पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 333 अब CrPC धारा 297 है
वे प्राधिकारी जिनके समक्ष शपथपत्र दाखिल किए जा सकते हैं।
पुराना कानून
BNSS §333
वे प्राधिकारी जिनके समक्ष शपथपत्र दाखिल किए जा सकते हैं।
(1) इस संहिता के अंतर्गत किसी न्यायालय के समक्ष प्रयोग किए जाने वाले शपथपत्र निम्नलिखित के समक्ष शपथपूर्वक या प्रतिज्ञापूर्वक दिए जा सकते हैं---
(क) कोई न्यायाधीश या न्यायिक या कार्यकारी मजिस्ट्रेट; या
(ख) उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय द्वारा नियुक्त कोई शपथ आयुक्त; या
(ग) नोटरी अधिनियम, 1952 (1952 का 53) के तहत नियुक्त कोई नोटरी।
(2) शपथपत्र केवल उन्हीं तथ्यों तक सीमित होंगे, और उनमें अलग-अलग रूप से उन तथ्यों का उल्लेख किया जाएगा जिन्हें शपथकर्ता अपने ज्ञान से सिद्ध कर सकता है तथा ऐसे तथ्य जिन्हें सत्य मानने का उसके पास उचित आधार है, और बाद वाले मामले में, शपथकर्ता को ऐसे विश्वास के आधार स्पष्ट रूप से बताने होंगे।
(3) न्यायालय हलफनामे में किसी भी अपमानजनक और अप्रासंगिक मामले को हटाने या संशोधित करने का आदेश दे सकता है।
पूरा पढ़ें: BNSS §333(क) कोई न्यायाधीश या न्यायिक या कार्यकारी मजिस्ट्रेट; या
(ख) उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय द्वारा नियुक्त कोई शपथ आयुक्त; या
(ग) नोटरी अधिनियम, 1952 (1952 का 53) के तहत नियुक्त कोई नोटरी।
(2) शपथपत्र केवल उन्हीं तथ्यों तक सीमित होंगे, और उनमें अलग-अलग रूप से उन तथ्यों का उल्लेख किया जाएगा जिन्हें शपथकर्ता अपने ज्ञान से सिद्ध कर सकता है तथा ऐसे तथ्य जिन्हें सत्य मानने का उसके पास उचित आधार है, और बाद वाले मामले में, शपथकर्ता को ऐसे विश्वास के आधार स्पष्ट रूप से बताने होंगे।
(3) न्यायालय हलफनामे में किसी भी अपमानजनक और अप्रासंगिक मामले को हटाने या संशोधित करने का आदेश दे सकता है।
नया कानून
CrPC §297
धारा 297. वे प्राधिकारी जिनके समक्ष शपथपत्रों पर शपथ ली जा सकेगी
297. वे प्राधिकारी जिनके समक्ष शपथपत्रों पर शपथ ली जा सकेगी
(1) इस संहिता के अधीन किसी न्यायालय के समक्ष उपयोग में लाए जाने वाले शपथपत्रों पर—
(क) किसी न्यायाधीश या किसी न्यायिक या कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष, या
(ख) किसी उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय द्वारा नियुक्त किसी शपथ आयुक्त के समक्ष, या
(ग) नोटरी अधिनियम, 1952 (1952 का 53) के अधीन नियुक्त किसी नोटरी के समक्ष,
शपथ ली या प्रतिज्ञान किया जा सकेगा।
(2) शपथपत्र ऐसे तथ्यों तक ही सीमित रहेंगे और उनको पृथक्-पृथक् कथित करेंगे, जिन्हें अभिसाक्षी अपनी स्वयं की जानकारी से साबित करने में समर्थ है तथा ऐसे तथ्यों को, जिनके सत्य होने का विश्वास करने के लिए उसके पास युक्तियुक्त आधार है, और पश्चात्कथित दशा में अभिसाक्षी ऐसे विश्वास के आधार स्पष्ट रूप से कथित करेगा।
(3) न्यायालय शपथपत्र में की किसी कलंकात्मक और असंगत बात को काट देने या उसमें संशोधन करने का आदेश दे सकेगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §297(1) इस संहिता के अधीन किसी न्यायालय के समक्ष उपयोग में लाए जाने वाले शपथपत्रों पर—
(क) किसी न्यायाधीश या किसी न्यायिक या कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष, या
(ख) किसी उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय द्वारा नियुक्त किसी शपथ आयुक्त के समक्ष, या
(ग) नोटरी अधिनियम, 1952 (1952 का 53) के अधीन नियुक्त किसी नोटरी के समक्ष,
शपथ ली या प्रतिज्ञान किया जा सकेगा।
(2) शपथपत्र ऐसे तथ्यों तक ही सीमित रहेंगे और उनको पृथक्-पृथक् कथित करेंगे, जिन्हें अभिसाक्षी अपनी स्वयं की जानकारी से साबित करने में समर्थ है तथा ऐसे तथ्यों को, जिनके सत्य होने का विश्वास करने के लिए उसके पास युक्तियुक्त आधार है, और पश्चात्कथित दशा में अभिसाक्षी ऐसे विश्वास के आधार स्पष्ट रूप से कथित करेगा।
(3) न्यायालय शपथपत्र में की किसी कलंकात्मक और असंगत बात को काट देने या उसमें संशोधन करने का आदेश दे सकेगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
