पाठ बदला गया है
BNSS धारा 303 अब CrPC धारा 268 है
धारा 302 के संचालन से कुछ व्यक्तियों को बाहर करने की राज्य सरकार या केंद्र सरकार की शक्ति।
पुराना कानून
BNSS §303
धारा 302 के संचालन से कुछ व्यक्तियों को बाहर करने की राज्य सरकार या केंद्र सरकार की शक्ति।
(1) राज्य सरकार या केंद्र सरकार, जैसा भी मामला हो, उपधारा (2) में निर्दिष्ट मामलों को ध्यान में रखते हुए, किसी भी समय सामान्य या विशेष आदेश द्वारा यह निर्देश दे सकती है कि किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को उस कारागार से नहीं हटाया जाएगा जिसमें वे बंद या हिरासत में हैं, और इसके बाद, जब तक यह आदेश लागू रहता है, धारा 302 के तहत राज्य सरकार या केंद्र सरकार के आदेश से पहले या बाद में बनाया गया कोई भी आदेश ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग के संबंध में प्रभावी नहीं होगा।
(2) उपधारा (1) के तहत आदेश देने से पहले, राज्य सरकार या केंद्र सरकार, अपनी केंद्रीय एजेंसी द्वारा शुरू किए गए मामलों में, जैसा भी मामला हो, निम्नलिखित बातों पर विचार करेगी, अर्थात्:---
(क) उस अपराध की प्रकृति, या वे आधार जिन पर किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को कारागार में बंद या हिरासत में रखने का आदेश दिया गया है;
(ख) यदि व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को कारागार से बाहर निकालने की अनुमति दी जाती है तो सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी की संभावना;
(सी) सामान्यतः जनहित।
पूरा पढ़ें: BNSS §303(2) उपधारा (1) के तहत आदेश देने से पहले, राज्य सरकार या केंद्र सरकार, अपनी केंद्रीय एजेंसी द्वारा शुरू किए गए मामलों में, जैसा भी मामला हो, निम्नलिखित बातों पर विचार करेगी, अर्थात्:---
(क) उस अपराध की प्रकृति, या वे आधार जिन पर किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को कारागार में बंद या हिरासत में रखने का आदेश दिया गया है;
(ख) यदि व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को कारागार से बाहर निकालने की अनुमति दी जाती है तो सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी की संभावना;
(सी) सामान्यतः जनहित।
नया कानून
CrPC §268
धारा 268. कतिपय व्यक्तियों को धारा 267 के प्रवर्तन से अपवर्जित करने की राज्य सरकार की शक्ति
268. कतिपय व्यक्तियों को धारा 267 के प्रवर्तन से अपवर्जित करने की राज्य सरकार की शक्ति
(1) राज्य सरकार, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट बातों को ध्यान में रखते हुए, किसी भी समय, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि किसी व्यक्ति को या व्यक्तियों के किसी वर्ग को उस कारागार से, जिसमें वह या वे परिरुद्ध या निरुद्ध हों, नहीं हटाया जाएगा, और तब, जब तक वह आदेश प्रवृत्त रहता है, धारा 267 के अधीन किया गया कोई आदेश, चाहे वह राज्य सरकार के आदेश से पहले किया गया हो या उसके पश्चात्, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग के संबंध में प्रभावी नहीं होगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन आदेश करने से पहले, राज्य सरकार निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखेगी, अर्थात्:—
(क) उस अपराध की प्रकृति, जिसके लिए, अथवा वे आधार, जिन पर, उस व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को कारागार में परिरुद्ध या निरुद्ध रखे जाने का आदेश दिया गया है;
(ख) लोक व्यवस्था में विघ्न पड़ने की संभाव्यता, यदि उस व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को कारागार से हटाए जाने की अनुज्ञा दी जाती है;
(ग) साधारणतया लोकहित।
पूरा पढ़ें: CrPC §268(1) राज्य सरकार, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट बातों को ध्यान में रखते हुए, किसी भी समय, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि किसी व्यक्ति को या व्यक्तियों के किसी वर्ग को उस कारागार से, जिसमें वह या वे परिरुद्ध या निरुद्ध हों, नहीं हटाया जाएगा, और तब, जब तक वह आदेश प्रवृत्त रहता है, धारा 267 के अधीन किया गया कोई आदेश, चाहे वह राज्य सरकार के आदेश से पहले किया गया हो या उसके पश्चात्, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग के संबंध में प्रभावी नहीं होगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन आदेश करने से पहले, राज्य सरकार निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखेगी, अर्थात्:—
(क) उस अपराध की प्रकृति, जिसके लिए, अथवा वे आधार, जिन पर, उस व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को कारागार में परिरुद्ध या निरुद्ध रखे जाने का आदेश दिया गया है;
(ख) लोक व्यवस्था में विघ्न पड़ने की संभाव्यता, यदि उस व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को कारागार से हटाए जाने की अनुज्ञा दी जाती है;
(ग) साधारणतया लोकहित।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
