पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 212 अब CrPC धारा 192 है
मामलों को मजिस्ट्रेटों को सौंपना।
पुराना कानून
BNSS §212
मामलों को मजिस्ट्रेटों को सौंपना।
(1) कोई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किसी अपराध का संज्ञान लेने के बाद मामले को जांच या परीक्षण के लिए अपने अधीनस्थ किसी सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकता है।
(2) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस संबंध में सशक्त किया गया प्रथम श्रेणी का कोई मजिस्ट्रेट, किसी अपराध का संज्ञान लेने के बाद, मामले को जांच या परीक्षण के लिए ऐसे अन्य सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकता है, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सामान्य या विशेष आदेश द्वारा निर्दिष्ट करे, और उसके बाद ऐसा मजिस्ट्रेट जांच या परीक्षण कर सकता है।
पूरा पढ़ें: BNSS §212(2) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस संबंध में सशक्त किया गया प्रथम श्रेणी का कोई मजिस्ट्रेट, किसी अपराध का संज्ञान लेने के बाद, मामले को जांच या परीक्षण के लिए ऐसे अन्य सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकता है, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सामान्य या विशेष आदेश द्वारा निर्दिष्ट करे, और उसके बाद ऐसा मजिस्ट्रेट जांच या परीक्षण कर सकता है।
नया कानून
CrPC §192
धारा 192. मजिस्ट्रेटों को मामलों का सौंपा जाना
192. मजिस्ट्रेटों को मामलों का सौंपा जाना
(1) कोई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, किसी अपराध का संज्ञान करने के पश्चात्, मामले को जांच या विचारण के लिए अपने अधीनस्थ किसी सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकेगा।
(2) प्रथम वर्ग का कोई मजिस्ट्रेट, जो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस निमित्त सशक्त किया गया है, किसी अपराध का संज्ञान करने के पश्चात्, मामले को जांच या विचारण के लिए ऐसे अन्य सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकेगा, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट साधारण या विशेष आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे, और तब ऐसा मजिस्ट्रेट जांच या विचारण कर सकेगा।
राज्य संशोधन
पंजाब तथा संघ राज्यक्षेत्र चंडीगढ़:
धारा 192 में, जहां कहीं "मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट" शब्द तथा "प्रथम वर्ग का मजिस्ट्रेट" या "मजिस्ट्रेट" शब्द आते हैं, वहां क्रमशः "जिला मजिस्ट्रेट" और "कार्यपालक मजिस्ट्रेट" शब्द रखे जाएंगे।
[पंजाब अधिनियम 1983 का 22 द्वारा (27-6-1983 से प्रभावी)]
पूरा पढ़ें: CrPC §192(1) कोई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, किसी अपराध का संज्ञान करने के पश्चात्, मामले को जांच या विचारण के लिए अपने अधीनस्थ किसी सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकेगा।
(2) प्रथम वर्ग का कोई मजिस्ट्रेट, जो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस निमित्त सशक्त किया गया है, किसी अपराध का संज्ञान करने के पश्चात्, मामले को जांच या विचारण के लिए ऐसे अन्य सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकेगा, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट साधारण या विशेष आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे, और तब ऐसा मजिस्ट्रेट जांच या विचारण कर सकेगा।
राज्य संशोधन
पंजाब तथा संघ राज्यक्षेत्र चंडीगढ़:
धारा 192 में, जहां कहीं "मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट" शब्द तथा "प्रथम वर्ग का मजिस्ट्रेट" या "मजिस्ट्रेट" शब्द आते हैं, वहां क्रमशः "जिला मजिस्ट्रेट" और "कार्यपालक मजिस्ट्रेट" शब्द रखे जाएंगे।
[पंजाब अधिनियम 1983 का 22 द्वारा (27-6-1983 से प्रभावी)]
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
