पाठ बदला गया है
BNSS धारा 157 अब CrPC धारा 138 है
वह प्रक्रिया जिसमें धारा 152 के तहत जिसके विरुद्ध आदेश दिया गया है, वह कारण बताओ नोटिस प्रस्तुत करता है।
पुराना कानून
BNSS §157
वह प्रक्रिया जिसमें धारा 152 के तहत जिसके विरुद्ध आदेश दिया गया है, वह कारण बताओ नोटिस प्रस्तुत करता है।
(1) यदि वह व्यक्ति जिसके विरुद्ध धारा 152 के अंतर्गत आदेश दिया गया है, उपस्थित होकर आदेश के विरुद्ध कारण बताता है, तो मजिस्ट्रेट मामले में समन मामले की तरह साक्ष्य लेगा।
(2) यदि मजिस्ट्रेट संतुष्ट है कि आदेश, चाहे मूल रूप में हो या ऐसे संशोधन के अधीन जैसा वह आवश्यक समझता है, उचित और सही है, तो आदेश बिना संशोधन के या, जैसा भी मामला हो, ऐसे संशोधन के साथ पूर्ण कर दिया जाएगा।
(3) यदि मजिस्ट्रेट संतुष्ट न हो तो मामले में आगे कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी:
इस धारा के अंतर्गत कार्यवाही यथाशीघ्र नब्बे दिनों की अवधि के भीतर पूरी की जाएगी, जिसे लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर एक सौ बीस दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।
पूरा पढ़ें: BNSS §157(2) यदि मजिस्ट्रेट संतुष्ट है कि आदेश, चाहे मूल रूप में हो या ऐसे संशोधन के अधीन जैसा वह आवश्यक समझता है, उचित और सही है, तो आदेश बिना संशोधन के या, जैसा भी मामला हो, ऐसे संशोधन के साथ पूर्ण कर दिया जाएगा।
(3) यदि मजिस्ट्रेट संतुष्ट न हो तो मामले में आगे कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी:
इस धारा के अंतर्गत कार्यवाही यथाशीघ्र नब्बे दिनों की अवधि के भीतर पूरी की जाएगी, जिसे लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर एक सौ बीस दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।
नया कानून
CrPC §138
धारा 138. जहां वह कारण दर्शित करने के लिए हाजिर होता है वहां प्रक्रिया
138. जहां वह कारण दर्शित करने के लिए हाजिर होता है वहां प्रक्रिया
(1) यदि वह व्यक्ति, जिसके विरुद्ध धारा 133 के अधीन कोई आदेश किया गया है, हाजिर होता है और उस आदेश के विरुद्ध कारण दर्शित करता है, तो मजिस्ट्रेट उस मामले में साक्ष्य उसी प्रकार लेगा, जैसे किसी समन-मामले में लिया जाता है।
(2) यदि मजिस्ट्रेट का यह समाधान हो जाता है कि वह आदेश, या तो जैसा वह मूलतः किया गया था वैसा ही, या ऐसे उपांतरण के अधीन रहते हुए, जैसा वह आवश्यक समझता है, युक्तियुक्त और उचित है, तो वह आदेश, यथास्थिति, बिना उपांतरण के या ऐसे उपांतरण सहित, पूर्ण कर दिया जाएगा।
(3) यदि मजिस्ट्रेट का ऐसा समाधान नहीं होता है, तो उस मामले में आगे कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी।
पूरा पढ़ें: CrPC §138(1) यदि वह व्यक्ति, जिसके विरुद्ध धारा 133 के अधीन कोई आदेश किया गया है, हाजिर होता है और उस आदेश के विरुद्ध कारण दर्शित करता है, तो मजिस्ट्रेट उस मामले में साक्ष्य उसी प्रकार लेगा, जैसे किसी समन-मामले में लिया जाता है।
(2) यदि मजिस्ट्रेट का यह समाधान हो जाता है कि वह आदेश, या तो जैसा वह मूलतः किया गया था वैसा ही, या ऐसे उपांतरण के अधीन रहते हुए, जैसा वह आवश्यक समझता है, युक्तियुक्त और उचित है, तो वह आदेश, यथास्थिति, बिना उपांतरण के या ऐसे उपांतरण सहित, पूर्ण कर दिया जाएगा।
(3) यदि मजिस्ट्रेट का ऐसा समाधान नहीं होता है, तो उस मामले में आगे कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
