पुराना कानून
BNSS §185
पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी।
(1) जब भी किसी पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी या जांच करने वाले पुलिस अधिकारी को यह मानने का उचित आधार हो कि किसी अपराध की जांच के प्रयोजनों के लिए आवश्यक कोई वस्तु, जिसकी जांच करने के लिए वह अधिकृत है, उस पुलिस स्टेशन की सीमा के भीतर किसी स्थान पर पाई जा सकती है जिसका वह प्रभारी है या जिससे वह संबद्ध है, और यह कि उसकी राय में ऐसी वस्तु अनुचित विलंब के बिना अन्यथा प्राप्त नहीं की जा सकती है, तो ऐसा अधिकारी अपने विश्वास के आधारों को केस-डायरी में लिखित रूप में दर्ज करने और ऐसे लिखित में, जहां तक संभव हो, उस वस्तु का उल्लेख करने के बाद, जिसकी तलाश की जानी है, उस स्टेशन की सीमा के भीतर किसी स्थान पर ऐसी वस्तु की तलाश कर सकता है, या करवा सकता है।
(2) उपधारा (1) के तहत कार्यवाही करने वाला पुलिस अधिकारी, यदि संभव हो तो, स्वयं तलाशी लेगा:
इस धारा के अंतर्गत की गई तलाशी को ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से, अधिमानतः मोबाइल फोन द्वारा रिकॉर्ड किया जाएगा।
(3) यदि वह स्वयं तलाशी लेने में असमर्थ हो, और उस समय तलाशी लेने के लिए कोई अन्य सक्षम व्यक्ति उपस्थित न हो, तो वह ऐसा करने के कारणों को लिखित में दर्ज करने के बाद, अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को तलाशी लेने का आदेश दे सकता है, और वह ऐसे अधीनस्थ अधिकारी को लिखित में एक आदेश देगा, जिसमें तलाशी लिए जाने वाले स्थान और जहाँ तक संभव हो, तलाशी के लिए आवश्यक वस्तु का उल्लेख होगा; और ऐसा अधीनस्थ अधिकारी तब उस स्थान पर उस वस्तु की तलाशी ले सकता है।
(4) इस संहिता के तलाशी वारंट संबंधी प्रावधान और धारा 103 में निहित तलाशी संबंधी सामान्य प्रावधान, जहां तक संभव हो, इस धारा के तहत की गई तलाशी पर लागू होंगे।
(5) उपधारा (1) या उपधारा (3) के तहत बनाए गए किसी भी अभिलेख की प्रतियां तुरंत, लेकिन अड़तालीस घंटे से अधिक समय के भीतर, अपराध का संज्ञान लेने के लिए अधिकृत निकटतम मजिस्ट्रेट को भेजी जाएंगी, और तलाशी लिए गए स्थान के स्वामी या अधिभोगी को आवेदन करने पर मजिस्ट्रेट द्वारा नि:शुल्क उसकी एक प्रति उपलब्ध कराई जाएगी।
पूरा पढ़ें: BNSS §185(2) उपधारा (1) के तहत कार्यवाही करने वाला पुलिस अधिकारी, यदि संभव हो तो, स्वयं तलाशी लेगा:
इस धारा के अंतर्गत की गई तलाशी को ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से, अधिमानतः मोबाइल फोन द्वारा रिकॉर्ड किया जाएगा।
(3) यदि वह स्वयं तलाशी लेने में असमर्थ हो, और उस समय तलाशी लेने के लिए कोई अन्य सक्षम व्यक्ति उपस्थित न हो, तो वह ऐसा करने के कारणों को लिखित में दर्ज करने के बाद, अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को तलाशी लेने का आदेश दे सकता है, और वह ऐसे अधीनस्थ अधिकारी को लिखित में एक आदेश देगा, जिसमें तलाशी लिए जाने वाले स्थान और जहाँ तक संभव हो, तलाशी के लिए आवश्यक वस्तु का उल्लेख होगा; और ऐसा अधीनस्थ अधिकारी तब उस स्थान पर उस वस्तु की तलाशी ले सकता है।
(4) इस संहिता के तलाशी वारंट संबंधी प्रावधान और धारा 103 में निहित तलाशी संबंधी सामान्य प्रावधान, जहां तक संभव हो, इस धारा के तहत की गई तलाशी पर लागू होंगे।
(5) उपधारा (1) या उपधारा (3) के तहत बनाए गए किसी भी अभिलेख की प्रतियां तुरंत, लेकिन अड़तालीस घंटे से अधिक समय के भीतर, अपराध का संज्ञान लेने के लिए अधिकृत निकटतम मजिस्ट्रेट को भेजी जाएंगी, और तलाशी लिए गए स्थान के स्वामी या अधिभोगी को आवेदन करने पर मजिस्ट्रेट द्वारा नि:शुल्क उसकी एक प्रति उपलब्ध कराई जाएगी।
नया कानून
CrPC §165
धारा 165. पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी
165. पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी
