक्षा करने में समर्थ है, तो ऐसा मजिस्ट्रेट या न्यायालय उस नातेदार या मित्र से, जिसे ऐसा अभियुक्त परिदत्त किया गया था, यह अपेक्षा करेगा कि वह उसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश करे, और ऐसे पेश किए जाने पर मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 332 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही करेगा तथा निरीक्षक अधिकारी का प्रमाणपत्र साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §339(1) जब कभी धारा 330 या धारा 335 के उपबंधों के अधीन निरुद्ध किसी व्यक्ति का कोई नातेदार या मित्र यह चाहता है कि वह उसकी देखरेख और अभिरक्षा में परिदत्त किया जाए, तब राज्य सरकार, ऐसे नातेदार या मित्र के आवेदन पर और उसके द्वारा ऐसी राज्य सरकार के समाधानप्रद प्रतिभूति दिए जाने पर कि परिदत्त व्यक्ति—
(क) की समुचित देखरेख की जाएगी और उसे स्वयं को या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति करने से निवारित किया जाएगा;
(ख) ऐसे अधिकारी के निरीक्षण के लिए और ऐसे समयों तथा स्थानों पर पेश किया जाएगा, जिनका राज्य सरकार निदेश दे;
(ग) धारा 330 की उपधारा (2) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति की दशा में, अपेक्षा किए जाने पर ऐसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा,
यह आदेश दे सकेगी कि ऐसा व्यक्ति ऐसे नातेदार या मित्र को परिदत्त कर दिया जाए।
(2) यदि इस प्रकार परिदत्त व्यक्ति किसी ऐसे अपराध का अभियुक्त है जिसका विचारण उसके विकृतचित्त होने और अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ होने के कारण मुल्तवी कर दिया गया है, और उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट निरीक्षक अधिकारी किसी समय मजिस्ट्रेट या न्यायालय को यह प्रमाणित करता है कि ऐसा व्यक्ति अपनी प्रतिरक्षा करने में समर्थ है, तो ऐसा मजिस्ट्रेट या न्यायालय उस नातेदार या मित्र से, जिसे ऐसा अभियुक्त परिदत्त किया गया था, यह अपेक्षा करेगा कि वह उसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश करे, और ऐसे पेश किए जाने पर मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 332 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही करेगा तथा निरीक्षक अधिकारी का प्रमाणपत्र साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