(1) जब कभी किसी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को, या अन्वेषण करने वाले किसी पुलिस अधिकारी को यह विश्वास करने के युक्तियुक्त आधार हैं कि ऐसी कोई वस्तु, जो किसी ऐसे अपराध के अन्वेषण के प्रयोजनों के लिए आवश्यक है, जिसका अन्वेषण करने के लिए वह प्राधिकृत है, उस पुलिस थाने की, जिसका वह भारसाधक है या जिससे वह संलग्न है, सीमाओं के भीतर किसी स्थान में मिल सकेगी, और यह कि ऐसी वस्तु उसकी राय में अनुचित विलंब के बिना अन्यथा अभिप्राप्त नहीं की जा सकती, तब ऐसा अधिकारी अपने विश्वास के आधारों को लेखबद्ध करने के पश्चात् और ऐसे लेख में, जहां तक संभव हो, उस वस्तु को विनिर्दिष्ट करने के पश्चात्, जिसके लिए तलाशी ली जानी है, ऐसे थाने की सीमाओं के भीतर किसी स्थान में ऐसी वस्तु की तलाशी ले सकेगा या तलाशी लिवा सकेगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन कार्यवाही करने वाला पुलिस अधिकारी, यदि साध्य हो तो, तलाशी स्वयं लेगा।
(3) यदि वह तलाशी स्वयं लेने में असमर्थ है और उस समय तलाशी लेने के लिए सक्षम कोई अन्य व्यक्ति उपस्थित नहीं है, तो वह, ऐसा करने के अपने कारणों को लेखबद्ध करने के पश्चात्, अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी से तलाशी लेने की अपेक्षा कर सकेगा और वह ऐसे अधीनस्थ अधिकारी को लिखित आदेश परिदत्त करेगा, जिसमें उस स्थान को, जिसकी तलाशी ली जानी है, और जहां तक संभव हो, उस वस्तु को, जिसके लिए तलाशी ली जानी है, विनिर्दिष्ट किया जाएगा; और तब ऐसा अधीनस्थ अधिकारी ऐसे स्थान में ऐसी वस्तु की तलाशी ले सकेगा।
(4) तलाशी-वारंटों के बारे में इस संहिता के उपबंध और तलाशियों के बारे में धारा 100 में अंतर्विष्ट साधारण उपबंध, जहां तक हो सके, इस धारा के अधीन ली गई तलाशी को लागू होंगे।
(5) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन किए गए किसी अभिलेख की प्रतियां उस निकटतम मजिस्ट्रेट को तुरंत भेजी जाएंगी, जो उस अपराध का संज्ञान करने के लिए सशक्त है, और जिस स्थान की तलाशी ली गई है उसके स्वामी या अधिभोगी को आवेदन किए जाने पर मजिस्ट्रेट द्वारा उसकी एक प्रति निःशुल्क दी जाएगी।
पूरा पढ़ें: CrPC §165(1) जब कभी किसी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को, या अन्वेषण करने वाले किसी पुलिस अधिकारी को यह विश्वास करने के युक्तियुक्त आधार हैं कि ऐसी कोई वस्तु, जो किसी ऐसे अपराध के अन्वेषण के प्रयोजनों के लिए आवश्यक है, जिसका अन्वेषण करने के लिए वह प्राधिकृत है, उस पुलिस थाने की, जिसका वह भारसाधक है या जिससे वह संलग्न है, सीमाओं के भीतर किसी स्थान में मिल सकेगी, और यह कि ऐसी वस्तु उसकी राय में अनुचित विलंब के बिना अन्यथा अभिप्राप्त नहीं की जा सकती, तब ऐसा अधिकारी अपने विश्वास के आधारों को लेखबद्ध करने के पश्चात् और ऐसे लेख में, जहां तक संभव हो, उस वस्तु को विनिर्दिष्ट करने के पश्चात्, जिसके लिए तलाशी ली जानी है, ऐसे थाने की सीमाओं के भीतर किसी स्थान में ऐसी वस्तु की तलाशी ले सकेगा या तलाशी लिवा सकेगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन कार्यवाही करने वाला पुलिस अधिकारी, यदि साध्य हो तो, तलाशी स्वयं लेगा।
(3) यदि वह तलाशी स्वयं लेने में असमर्थ है और उस समय तलाशी लेने के लिए सक्षम कोई अन्य व्यक्ति उपस्थित नहीं है, तो वह, ऐसा करने के अपने कारणों को लेखबद्ध करने के पश्चात्, अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी से तलाशी लेने की अपेक्षा कर सकेगा और वह ऐसे अधीनस्थ अधिकारी को लिखित आदेश परिदत्त करेगा, जिसमें उस स्थान को, जिसकी तलाशी ली जानी है, और जहां तक संभव हो, उस वस्तु को, जिसके लिए तलाशी ली जानी है, विनिर्दिष्ट किया जाएगा; और तब ऐसा अधीनस्थ अधिकारी ऐसे स्थान में ऐसी वस्तु की तलाशी ले सकेगा।
(4) तलाशी-वारंटों के बारे में इस संहिता के उपबंध और तलाशियों के बारे में धारा 100 में अंतर्विष्ट साधारण उपबंध, जहां तक हो सके, इस धारा के अधीन ली गई तलाशी को लागू होंगे।
(5) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन किए गए किसी अभिलेख की प्रतियां उस निकटतम मजिस्ट्रेट को तुरंत भेजी जाएंगी, जो उस अपराध का संज्ञान करने के लिए सशक्त है, और जिस स्थान की तलाशी ली गई है उसके स्वामी या अधिभोगी को आवेदन किए जाने पर मजिस्ट्रेट द्वारा उसकी एक प्रति निःशुल्क दी जाएगी।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
